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सुप्रीम अस्पताल ने दयालबाग में लगाया निशुल्क हेल्थ चैकअप कैम्प

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फरीदाबाद: सुप्रीम अस्पताल की तरफ से दयालबाग स्थित आर्यन गार्डन में नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 112 मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की गई और डॉक्टरों द्वारा आए हुए मरीजों को उचित परामर्श दिया गया। 

दयालबाग में आयोजित शिविर में ब्लड, शुगर, बी.पी., वजन आदि की जांच की गई। इस मौके पर डा. अशोक सचदेवा एवं सलामत अली की टीम ने मरीजों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी। दयालबाग स्थित जांच शिविर में अस्पताल के चेयरमैन प्रेम सिंह राणा एवं वाइस चेयरमैन युवराज दिग्विजय सिंह राणा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने कहा कि इस तरह के नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाकर आम जनता को लाभ पहुंचाना पुण्य का कार्य है। लोगों को इस प्रकार के शिविरों में अवश्य भाग लेना चाहिए। अस्पतालों में जहां मोटा पैसा खर्च कर शारीरिक जांच कराई जाती है, वहीं नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविरों में फ्री में शारीरिक जांच हो जाती है। 

उन्होंने कहा कि सुप्रीम अस्पताल ने गरीब एवं असहाय लोगों की सहायता के लिए एक अभियान चलाया हुआ है, जिसके तहत प्रत्येक सप्ताह में एक शिविर का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के बेहतरीन डॉक्टर्स का पैनल इन  शिविरों में उपस्थित रहते हैं, जो लोगों की नि:शुल्क जांच करते हैं और उचित परामश देते हैं। राणा ने बताया कि सुपरिम अस्पताल में भी शनिवार एवं रविवार को नि:शुल्क परामर्श दिया जाता है। इसलिए अधिक से अधिक संख्या में सेवाओं का लाभ उठाएं।

मरीजों को देशभर के डॉक्टर हड़ताल करके देंगे सन्देश, तुम एक डॉक्टर मारोगे, तो लाखों मरीज मरेंगे

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फरीदाबाद: आज इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने हड़ताल की घोषणा की है, आज देशभर के डॉक्टर हड़ताल करेंगे हालाँकि आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी. फरीदाबाद के भी सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टर हड़ताल कर सकते हैं क्योंकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का आदेश मानना मजबूरी है.

आपातकालीन सेवाएं भरे जारी रहें लेकिन जब डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे तो देश भर में हजारों लाखों मरीज बेमौत मरेंगे क्योंकि उनका उचित इलाज नहीं हो पाएगा.

देशभर में महा हड़ताल करके डॉक्टर मरीजों और उनके रिश्तेदारों को यह भी सन्देश देना चाहते हैं कि अगर मरीज लोग एक डॉक्टर की ह्त्या करेंगे तो डॉक्टर ऐसा ही कदम उठाएंगे और इलाज ना होने से लाखों मरीज बेमौत मरेंगे, इसलिए लोग अपने गुस्से पर काबू करें और डॉक्टरों पर कभी भी जानलेवा हमला ना करें.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बंगाल के NRS हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज में मरीज मुहम्मद सईद की मौत के बाद उनके रिश्तेदारों ने दो डॉक्टरों पर जानलेवा हमला कर दिया जिसमें डॉ परिबहा मुख़र्जी की इलाज के दौरान मौत हो गयी.

यह घटना करीब एक हप्ते पहले ही है लेकिन देशभर के डॉक्टर सरकार से डॉक्टरों के लिए सुरक्षा की मांग कर रहे हैं और ऐसा कानून बनाने की मांग कर रहे हैं कि अगर मरीज के रिश्तेदार डॉक्टरों से मिसबिहैव करें तो उन्हें कड़ी सजा मिले.

फरीदाबाद पहुंची 'बंगाल डॉ मुखर्जी हत्याकांड' की आंच, ESI हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने की हड़ताल

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फरीदाबाद: बंगाल में एक मरीज के रिश्तेदारों द्वारा एक सरकारी अस्पताल के डॉ परिबहा मुख़र्जी हत्याकांड की आंच अब फरीदाबाद तक पहुँच गयी है. आज NIT-3 स्थित ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने हड़ताल कर दी जिसकी वजह से मरीज परेशान हो गए. अभी तक हड़ताल समाप्त नहीं हुई है इसलिए हो सकता है कि मरीजों को कुछ दिन और परेशानी झेलनी पड़े.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 9 जून को 80 वर्षीय मरीज मुहम्मद सईद को उल्टी और तेज सिरदर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था. उसी दिन उन्हें मरा घोषित कर दिया गया जिसकी वजह से मरीज के रिश्तेदार नाराज हो गए और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों को घेरकर मारपीट शुरू कर दी, कुछ देर बाद मृतक मरीज के और रिश्तेदार आ गए और डॉक्टरों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी जिसमें दो डॉक्टरों को गंभीर चोट आयी. इलाज के दौरान डॉ परिबहा मुख़र्जी की मौत हो गयी जबकि यश टेकवानी का इलाज चल रहा है.

इसके बाद डॉक्टरों की संस्थाओं ने हड़ताल की घोषणा की, दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में हड़ताल हो रही है. आज फरीदाबाद के ESI हॉस्पिटल में भी हड़ताल हुई है, डॉक्टर सरकार से सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. देखें वीडियो - 

बदतर है ESI अस्पताल की हालत, ना खुद इलाज की सुविधा, ना रिफर की व्यवस्था, धक्के खिलाते हैं बस


फरीदाबाद: फरीदाबाद NIT स्थित ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज, नाम का तो मेडिकल कॉलेज है लेकिन यहाँ पर ना उचित इलाज की सुविधा है और ना ही रेफर की उचित व्यवस्था है, 8 जून 2019 को सेक्टर 21D, हाउस नंबर 1093 निवासी जय प्रकाश पाण्डेय को ESI अस्पताल में दिन भर दौड़ भाग के बाद शाम को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, उन्हें ट्यूमर और अन्य सम्बंधित बीमारियाँ थी और सुगर 400 के आसपास पहुँच चुका था, उनकी हालत काफी सीरियस थी.

ESI में गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा ना होने के कारण जय प्रकाश पाण्डेय को इमरजेंसी में बैठे डॉक्टरों ने पार्क हॉस्पिटल रेफर कर दिया लेकिन मरीज के मरिजनों ने पार्क हॉस्पिटल के निगेटिव माहौल की वजह से वहां जाने से इनकार कर दिया.


उसके बाद मरीजों के परिजनों ने पता किया कि कौन कौन से हॉस्पिटल ESI के पैनल में हैं तो नीचे वाली लिस्ट अस्पताल में चिपकी मिली. इस समय पैनल में सिर्फ 6 प्राइवेट अस्पताल हैं - पार्क हॉस्पिटल, मेट्रो हॉस्पिटल, QRG हॉस्पिटल, सर्वोदय हॉस्पिटल, एशियन हॉस्पिटल और फोर्टिस हॉस्पिटल.

लिस्ट में सर्वोदय, एशियन और फोर्टिस पर क्रोस का निशान लगा था, इसलिए मरीज के परिजनों को सिर्फ पार्क और मेट्रो हॉस्पिटल में जाने का आप्शन था, मेट्रो में सिर्फ हार्ट के मरीज भेजे जा सकते हैं इसलिए मरीज के पास सिर्फ पार्क हॉस्पिटल का आप्शन था.

काफी हंगामे के बाद मरीज के परिजनों को बोल दिया गया कि 6 अस्पतालों में किसी में भी रेफर करवा लो, इसके बाद मरीज के परिजनों ने सभी अस्पतालों में फोन करना शुरू किया तो वहां पता चला कि हमारे यहाँ बेड खाली नहीं हैं, कुछ ने कहा कि हमारा बिल नहीं पे किया जा रहा इसलिए हम नहीं लेंगे.


मरीज के परिजन काफी देर तक परेशान रहे, मरीज की तवियत बिगडती जा रही थी, इसके बाद काफी कोशिशों के बाद मरीज को सर्वोदय हॉस्पिटल रेफर करवाया गया लेकिन वहां जाने के बाद सर्वोदय हॉस्पिटल ने नखरे दिखाना शुरू किया और मरीज के परिजनों को बोले - मरीज को लेकर जाओ और पर्ची में ट्यूमर लिखवाकर लाओ, मरीज के परिजनों ने कहा कि इसके लिए मरीज को वापस ESI क्यों लेकर जाएं, आप एडमिट कर, हम पर्ची में लिखवाकर ले आएँगे.

इस मौके पर वरिष्ठ वकील एल एन पाराशर भी मौजूद थे, काफी हंगामे के बाद सर्वोदय ने इलाज शुरू किया. वकील एल एन पाराशर ने कहा कि अस्पताल के मैनेजमेंट की कमीं की वजह से मरीजों को बहुत परेशानी हो रही है, इतने बड़े अस्पताल में भी इलाज की बढ़िया सुविधा नहीं है, मरीजों को धक्के खाना पड़ता है, सरकार को इसपर एक्शन लेना चाहिए.

मरीजों के पैसों से बने ESI हॉस्पिटल में मरीजों को समझा जाता है जानवर, गार्डों-डॉक्टरों की गुंडई

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फरीदाबाद: प्राइवेट कर्मचारियों के पैसों से ही ESI हॉस्पिटल बनाए जाते हैं, डॉक्टरों को सैलरी दी जाती है, गार्डों को भी सैलरी दी जाती है, सब कुछ प्राइवेट कर्मचारियों के पैसों से ही किया जाता है लेकिन प्राइवेट कर्मचारी जब बीमार होकर फरीदाबाद NIT-3 के ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भर्ती होते हैं तो उनके साथ जानवरों जैसा सुलूक किया जाता है, ना तो डॉक्टर तमीज से बात करते हैं, ना स्टाफ तमीज से बात करते हैं और ना ही सुरक्षा गार्ड तमीज से बात करते हैं. देखए ये वीडियो - 



डॉक्टर, स्टाफ और गार्ड यह समझते ही नहीं कि इन्हीं मरीजों के पैसों से उन्हें सैलरी दी जाती है, दरअसल अस्पताल के मालिक ये मरीज ही हैं, अगर ये हर महीनें अपनी सैलरी से पैसे ना कटवाएं तो ESI का सिस्टम चल ही नहीं पाएगा, मरीज जब भर्ती होते हैं तो डॉक्टर यह समझते हैं कि वे मरीजों को दवाई देकर अहसान कर रहे हैं, स्टाफ उन्हें जानवरों की तरह डांटते हैं, सुरक्षा गार्ड मरीजों को परिजनों से उन्हें मिलने नहीं देते, हमेशा डांटते-फटकारते रहते हैं. इस फोटो में देखिये, जानवरों की तरह मरीजों की भीड़ लगवा रखी है, टेस्ट की रिपोर्ट आने में कई कई हप्ते लग जाते हैं, अल्ट्रासाउंड के लिए 15-20 दिन की तारीख दी जाती है.


आज तो हद हो गयी, आठवीं फ्लोर पर मेडिकल वार्ड में बेड नंबर 12 पर भर्ती एक मरीज से कंपनी का मालिक मिलने आया था. उसके साथ दो और लोग थे, कुछ जरूरी पूछताछ कर रहे थे, गार्ड से उन्हें बाहर जाने को बोला तो कंपनी मालिक बोला थोडा जरूरी बात करनी है, इसके बाद गार्ड दोबारा आया और जिस स्टोर पर एक लड़का बैठा था उसे लात मार दी, इसके बाद कंपनी मालिक को गुस्सा आ गया और गार्ड के साथ जमकर बहस हुई. गार्ड बोला - डॉक्टर मरीजों के साथ उनसे मिलने वालों को देखकर नाराज होते हैं, डॉक्टर ना हुए प्रधानमंत्री हो गए ये तो.

उसके बाद दो तीन गार्ड इकठ्ठे हो गया, एक गार्ड से कहा कि किसी को मिलने मत दो, ऐसा लगा जैसे हॉस्पिटल उसी का है, उसे यह नहीं पता कि अस्पताल का मालिक यही मरीज हैं. ESI प्रशासन को अपने डॉक्टरों, स्टाफ और गार्डों को बताना चाहिए कि अस्पताल के मालिक ये मरीज ही हैं, इनसे नरमी से पेश आयें, इनका हमेशा मान सम्मान करें, देखते हैं यह सुधार कब होता है.

फरीदाबाद के ESIC को सुधारो मोदीजी, ये मरीजों को जानवरों की तरह दौडाते हैं, बहुत दुखी हैं लोग

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फरीदाबाद: शहर में ESI सिस्टम इतना गड़बड़ है कि इसे सुधारने की तुरंत जरूरत है, जनता इस सिस्टम से इतनी दुखी हो चुकी है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ अपना गुस्सा भी दिखा सकती है हालाँकि इसके लिए ESI प्रशासन और अधिकारी जिम्मेदार है.

NIT - 3 में ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज नाम से एक बड़ा हॉस्पिटल है, अगर इमारत की तुलना की जाए तो दिल्ली के AIMS को पूरी टक्कर देता है लेकिन अगर सुविधाओं की बात करें तो यह मरीजों के लिए नरक है. यहाँ का प्रशासन इतना लापरवाह और संवेदनहीन है कि मरीजों की परेशानी समझता ही नहीं है.

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प्राइवेट संस्थानों में काम करने वाले गरीब मजदूर और कर्मचारी हर महींने अपनी सैलरी से हजारों रुपये देकर ESI कार्ड बनवाते हैं ताकि उन्हें उचित इलाज मिल सके लेकिन तीन नंबर के बड़े अस्पताल में मरीजों को जानवरों की तरह दौडाया जाता है, OPD के लिए लम्बी लम्बी लाइन, कोई टेस्ट कराना है तो उसके लिए लम्बी लाइन, ब्लड टेस्ट कराना है तो लम्बी लाइन, अगर रिपोर्ट लेना है तो कई दिनों तक चक्कर लगाना पड़ता है, मतलब 100 रुपये वाले ब्लड टेस्ट के लिए 500 रुपये किराया खर्च करवा लेते हैं. इनको इतनी भी समझ नहीं है कि मरीज इतना दौड़-भाग करेगा तो उसे फायदा क्या मिला ESIC में पैसे जमा करने का.



जानवरों की तरह करवाया जाता है मरीजों को दौड़भाग

ESI प्रशासन इतना लापरवाह है कि दवाइयों के लिए भी मरीजों को इधर उधर भगाता है, घंटों इन्तजार करने के बाद डॉक्टर को दिखाने का मौका मिलता है, डॉक्टर दवाइयाँ लिखते हैं, मरीज लोग अस्पताल के मेडिकल स्टोर के बाहर लाइन लगाते हैं, काफी देर बाद उनका नंबर आता है तो केमिस्ट आधी दवाइयां अन्दर से देते हैं और आधी दवाइयां लेने के लिए छोटी ESI में भेज देते हैं, इसके बाद मरीज किराया-भाडा खर्च करके छोटी ESI में जाते हैं तो वहां पता चलता है कि कुछ टेबलेट वहां पर भी नहीं हैं, इसके बाद मरीज से कहा जाता है कि ये दवा मेडिकल स्टोर से ले लेना और हमें बिल दिखा देना, आपका पैसा मिल जाएगा, इसके बाद मरीज फिर से किराया-भाडा खर्च करके मेडिकल स्टोर पर जाता है, दवा लेता है और बिल बनवाता है, उसके बाद मरीज फिर से किराया भाडा खर्च करके बिल छोटी ESI में जमा करता है और कई दिनों तक चक्कर लगाने के बाद उसका पैसा मिलता है. कई बार 10 रुपये की दवा के लिए इतना परेशान किया जाता है कि मरीज लोग अपने पैसे से मेडिकल स्टोर पर दवाइयाँ खरीद लेते हैं और बिल जमा करने के झंझट में फंसते ही नहीं.

मरीजों की परेशानी को लेकर हमने हॉस्पिटल के प्रशासन से बात की तो उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल में व्यवस्थाएं विकसित हो रही हैं, सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, एक दो साल में मरीजों को अच्छी सुविधाएं मिलेंगी. लेकिन सवाल यह है कि ये सब काम थोड़ी स्पीड से कर लें ताकि मरीजों को परेशानी ना हो.



हमें खबर मिली है कि अस्पताल में भ्रष्टाचार और घोटालों की वजह से सुविधाएं नहीं लाई गयीं. मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में रिफर करके कमीशन खाया जाता है, भ्रष्ट डॉक्टर मरीजों को जानवर समझते हैं, अच्छे डॉक्टर मरीजों का अच्छा इलाज करते हैं लेकिन जिसको कमीशन की आदत लग गयी है उसे सिर्फ पैसा दिखता है और मरीजों को झट से अपनी सेटिंग वाले प्राइवेट अस्पताल में रिफर कर देता है. इसी तरह से हॉस्पिटल में समय से स्टाफ और डॉक्टर की भर्तियाँ नहीं की गयीं. इसी वजह से आज मरीज इतना परेशान और दुखी हैं, मोदी सरकार जल्द ही प्रशासन को टाइट करे वरना लोकसभा चुनाव में जनता अपना गुस्सा दिखाएगी.

RK हॉस्पिटल तक पहुंची मोदी की आयुष्मान योजना, डॉ कपूर बोले, जनता की सेवा करूँगा, ये वादा रहा

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फरीदाबाद: शहर की जनता और खासकर गरीबों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है, डॉ राकेश कपूर बच्चों के सबसे अच्छे डॉक्टर माने जाते हैं, देश दुनिया में उनका बहुत नाम है, अब फरीदाबाद की जनता उनके अस्पताल में मुफ्त इलाज करवा सकती है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आयुष्मान भारत योजना आरके हॉस्पिटल में लागू हो चुकी है, आज सैकड़ों लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए गए. अब RK हॉस्पिटल में पांच लाख तक का मुफ्त इलाज करवाया जा सकता है.

डॉ राकेश कपूर ने आज हमसे बातचीत में इस योजना के बारे में जानकारी दी और फरीदाबाद की जनता से कहा कि आप किसी भी हॉस्पिटल में गोल्डन कार्ड बनवाएं, हमारे हॉस्पिटल में आप इलाज करवा सकते हैं, मैं जनता की सेवा करूँगा इसका वादा करता हूँ. उन्होंने कहा कि मैं जल्द ही सोशल मीडिया के माध्यम से और कैम्प लगाकर जनता को इस योजना के बारे में जागरूक करूँगा ताकि अधिक से अधिक लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिल सके.

हॉस्पिटल में आज एक कैम्प का आयोजन किया गया जिसमे लोगों के कई तरह की बीमारियों की निःशुल्क जांच भी की गई। आर के हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेकटर डाक्टर राकेश कपूर ने बताया कि आज के कैम्प में 300 से अधिक लोगो ने भाग लिया और तमाम परिवारों के गोल्डन कार्ड भी बनाये गए। कैम्प का उद्घाटन करने के लिए आयुष्मान भारत योजना के हरियाणा के नोडल ऑफिसर डॉ रवि खुद चंडीगढ़ से आये. डॉ राकेश कपूर ने उनका जोरदार स्वागत किया.

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उन्होंने बताया कि ये योजना बहुत ही अच्छी है और शहर के जो लोग इस योजना की श्रेणी में आते हैं वो इसका लाभ उठायें और अपना गोल्डन कार्ड जल्द बनवाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि योजना के बहुत कम लाभार्थियों को ये पता है कि आरके हॉस्पिटल में भी ये योजना लागू है जिसके लिए हम जल्द शहर की विभिन्न कालोनियों में कैम्प लगा लोगों को जानकारी देंगे कि आप आरके हॉस्पिटल में इस योजना के तहत अपने परिवार का पांच लाख तक का इलाज फ्री करवा सकते हैं।

डाक्टर राकेश कपूर की बात करें तो डाक्टर कपूर शहर के सबसे पुराने बाल रोग विशेषज्ञों में से एक हैं और उनके अंदर चमत्कार ये है कि वो रोते हुए बच्चों को तुरंत हंसा देते है और बच्चों की गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज चुटकियों में कर देते हैं। उनकी हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिल रहा है और अगर शहर के लाखों लाभार्थियों को ये जानकारी मिल गई कि डाक्टर राकेश कपूर के यहाँ इस योजना के तहत पांच लाख का इलाज फ्री में होता है तो अधिक से अधिक लोगों का भला होगा और सबसे ज्यादा बच्चों को इसका लाभ मिलेगा क्यू कि वो शहर के ही नहीं देश के जाने माने बाल रोग विशेषज्ञ हैं।

मोदीजी आज करेंगे ESI हॉस्पिटल का उद्घाटन, लेकिन पहले करना था घोटालेबाजों की सर्जिकल स्ट्राइक

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फरीदाबाद: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज फरीदाबाद NIT-3 में बने ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन करेंगे लेकिन हमारा मानना है कि पहले उन्हें ESI हॉस्पिटल में मौजूद घोटालेबाज अधिकारियों और कमीशनखोर डॉक्टरों की सर्जिकल स्ट्राइक करनी चाहिए थी. इस हॉस्पिटल की ऑडिट होनी चाहिए, अगर सही तरीके से ऑडिट हो जाए तो अरबों रुपये के घोटालों का पर्दाफाश हो सकता है और कई भ्रष्ट अधिकारी जेल जा सकते हैं.

बहुत बड़ा रेफर घोटाला, लूटे जा रहे अरबों रुपये

आपको बता दें कि ESI के कुछ कमीशनखोर डॉक्टर प्राइवेट अस्पतालों से सेटिंग करके मरीजों को वहां रेफर करते हैं और बदले में मोटा कमीशन खाते हैं, कई डॉक्टर तो महीनें में कई लाख रुपये कमीशन में कमा लेते हैं, इनका ध्यान मरीजों के इलाज पर नहीं बल्कि कमीशन पर ही रहता है, इन लोगों का ध्यान सिर्फ इसपर रहता है कि कौन से मरीज को किस हॉस्पिटल में भेजकर कितना कमीशन खाना है.

यहाँ के कमीशनखोर डॉक्टर अपने कमीशन के चक्कर में हर वर्ष करीब 100 करोड़ रुपये प्राइवेट अस्पतालों का बिल बनवाते हैं. यहाँ का रेफरल बजट भारत के सभी ESI अस्पतालों से अधिक है. अगर सही तरीके से ऑडिट हो जाए तो पूरे काण्ड का पर्दाफाश हो जाएगा.

इंटरव्यू और भर्ती घोटाला

इसके अलावा यहाँ पर इंटरव्यू घोटाला और भर्ती घोटाला हो रहा है, एक ही पोस्ट की बात बार भर्तियाँ निकाली जाती हैं, बार बार विज्ञापन, बार बार इंटरव्यू और बार बार इंटरव्यू लेने वाले डॉक्टरों की कमाई, इंटरव्यू पैनल में शामिल डॉक्टरों को हर बार TA/DA और अन्य खर्चे मिलते हैं लेकिन पोस्ट नहीं भरी जाती, कुछ दिनों में फिर से विज्ञापन दे दिया जाता है और फिर से वही खेल होता है, इस खेल के चक्कर में भ्रष्ट अधिकारी करोड़ों रुपये लूट रहे हैं. इसकी सही से जांच होनी चाहिए.

बिल्डिंग का नहीं है फायर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट

हॉस्पिटल की बिल्डिंग में अभी भी कुछ कमियां हैं लेकिन इसके बारे में शायद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जानकारी नहीं होगी. बिल्डिंग का फायर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट नहीं मिला है, अगर भविष्य में कोई दुर्घटना हो गयी या आग लग गयी तो इसका जिम्मेदार प्रधानमंत्री मोदी को ही बताया जाएगा क्योंकि उद्घाटन उनके ही हाथों से हो रहा है, इतनी बड़ी ईमारत का बिना फायर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लिए उद्घाटन नहीं होना चाहिए था लेकिन मोदी आज यह काम करेंगे.

फर्जी एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट पर भर्ती

कर्मचारियों की भर्ती के समय उनका अनुभव देखा जाता है लेकिन कई लोग फ़र्जी  एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट बनाकर नौकरी ले रहे हैं. ख़ास इन्टरनल सूत्रों से हमें ये जानकारी मिली है.

आज होगा हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन

12 फरवरी 2019 मंगलवार को प्रात: 11:30 बजे कुरूक्षेत्र से रिमोर्ट कंट्रोल के माध्यम से स्थानीय एनआईटी-3 (फरीदाबाद) में बादशाह खान नागरिक अस्पताल के पीछे ई.एस.आई. मैडिकल कॉलेज का उद्घाटन करेंगे.

प्रधानमंत्री मोदी फरीदाबाद नहीं आयेंगे लेकिन ESI मेडिकल कॉलेज कैम्पस में बड़े प्रोग्राम का आयोजन किया गया है, इस मौके पर इसमें केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर व फरीदाबाद जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों के विधायक मौजूद रहेंगे। 

ESI हॉस्पिटल की बिल्डिंग का बिना फायर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लिए मोदीजी से करवाया जाएगा उद्घाटन

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फरीदाबाद: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज फरीदाबाद NIT-3 में बने ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन करेंगे, मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल की बिल्डिंग में पिछले तीन वर्षों से सिफ्टिंग का काम शुरू हो गया था लेकिन अभी तक इसका औपचारिक उद्घाटन नहीं हुआ था, आज प्रधानमंत्री मोदी इसका औपचारिक उद्घाटन करके इसे फरीदाबाद एवं पलवल की जनता को सौंप देंगे.

हॉस्पिटल की बिल्डिंग में अभी भी कुछ कमियां हैं लेकिन इसके बारे में शायद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जानकारी नहीं होगी. बिल्डिंग का फायर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट नहीं मिला है, अगर भविष्य में कोई दुर्घटना हो गयी या आग लग गयी तो इसका जिम्मेदार प्रधानमंत्री मोदी को ही बताया जाएगा क्योंकि उद्घाटन उनके ही हाथों से हो रहा है, इतनी बड़ी ईमारत का बिना फायर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लिए उद्घाटन नहीं होना चाहिए था लेकिन मोदी आज यह काम करेंगे.

12 फरवरी 2019 मंगलवार को प्रात: 11:30 बजे कुरूक्षेत्र से रिमोर्ट कंट्रोल के माध्यम से स्थानीय एनआईटी-3 (फरीदाबाद) में बादशाह खान नागरिक अस्पताल के पीछे ई.एस.आई. मैडिकल कॉलेज का उद्घाटन करेंगे.

प्रधानमंत्री मोदी फरीदाबाद नहीं आयेंगे लेकिन ESI मेडिकल कॉलेज कैम्पस में बड़े प्रोग्राम का आयोजन किया गया है, इस मौके पर इसमें केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर व फरीदाबाद जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों के विधायक मौजूद रहेंगे। 

आयुष्मान योजना में सबसे अधिक मरीजों का इलाज करने वाले अर्श हॉस्पिटल का मोदी की टीम ने किया दौरा

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फरीदाबाद: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आयुष्मान भारत योजना पूरे विश्व को आकर्षित कर रही है, हाल ही में दुनिया के सबसे अमीर आदमी बिल गेट्स ने इस योजना की सफलता पर आश्चर्य व्यक्त किया था, अब तक इस योजना के अंतर्गत करीब 8 लाख मरीजों का निशुल्क इलाज हो चुका है.

अगर फरीदाबाद की बात करें तो इस योजना के पैनल में 12 हॉस्पिटल हैं. सेक्टर-78 स्थित अर्श हॉस्पिटल ने इस योजना के तहत अब तक सबसे अधिक मरीजों का इलाज किया है. दूर दूर तक यह बात पहुँच रही है, इसी हप्ते जर्मनी की एक टीम ने अर्श हॉस्पिटल का दौरा करने योजना के बारे में जानकारी हासिल की थी.

हरियाणा सरकार तक भी अर्श हॉस्पिटल की चर्चा पहुँच गयी है. कल पंचकूला से एक टीम ने हॉस्पिटल का दौरा किया जिसमें डिप्टी CEO आयुष्मान भारत योजना (हरियाणा) डॉ रवि विमल, डॉ निशांत, डॉ विशाल सक्सेना शामिल थे. हॉस्पिटल के अच्छे प्रदर्शन और मरीजों को मिल रही सुविधाओं पर टीम ने संतुष्टि जाहिर की.

बता दें कि अर्श हॉस्पिटल ने इस योजना के तहत अब तक लगभग 50 मरीजों का इलाज किया है. कुछ दिनों पहले हमारी टीम ने भी अर्श हॉस्पिटल का दौरा करके एक डाक्यूमेंट्री बनायी थी. यह वीडियो देश विदेश में भी देखा जा रहा है, हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार के अफसर भी यह वीडियो देखकर अर्श हॉस्पिटल का दौरा करने आ रहे हैं, इसके अलावा यह वीडियो जनता को इस योजना के बारे में बहुत सारी जानकारी भी प्रदान कर रहा है. आप भी देखें ये वीडियो.

मोदी की आयुष्मान योजना, अर्श हॉस्पिटल में खूब हो रहा मरीजों का इलाज, देखने आई जर्मनी की टीम

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फरीदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यम और गरीब तबके को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए आयुष्मान भारत योजना शुरू की है, पूरे देश में यह योजना लागू हो चुकी है. फरीदाबाद में करीब 12 प्राइवेट अस्पतालों को इस पैनल में शामिल किया गया है. ग्रेटर फरीदाबाद स्थित हर्ष हॉस्पिटल में अब तक इस योजना के अंतर्गत सबसे अधिक मरीजों का इलाज किया गया है.

अर्श हॉस्पिटल में इस योजना के बारे में जानकारी हासिल करने और डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए जर्मनी की पांच सदस्यों की टीम ने दौरा किया और वहां पर भर्ती मरीजों से बातचीत करके उनका फीडबैक लिया.

टीम ने मोदी की आयुष्मान योजना के बारे में पॉजिटिव और नेगेटिव बातों का विश्लेषण किया और इस योजना की सफलता पर आश्चर्य व्यक्त किया.

अर्श हॉस्पिटल के डॉ लोकेश कुमार गर्ग ने बताया उनके हॉस्पिटल ने अब तक इस योजना के अंतर्गत सबसे अधिक मरीजों का इलाज किया गया है, दूर-दूर तक यह बात पहुंच रही है इसीलिए जर्मनी की टीम ने अस्पताल का दौरा करके इस योजना के बारे में जानकारी हासिल की, जर्मनी से आई टीम  मेंं 2 महिला और 3 पुरुष शामिल थे.

ESI अस्पतालों में होगा सबका इलाज, मंत्री विपुल गोयल बोले, गरीबों के लिए संकल्पित है मोदी सरकार

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फरीदाबाद: कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के गरीबों और खासकर फरीदाबाद वालों को बहुत बड़ी खुशखबरी सुनाई. मोदी सरकार ने ESI अस्पतालों को सबके लिए खोल दिया है. फरीदाबाद वालों को सबसे बड़ी खुशखबरी है क्योंकि फरीदाबाद में देश का सबसे बड़ा ESI अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बना है हालाँकि अभी पूरा सेट-अप नहीं हो पाया है. अगर पूरा सेट-अप हो गया तो यह गरीबों के लिए बहुत बड़ा गिफ्ट होगा.

मोदी सरकार के इस ऐलान से फरीदाबाद के विधायक और हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने ख़ुशी जताई. उन्होंने ट्विटर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा - गरीबों को सस्ता और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने को संकल्पित है मोदी सरकार, अब कर्मचारी राज्य बीमा निगम देगा गैर-बीमाकृत लोगों को भी मेडिकल सुविधा.



फरीदाबाद की गरीब जनता के लिए बड़ी खुशखबरी है, पहले हमारे शहर में बने ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज में गैर बीमा-धारक इलाज नहीं करवा सकते थे लेकिन अब ESI अस्पतालों में गैर-बीमा धारक भी इलाज करवा सकते हैं.

ईलाज के लिए कुछ शर्तें
  1. गैर बीमा-धारकों को OPD में ईलाज के लिए 10 रुपये की फीस देनी पड़ेगी
  2. भर्ती होने पर CGHC पैकेज का 25 फ़ीसदी फीस देनी होगी
  3. दवाइयाँ वास्तविक कीमत पर उपलब्ध करवाई जाएगी

मोदी सरकार की स्कीम के तहत ESI में ईलाज के लिए मामूली फीस देनी पड़ेगी और उचित रेट पर दवाइयाँ भी उपलब्ध करवाई जाएंगी. ESI अस्पतालों में स्टाफ भी बढाया जाएगा - सामाजिक सुरक्षा अधिकारी, बीमा चिकित्सा अधिकारी, इंजीनियर, अध्यापक, पैरामेडिकल और नर्सिंग कैडर, यूडीसी और स्टेनोग्राफर जैसे 5200 पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ESI अस्पतालों में सिर्फ प्राइवेट संस्थाओं में काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवार के इलाज की मंजूरी है. अन्य लोग ESI अस्पतालों में इलाज नहीं करवा सकते थे लेकिन मोदी सरकार के फैसले के बाद अब अन्य लोग भी ESI अस्पतालों में इलाज करवा सकते हैं.

पढ़ें, क्यों हुई ESI हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज की सड़क की खुदाई, क्या खया लिए गए करोड़ों रुपये

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फरीदाबाद: NIT-3 में अरबों रुपये खर्च करके ESI हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज बनवाया गया है, यह अस्पताल पूर्व कांग्रेस सरकार में बनवाया गया था लेकिन अब चर्चा हो रही है कि अस्पताल बनाने में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है, घटिया सामग्री से बिल्डिंग बनायी गयी है.

हाल ही में रोड की खुदाई की गयी तो अन्दर से घटिया सामग्री मिली, सीमेंट की मात्रा काफी कम दिखी जिसकी वजह से मसाला हाथ में लेते ही टूट रहा है, देखिये ये वीडियो -



अब सवाल यह उठ रहा है कि कहीं बिल्डिंग बनाने में घोटाला तो नहीं किया गया है, कहीं घटिया सामाग्री लगाकर करोड़ों रुपये की लूट तो नहीं हुई है, हाल ही में हमने पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान बनायी गयी कई इमारतों का सर्वे किया था जिसमें घटिया सामाग्री दिखी थी, कहीं यहाँ भी कोई काण्ड तो नहीं किया गया है, देखिये ये वीडियो.

3 महीनें से बंद है डब्बा अस्पताल ESI का ICU, प्राइवेट अस्पतालों की करवाई जा रही करोड़ों की कमाई

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फरीदाबाद: अरबों रुपये में फरीदाबाद का ESI मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनवाया गया है, बिल्डिंग की उंचाई देखकर दिल्ली का AIIMS भी शर्माता है लेकिन सुविधाओं के मामले में यह अस्पताल डब्बा है. 

अस्पताल का ICU तीन महीनें से बंद है और इसी वजह से मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में रिफर करके उनकी करोड़ों रुपये की कमाई करवाई जा रही है, अगर यहाँ का ICU खुला रहता और डॉक्टर होते तो हर माह सरकार के करोड़ों रुपये प्राइवेट अस्पतालों में जाने से बचते लेकिन दुर्भाग्य से सरकार ऑंखें बंद करके बैठी है, सरकार की नाकामी की वजह से उसका खुद का करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है साथ ही ESI कार्डधारक मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों के धक्के खाने पड़ रहे हैं.

वैसे तो यह अस्पताल पूरा डब्बा है, रात में पहले एक डॉक्टर रहता था लेकिन पिछले दिनों जब हमने खबर दिखाई तो तीन चार डॉक्टरों को रखा गया है लेकिन इसका कोई फायदा नहीं है क्योंकि रात में जब कोई सीरियस मरीज आता है तो ICU बंद होने की वजह से उसे प्राइवेट अस्पतालों में रिफर कर दिया जाता है, कई बार ICU बंद होने से सीरियस मरीजों की ESI अस्पताल में ही मौत हो जाती है, पिछले दिनों दो तीन मौतों की हमें खबर भी दिखाई थी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकारी तंत्र इतना लचर है कि यहाँ पर अपना खुद का ICU नहीं शुरू कर पाया, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप नीति से यहाँ अगस्त 2014 में ICU शुरू किया गया था, निजी संस्थान ने शुरुआती तौर पर यहाँ 30 बेड का ICU शुरू किया था लेकिन बाद में 15 बेड का कर दिया.

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अब ICU बंद होने से यहाँ के कर्मचारी भी परेशान हैं क्योंकि तीन महीनें से उन्हें वेतन नहीं मिला है. इसके अलावा ESI के मरीज भी परेशान हैं क्योंकि उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में रिफर कर दिया जाता है और उन्हें धक्के खाने पड़ते हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस अस्पताल को फरीदाबाद और पलवल के करीब 6 लाख ESI कार्डधारकों को अच्छे इलाज की सुविधा देने के लिए बनवाया गया था, अस्पताल की बिल्सिंग बनवाने में 10 साल लग गए लेकिन यहाँ पर इलाज की सुविधाएं अभी तक नहीं उपलब्ध करवाई जा सकीं. करीब 90 फ़ीसदी मरीज और उनके परिजन यहाँ से दुखी होकर निकलते हैं जिसका नुकसान भाजपा को आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हो सकता है.

कई बार हमारे पास ऐसी भी सूचनाएं आती हैं कि मरीजों को जान बूझकर प्राइवेट अस्पतालों में रिफर करके करोड़ों रुपये का कमीशन खाया जाता है, प्राइवेट अस्पताल कम से कम चार पांच लाख का बिल बनाते हैं जिसमें से लाखों रुपये रिफर करने वालों और ESI अस्पताल के बड़े अधिकारियों तक पहुँचते हैं, सरकार को इसपर तुरंत ध्यान देना चाहिए वरना घोटालेबाजों के चक्कर में उनकी सरकार उखाड़कर फेंक दी जाएगी.

एडवोकेट राजेश खटाना, डॉक्टर MP सिंह ने बतौर मुख्य अथिति किया आरोग्य हॉस्पिटल का उद्घाटन

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फरीदाबाद 23 नवंबर: आज फरीदाबाद जवाहर कॉलोनी में  राजेश खटाना एडवोकेट इंचार्ज लीगल विभाग हरियाणा युवा कांग्रेस एवं महान शिक्षाविद डॉ ऍम पी सिंह ने बतोर मुख्य अथिति फीता काटकर आरोग्य हॉस्पिटल का उद्घाटन किया.

इस अवसर पर लोगों को सम्बोधित करते हुए राजेश खटाना ने कहा - आज डॉ एन कुमार ने चिक्तिसा सेवा भारती के माध्यम से आम जन को सुविधा देने के लिए जो काम किया है वह बहुत ही सराहनीय है, आज इस बदलते परिवेश में लोगो को अच्छी चिक्तिसा की बहुत जरुरत है.

डॉ सिंह ने कहा की डॉ का पेशा सेवा का काम है और आज बहुत से लोग पैसे कमाने के लिए उसका इस्तेमाल कर रहे है जो समाज के लिए घातक है. आज देश को सेवा करने वाले डॉ की जरुरत है. इस अवसर पर डॉ एन कुमार, सुशिल कटारिया, रणजीत, दुर्गेश गणमान्य लोग मोजूद रहे.

पहले हॉस्पिटल, अब स्किल यूनिवर्सिटी, 40 करोड़ के भवन को HR सरकार ने बना दिया खँडहर: LN पाराशर

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फरीदाबाद, 21 नवंबर:  फरीदाबाद के सेक्टर 55 में पूर्व कोंग्रेस सरकार के दौरान 100 बेड का हॉस्पिटल बनाया गया था. हॉस्पिटल तो बन गया लेकिन उसमें डॉक्टर नहीं नियुक्त किए गए जिसकी वजह से आलीशान इमारत का इस्तेमाल नहीं हो पाया. वर्तमान सरकार ने हॉस्पिटल को बदलकर स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी बना दिया है और वहां पर बोर्ड भी लगा दिया गया है.

आज हमने इमारत का सर्वे किया तो पता चला इमारत खंडहर बनती चली जा रही है, वहां पर ना तो कोई छात्र दिखा और ना ही उनका स्किल डेवलपमेंट करने वाले टीचर. इमारत भूत बंगला बनती जा रही है. हर तरफ गंदगी का भंडार दिखा.

इस मौके पर फरीदाबाद जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान और वरिष्ठ वकील एलएन पराशर भी मौजूद थे. इमारत की दुर्गति देखकर उन्होंने फरीदाबाद के नेताओं, अधिकारियों और हरियाणा सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार 40 करोड़ रुपए में बनी इमारत को खंडहर बना रही है. उन्होंने यह भी बताया कि बगल में ही ESI डिस्पेंसरी चल रही है इसमें किराए पर कमरा लिया गया है. सरकार हर महीने मकान मालिक को ₹30000 किराया देती है जबकि बगल में ही कई एकड़ में विशाल इमारत खंडहर बनती जा रही है वहां पर सिर्फ विश्वकर्मा स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी का बोर्ड लगा दिया गया है.

आसपास के लोगों ने बताया कि सेक्टर 55 में कोई सरकारी अस्पताल नहीं है जिसकी वजह से लोगों को परेशानी होती है. जब यहां पर हॉस्पिटल बनाया गया तो क्षेत्र की जनता बहुत खुश हुई थी लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे विश्वकर्मा स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी बना दिया, लोगों ने मांग की कि यहां पर फिर से अस्पताल बनाया जाए और जनता को इलाज की सुविधा प्रदान की जाए.

देखें वीडियो.

बीके हॉस्पिटल में आयरन, कैल्सियम दवाओं का टोटा, खाली हाथ भेज दी जाती हैं गर्भवती महिलाएं

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फरीदाबाद, 1 नवम्बर: शहर के सरकारी BK अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद जरूरी आयरन, कैल्शियम और अन्य जरूरी दवालों का जबरदस्त टोटा है, यह समस्या एक दो दिन की नहीं बल्कि कई वर्षों से है, अब तो सरकारी अफसर भी कह रहे हैं कि ये दवाएं गुरुग्राम वेयरहाउस से ही नहीं आ रही हैं, यह भी कहा जा रहा है कि ये दवाएं हरियाणा के कई जिला अस्पतालों में नहीं मिल रही हैं.

अब सवाल यह उठता है कि ये दवाएं सरकार उपलब्ध नहीं करवा पा रही है या कोई बहुत बड़ा घोटाला हुआ है. पहले ऐसी ख़बरें आती थी कि मरीजों को आयरन और कैल्सियम की दवा देने के बजाय उसे मेडिकल स्टोरों को बेच लिया जाता है, अब खबर आ रही है कि ये दवाएं पीछे से ही नहीं आ रही हैं.

सरकार को तुरंत इसपर एक्शन लेना चाहिए. गर्भवती महिलाओं के लिए कैल्सियम और आयरन की दवाएं बहुत जरूरी हैं, कैल्सियम गर्भवती महिलाओं और उनके पेट में पल रहे बच्चे की हड्डियों को मजबूत करता है जबकि आयरन की टेबलेट हीमोग्लोबिन को बढाती है.

उल्टी-दस्त का नहीं हो पाया इलाज, डब्बा अस्पताल ESI के डॉक्टरों की लापरवाही से बेमौत मरा बच्चा

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फरीदाबाद, 16 अक्टूबर: फरीदाबाद के डब्बा अस्पताल ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज में आज डॉक्टरों की लापरवाही से एक बच्चे की मौत हो गयी. संजय कॉलोनी में रहने वाले गरीब परिजनों ने अपने 11 महीनें के बच्चे निखिल को सिर्फ उल्टी-दस्त की शिकायत पर ESI में दिखाया था लेकिन यहाँ के डॉक्टर उल्टी-दस्त भी सही नहीं कर सके और बच्चा बेमौत मर गया.

परिजनों ने बताया कि 5 अक्टूबर को निखिल का इलाज शुरू हुआ था, पहले दस्त थी, उसके बाद उल्टी शुरू हो गयी. ESI के डॉक्टरों ने बच्चे को एडमिट नहीं किया, रोजाना दो चार घंटे लिटाकर घर वापस भेज देते थे, बच्चे को आराम नहीं हुआ, परिजनों ने किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में भेजने की गुहार की तो डॉक्टरों ने उनकी बात नहीं सुनी और उसे दवाइयाँ देनी चालू रखीं.

परिजनों ने बताया कि डब्बा अस्पताल की दवाइयों का निखिल पर कोई असर नहीं हो रहा था उसके बावजूद भी डॉक्टरों ने लापरवाही जारी रखी, जब निखिल के माँ-बाप उसे कहीं और रिफर करने की गुहार करते तो डॉक्टर उन्हें अपनी डिग्री का धौंस दिखाते थे और उन्हें डांटते थे, नर्सिंग स्टाफ भी बदतमीजी से बात करता था. गुस्से में दवाइयां देता था.

आज तवियत ज्यादा खराब देखकर निखिल के माँ-बाप ESI से BK हॉस्पिटल ले गए लेकिन तब तक निखिल की मौत हो चुकी थी. परिजन बहुत दुखी हैं. डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को खूब बद्दुवाएं दे रहे हैं क्योंकि उन्होंने ना तो निखिल का सही से इलाज किया और ना ही उनसे तमीज से बात की, नर्स की बदतमीजी मरीज के परिजनों को याद थी इसलिए उसे भी खूब बद्दुवा दी गयी.

वहां पर मौजूद कई मरीजों ने बताया कि ESI में उन्हें बहुत परेशान किया जाता है, यहाँ से वहां दौडाया जाता है, इलाज के नाम पर सिर्फ थैली भर भर कर दवाएं दी जाती हैं जिसे खाकर वे पहले से भी अधिक बीमार हो जाते हैं और प्राइवेट हॉस्पिटल में अपने खर्च से इलाज कराना पड़ता है.

बता दें कि इतना बड़ा हॉस्पिटल होने के बाद भी यहाँ पर कोई सुविधा नहीं है. रात में इमरजेंसी में सिर्फ एक डॉक्टर रहता है और वो भी सिर्फ सर्दी, गर्मी और बुखार की दवाएं देता है, अन्य मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेज दिया जाता है लेकिन निखिल को कहीं रिफर भी नहीं किया गया. अगर समय रहते निखिल का किसी अच्छे अस्पताल में रिफर कर दिया जाता तो उसकी मौत नहीं होती लेकिन ESI हॉस्पिटल में मरीजों को हो रही परेशानी पर शासन, प्रशासन और सरकारों ने ऑंखें बंद कर रखी हैं.

ESI मरीज परेशान, आधी रात पार्क हॉस्पिटल में जमकर बवाल, चंदर भाटिया बोले - तुम्हें पड़ेंगे कीड़े

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फरीदाबाद, 13 अक्टूबर: कल आधी रात पार्क हॉस्पिटल में जमकर हंगामा हुआ है, ESI के कुछ गरीब मरीजों को परेशान देखकर आधी रात पूर्व विधायक चंदर भाटिया पार्क हॉस्पिटल पहुंचे और अस्पताल वालों को जमकर फटकार लगाई.

चंदर भाटिया ने कहा कि जब तुम लोग मरीजों को ठीक नहीं करते तो एडमिट क्यों कर लेते हो, तुम लोगों को कीड़े पड़ेंगे और गरीबों की बद्दुआ लगेगी.

इस अवसर पर एक गरीब की परेशानी सुनकर चंदर भाटिया भी भावुक हो गए और अस्पताल के एक डॉक्टर को डांट लगा दी.

उन्होंने कहा कि ESI के गरीब मरीजों को लूटा जा रहा है, इंश्योरेंस के चक्कर में ESI हॉस्पिटल वाले गरीब मरीजों को पार्क हॉस्पिटल में रिफर कर देते हैं लेकिन यहाँ पर उन्हें अच्छा इलाज नहीं मिलता. देखिये VIDEO.



बता दें कि फरीदाबाद में ESI बहुत बड़ा हॉस्पिटल बनाया गया है, बड़ी बड़ी इमारतें हैं, हॉस्पिटल की उंचाई देखकर दिल्ली का एम्स भी शर्मा जाता है लेकिन सुविधाओं के नाम पर यह अस्पताल सिर्फ डब्बा है इसलिए रात में अधिकतर मरीजों को पार्क हॉस्पिटल रिफर कर दिया जाता है लेकिन वहां पर मरीज परेशान होते हैं. 

डब्बा अस्पताल ESI ने किया था बच्चे को सफदरजंग रेफर, 6 दिन जिंदगी के लिए तडपा, फिर हार गया

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फरीदाबाद, 10 अक्टूबर: इसी महीने दो अक्टूबर को एक 8 दिन के बच्चे को गंभीर हालत में ESI हॉस्पिटल ले जाया गया था लेकिन ESI में इस वक्त गंभीर मरीजों के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है, रात में ड्यूटी पर एक काम चलाऊ डॉक्टर बिठा दिया जाता है जो गंभीर मरीजों को देखते ही सीधा प्राइवेट हॉस्पिटल रिफर करता है.

इस बच्चे को भी पार्क हॉस्पिटल रिफर कर दिया गया लेकिन जब बच्चे के परिवार वाले बच्चे को पार्क हॉस्पिटल में लेकर गए तो पार्क हॉस्पिटल वालों ने यह कहते हुए बच्चे को एडमिट करने से इनकार कर दिया कि उनके पास बच्चों के विशेषज्ञ सर्जन नहीं हैं इसलिए वह बच्चे को एडमिट नहीं कर सकते.

इसके बाद बच्चे को वापस ESI हॉस्पिटल लाया गया लेकिन ESI के डॉक्टर ने बच्चे की गंभीर हालत देखते हुए भी उसे एशियन या सर्वोदय जो इनके पैनल में हैं, में भेजने के बजाय दिल्ली सफदरजंग रेफर कर दिया जिसकी वजह से बच्चे की हालत और नाजुक हो गयी.

सफदरजंग के डॉक्टरों ने बच्चे को बचाने की कोशश की, उसके ICU में रखा गया लेकिन कई दिनों तक उसकी हालत सही नहीं हुई, उसके बाद उसे वेंटीलेटर पर शिफ्ट किया गया लेकिन 6 दिन तक जिंदगी के लिए जंग लड़ने के बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया.

यहाँ पर सवाल यह है कि इतना बड़ा हॉस्पिटल होने के बाद भी कर्मचारियों को सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं, यहाँ बड़ी बड़ी इमारतें हैं जिन्हें बनाने में अरबों रुपये खर्च हुए हैं, ये पैसे गरीब मजदूरों की सैलरी से काटे जाते हैं ताकि गरीब मजदूरों को अच्छा इलाज मिल सके.

लेकिन फरीदाबाद का ईएसआई हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नाम पर सिर्फ डब्बा है, अगर यकीन ना आये तो किसी दिन रात में जाकर देख लीजिये, एक या दो डॉक्टर रहते हैं और उन्हें सिर्फ सर्दी बुखार ठीक करना आता है.

ESI में इलाज कराने वाले कर्मचारी बताते हैं कि ESI के अस्पताल में उनका इलाज नहीं होता सिर्फ दवाएं दी जाती हैं जिसे खाकर वह पहले से भी ज्यादा बीमार हो जाते हैं, जैसे ही मरीज ESI अस्पताल या डिस्पेंसरी में जाता है, बिना उसकी जांच किये हप्ते दस दिन की दवाई दे दी जाती है, उल्टी-सीधी एंटीबायोटिक्स और दवाएं खा खाकर लोग और बीमार हो जाते हैं और जब बाहर के डॉक्टर के पास जाते हैं और शारीरिक टेस्ट करवाते हैं तब उनकी बीमारी का पता चलता है, उनका पैसा भी खर्च होता है और समय भी. ऐसे में सवाल यह उठता है कि सरकार गरीबों के पैसे क्यों काट रही है जब इलाज की सुविधा नहीं दे पा रही है, आखिर इतनी बड़ी बड़ी इमारतों का क्या फायदा.