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मोदीजी आज करेंगे ESI हॉस्पिटल का उद्घाटन, लेकिन पहले करना था घोटालेबाजों की सर्जिकल स्ट्राइक

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फरीदाबाद: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज फरीदाबाद NIT-3 में बने ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन करेंगे लेकिन हमारा मानना है कि पहले उन्हें ESI हॉस्पिटल में मौजूद घोटालेबाज अधिकारियों और कमीशनखोर डॉक्टरों की सर्जिकल स्ट्राइक करनी चाहिए थी. इस हॉस्पिटल की ऑडिट होनी चाहिए, अगर सही तरीके से ऑडिट हो जाए तो अरबों रुपये के घोटालों का पर्दाफाश हो सकता है और कई भ्रष्ट अधिकारी जेल जा सकते हैं.

बहुत बड़ा रेफर घोटाला, लूटे जा रहे अरबों रुपये

आपको बता दें कि ESI के कुछ कमीशनखोर डॉक्टर प्राइवेट अस्पतालों से सेटिंग करके मरीजों को वहां रेफर करते हैं और बदले में मोटा कमीशन खाते हैं, कई डॉक्टर तो महीनें में कई लाख रुपये कमीशन में कमा लेते हैं, इनका ध्यान मरीजों के इलाज पर नहीं बल्कि कमीशन पर ही रहता है, इन लोगों का ध्यान सिर्फ इसपर रहता है कि कौन से मरीज को किस हॉस्पिटल में भेजकर कितना कमीशन खाना है.

यहाँ के कमीशनखोर डॉक्टर अपने कमीशन के चक्कर में हर वर्ष करीब 100 करोड़ रुपये प्राइवेट अस्पतालों का बिल बनवाते हैं. यहाँ का रेफरल बजट भारत के सभी ESI अस्पतालों से अधिक है. अगर सही तरीके से ऑडिट हो जाए तो पूरे काण्ड का पर्दाफाश हो जाएगा.

इंटरव्यू और भर्ती घोटाला

इसके अलावा यहाँ पर इंटरव्यू घोटाला और भर्ती घोटाला हो रहा है, एक ही पोस्ट की बात बार भर्तियाँ निकाली जाती हैं, बार बार विज्ञापन, बार बार इंटरव्यू और बार बार इंटरव्यू लेने वाले डॉक्टरों की कमाई, इंटरव्यू पैनल में शामिल डॉक्टरों को हर बार TA/DA और अन्य खर्चे मिलते हैं लेकिन पोस्ट नहीं भरी जाती, कुछ दिनों में फिर से विज्ञापन दे दिया जाता है और फिर से वही खेल होता है, इस खेल के चक्कर में भ्रष्ट अधिकारी करोड़ों रुपये लूट रहे हैं. इसकी सही से जांच होनी चाहिए.

बिल्डिंग का नहीं है फायर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट

हॉस्पिटल की बिल्डिंग में अभी भी कुछ कमियां हैं लेकिन इसके बारे में शायद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जानकारी नहीं होगी. बिल्डिंग का फायर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट नहीं मिला है, अगर भविष्य में कोई दुर्घटना हो गयी या आग लग गयी तो इसका जिम्मेदार प्रधानमंत्री मोदी को ही बताया जाएगा क्योंकि उद्घाटन उनके ही हाथों से हो रहा है, इतनी बड़ी ईमारत का बिना फायर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लिए उद्घाटन नहीं होना चाहिए था लेकिन मोदी आज यह काम करेंगे.

फर्जी एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट पर भर्ती

कर्मचारियों की भर्ती के समय उनका अनुभव देखा जाता है लेकिन कई लोग फ़र्जी  एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट बनाकर नौकरी ले रहे हैं. ख़ास इन्टरनल सूत्रों से हमें ये जानकारी मिली है.

आज होगा हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन

12 फरवरी 2019 मंगलवार को प्रात: 11:30 बजे कुरूक्षेत्र से रिमोर्ट कंट्रोल के माध्यम से स्थानीय एनआईटी-3 (फरीदाबाद) में बादशाह खान नागरिक अस्पताल के पीछे ई.एस.आई. मैडिकल कॉलेज का उद्घाटन करेंगे.

प्रधानमंत्री मोदी फरीदाबाद नहीं आयेंगे लेकिन ESI मेडिकल कॉलेज कैम्पस में बड़े प्रोग्राम का आयोजन किया गया है, इस मौके पर इसमें केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर व फरीदाबाद जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों के विधायक मौजूद रहेंगे। 

ESI हॉस्पिटल की बिल्डिंग का बिना फायर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लिए मोदीजी से करवाया जाएगा उद्घाटन

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फरीदाबाद: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज फरीदाबाद NIT-3 में बने ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन करेंगे, मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल की बिल्डिंग में पिछले तीन वर्षों से सिफ्टिंग का काम शुरू हो गया था लेकिन अभी तक इसका औपचारिक उद्घाटन नहीं हुआ था, आज प्रधानमंत्री मोदी इसका औपचारिक उद्घाटन करके इसे फरीदाबाद एवं पलवल की जनता को सौंप देंगे.

हॉस्पिटल की बिल्डिंग में अभी भी कुछ कमियां हैं लेकिन इसके बारे में शायद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जानकारी नहीं होगी. बिल्डिंग का फायर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट नहीं मिला है, अगर भविष्य में कोई दुर्घटना हो गयी या आग लग गयी तो इसका जिम्मेदार प्रधानमंत्री मोदी को ही बताया जाएगा क्योंकि उद्घाटन उनके ही हाथों से हो रहा है, इतनी बड़ी ईमारत का बिना फायर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लिए उद्घाटन नहीं होना चाहिए था लेकिन मोदी आज यह काम करेंगे.

12 फरवरी 2019 मंगलवार को प्रात: 11:30 बजे कुरूक्षेत्र से रिमोर्ट कंट्रोल के माध्यम से स्थानीय एनआईटी-3 (फरीदाबाद) में बादशाह खान नागरिक अस्पताल के पीछे ई.एस.आई. मैडिकल कॉलेज का उद्घाटन करेंगे.

प्रधानमंत्री मोदी फरीदाबाद नहीं आयेंगे लेकिन ESI मेडिकल कॉलेज कैम्पस में बड़े प्रोग्राम का आयोजन किया गया है, इस मौके पर इसमें केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर व फरीदाबाद जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों के विधायक मौजूद रहेंगे। 

आयुष्मान योजना में सबसे अधिक मरीजों का इलाज करने वाले अर्श हॉस्पिटल का मोदी की टीम ने किया दौरा

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फरीदाबाद: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आयुष्मान भारत योजना पूरे विश्व को आकर्षित कर रही है, हाल ही में दुनिया के सबसे अमीर आदमी बिल गेट्स ने इस योजना की सफलता पर आश्चर्य व्यक्त किया था, अब तक इस योजना के अंतर्गत करीब 8 लाख मरीजों का निशुल्क इलाज हो चुका है.

अगर फरीदाबाद की बात करें तो इस योजना के पैनल में 12 हॉस्पिटल हैं. सेक्टर-78 स्थित अर्श हॉस्पिटल ने इस योजना के तहत अब तक सबसे अधिक मरीजों का इलाज किया है. दूर दूर तक यह बात पहुँच रही है, इसी हप्ते जर्मनी की एक टीम ने अर्श हॉस्पिटल का दौरा करने योजना के बारे में जानकारी हासिल की थी.

हरियाणा सरकार तक भी अर्श हॉस्पिटल की चर्चा पहुँच गयी है. कल पंचकूला से एक टीम ने हॉस्पिटल का दौरा किया जिसमें डिप्टी CEO आयुष्मान भारत योजना (हरियाणा) डॉ रवि विमल, डॉ निशांत, डॉ विशाल सक्सेना शामिल थे. हॉस्पिटल के अच्छे प्रदर्शन और मरीजों को मिल रही सुविधाओं पर टीम ने संतुष्टि जाहिर की.

बता दें कि अर्श हॉस्पिटल ने इस योजना के तहत अब तक लगभग 50 मरीजों का इलाज किया है. कुछ दिनों पहले हमारी टीम ने भी अर्श हॉस्पिटल का दौरा करके एक डाक्यूमेंट्री बनायी थी. यह वीडियो देश विदेश में भी देखा जा रहा है, हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार के अफसर भी यह वीडियो देखकर अर्श हॉस्पिटल का दौरा करने आ रहे हैं, इसके अलावा यह वीडियो जनता को इस योजना के बारे में बहुत सारी जानकारी भी प्रदान कर रहा है. आप भी देखें ये वीडियो.

मोदी की आयुष्मान योजना, अर्श हॉस्पिटल में खूब हो रहा मरीजों का इलाज, देखने आई जर्मनी की टीम

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फरीदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यम और गरीब तबके को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए आयुष्मान भारत योजना शुरू की है, पूरे देश में यह योजना लागू हो चुकी है. फरीदाबाद में करीब 12 प्राइवेट अस्पतालों को इस पैनल में शामिल किया गया है. ग्रेटर फरीदाबाद स्थित हर्ष हॉस्पिटल में अब तक इस योजना के अंतर्गत सबसे अधिक मरीजों का इलाज किया गया है.

अर्श हॉस्पिटल में इस योजना के बारे में जानकारी हासिल करने और डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए जर्मनी की पांच सदस्यों की टीम ने दौरा किया और वहां पर भर्ती मरीजों से बातचीत करके उनका फीडबैक लिया.

टीम ने मोदी की आयुष्मान योजना के बारे में पॉजिटिव और नेगेटिव बातों का विश्लेषण किया और इस योजना की सफलता पर आश्चर्य व्यक्त किया.

अर्श हॉस्पिटल के डॉ लोकेश कुमार गर्ग ने बताया उनके हॉस्पिटल ने अब तक इस योजना के अंतर्गत सबसे अधिक मरीजों का इलाज किया गया है, दूर-दूर तक यह बात पहुंच रही है इसीलिए जर्मनी की टीम ने अस्पताल का दौरा करके इस योजना के बारे में जानकारी हासिल की, जर्मनी से आई टीम  मेंं 2 महिला और 3 पुरुष शामिल थे.

ESI अस्पतालों में होगा सबका इलाज, मंत्री विपुल गोयल बोले, गरीबों के लिए संकल्पित है मोदी सरकार

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फरीदाबाद: कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के गरीबों और खासकर फरीदाबाद वालों को बहुत बड़ी खुशखबरी सुनाई. मोदी सरकार ने ESI अस्पतालों को सबके लिए खोल दिया है. फरीदाबाद वालों को सबसे बड़ी खुशखबरी है क्योंकि फरीदाबाद में देश का सबसे बड़ा ESI अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बना है हालाँकि अभी पूरा सेट-अप नहीं हो पाया है. अगर पूरा सेट-अप हो गया तो यह गरीबों के लिए बहुत बड़ा गिफ्ट होगा.

मोदी सरकार के इस ऐलान से फरीदाबाद के विधायक और हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने ख़ुशी जताई. उन्होंने ट्विटर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा - गरीबों को सस्ता और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने को संकल्पित है मोदी सरकार, अब कर्मचारी राज्य बीमा निगम देगा गैर-बीमाकृत लोगों को भी मेडिकल सुविधा.



फरीदाबाद की गरीब जनता के लिए बड़ी खुशखबरी है, पहले हमारे शहर में बने ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज में गैर बीमा-धारक इलाज नहीं करवा सकते थे लेकिन अब ESI अस्पतालों में गैर-बीमा धारक भी इलाज करवा सकते हैं.

ईलाज के लिए कुछ शर्तें
  1. गैर बीमा-धारकों को OPD में ईलाज के लिए 10 रुपये की फीस देनी पड़ेगी
  2. भर्ती होने पर CGHC पैकेज का 25 फ़ीसदी फीस देनी होगी
  3. दवाइयाँ वास्तविक कीमत पर उपलब्ध करवाई जाएगी

मोदी सरकार की स्कीम के तहत ESI में ईलाज के लिए मामूली फीस देनी पड़ेगी और उचित रेट पर दवाइयाँ भी उपलब्ध करवाई जाएंगी. ESI अस्पतालों में स्टाफ भी बढाया जाएगा - सामाजिक सुरक्षा अधिकारी, बीमा चिकित्सा अधिकारी, इंजीनियर, अध्यापक, पैरामेडिकल और नर्सिंग कैडर, यूडीसी और स्टेनोग्राफर जैसे 5200 पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ESI अस्पतालों में सिर्फ प्राइवेट संस्थाओं में काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवार के इलाज की मंजूरी है. अन्य लोग ESI अस्पतालों में इलाज नहीं करवा सकते थे लेकिन मोदी सरकार के फैसले के बाद अब अन्य लोग भी ESI अस्पतालों में इलाज करवा सकते हैं.

पढ़ें, क्यों हुई ESI हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज की सड़क की खुदाई, क्या खया लिए गए करोड़ों रुपये

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फरीदाबाद: NIT-3 में अरबों रुपये खर्च करके ESI हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज बनवाया गया है, यह अस्पताल पूर्व कांग्रेस सरकार में बनवाया गया था लेकिन अब चर्चा हो रही है कि अस्पताल बनाने में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है, घटिया सामग्री से बिल्डिंग बनायी गयी है.

हाल ही में रोड की खुदाई की गयी तो अन्दर से घटिया सामग्री मिली, सीमेंट की मात्रा काफी कम दिखी जिसकी वजह से मसाला हाथ में लेते ही टूट रहा है, देखिये ये वीडियो -



अब सवाल यह उठ रहा है कि कहीं बिल्डिंग बनाने में घोटाला तो नहीं किया गया है, कहीं घटिया सामाग्री लगाकर करोड़ों रुपये की लूट तो नहीं हुई है, हाल ही में हमने पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान बनायी गयी कई इमारतों का सर्वे किया था जिसमें घटिया सामाग्री दिखी थी, कहीं यहाँ भी कोई काण्ड तो नहीं किया गया है, देखिये ये वीडियो.

3 महीनें से बंद है डब्बा अस्पताल ESI का ICU, प्राइवेट अस्पतालों की करवाई जा रही करोड़ों की कमाई

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फरीदाबाद: अरबों रुपये में फरीदाबाद का ESI मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनवाया गया है, बिल्डिंग की उंचाई देखकर दिल्ली का AIIMS भी शर्माता है लेकिन सुविधाओं के मामले में यह अस्पताल डब्बा है. 

अस्पताल का ICU तीन महीनें से बंद है और इसी वजह से मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में रिफर करके उनकी करोड़ों रुपये की कमाई करवाई जा रही है, अगर यहाँ का ICU खुला रहता और डॉक्टर होते तो हर माह सरकार के करोड़ों रुपये प्राइवेट अस्पतालों में जाने से बचते लेकिन दुर्भाग्य से सरकार ऑंखें बंद करके बैठी है, सरकार की नाकामी की वजह से उसका खुद का करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है साथ ही ESI कार्डधारक मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों के धक्के खाने पड़ रहे हैं.

वैसे तो यह अस्पताल पूरा डब्बा है, रात में पहले एक डॉक्टर रहता था लेकिन पिछले दिनों जब हमने खबर दिखाई तो तीन चार डॉक्टरों को रखा गया है लेकिन इसका कोई फायदा नहीं है क्योंकि रात में जब कोई सीरियस मरीज आता है तो ICU बंद होने की वजह से उसे प्राइवेट अस्पतालों में रिफर कर दिया जाता है, कई बार ICU बंद होने से सीरियस मरीजों की ESI अस्पताल में ही मौत हो जाती है, पिछले दिनों दो तीन मौतों की हमें खबर भी दिखाई थी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकारी तंत्र इतना लचर है कि यहाँ पर अपना खुद का ICU नहीं शुरू कर पाया, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप नीति से यहाँ अगस्त 2014 में ICU शुरू किया गया था, निजी संस्थान ने शुरुआती तौर पर यहाँ 30 बेड का ICU शुरू किया था लेकिन बाद में 15 बेड का कर दिया.

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अब ICU बंद होने से यहाँ के कर्मचारी भी परेशान हैं क्योंकि तीन महीनें से उन्हें वेतन नहीं मिला है. इसके अलावा ESI के मरीज भी परेशान हैं क्योंकि उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में रिफर कर दिया जाता है और उन्हें धक्के खाने पड़ते हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस अस्पताल को फरीदाबाद और पलवल के करीब 6 लाख ESI कार्डधारकों को अच्छे इलाज की सुविधा देने के लिए बनवाया गया था, अस्पताल की बिल्सिंग बनवाने में 10 साल लग गए लेकिन यहाँ पर इलाज की सुविधाएं अभी तक नहीं उपलब्ध करवाई जा सकीं. करीब 90 फ़ीसदी मरीज और उनके परिजन यहाँ से दुखी होकर निकलते हैं जिसका नुकसान भाजपा को आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हो सकता है.

कई बार हमारे पास ऐसी भी सूचनाएं आती हैं कि मरीजों को जान बूझकर प्राइवेट अस्पतालों में रिफर करके करोड़ों रुपये का कमीशन खाया जाता है, प्राइवेट अस्पताल कम से कम चार पांच लाख का बिल बनाते हैं जिसमें से लाखों रुपये रिफर करने वालों और ESI अस्पताल के बड़े अधिकारियों तक पहुँचते हैं, सरकार को इसपर तुरंत ध्यान देना चाहिए वरना घोटालेबाजों के चक्कर में उनकी सरकार उखाड़कर फेंक दी जाएगी.

एडवोकेट राजेश खटाना, डॉक्टर MP सिंह ने बतौर मुख्य अथिति किया आरोग्य हॉस्पिटल का उद्घाटन

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फरीदाबाद 23 नवंबर: आज फरीदाबाद जवाहर कॉलोनी में  राजेश खटाना एडवोकेट इंचार्ज लीगल विभाग हरियाणा युवा कांग्रेस एवं महान शिक्षाविद डॉ ऍम पी सिंह ने बतोर मुख्य अथिति फीता काटकर आरोग्य हॉस्पिटल का उद्घाटन किया.

इस अवसर पर लोगों को सम्बोधित करते हुए राजेश खटाना ने कहा - आज डॉ एन कुमार ने चिक्तिसा सेवा भारती के माध्यम से आम जन को सुविधा देने के लिए जो काम किया है वह बहुत ही सराहनीय है, आज इस बदलते परिवेश में लोगो को अच्छी चिक्तिसा की बहुत जरुरत है.

डॉ सिंह ने कहा की डॉ का पेशा सेवा का काम है और आज बहुत से लोग पैसे कमाने के लिए उसका इस्तेमाल कर रहे है जो समाज के लिए घातक है. आज देश को सेवा करने वाले डॉ की जरुरत है. इस अवसर पर डॉ एन कुमार, सुशिल कटारिया, रणजीत, दुर्गेश गणमान्य लोग मोजूद रहे.

पहले हॉस्पिटल, अब स्किल यूनिवर्सिटी, 40 करोड़ के भवन को HR सरकार ने बना दिया खँडहर: LN पाराशर

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फरीदाबाद, 21 नवंबर:  फरीदाबाद के सेक्टर 55 में पूर्व कोंग्रेस सरकार के दौरान 100 बेड का हॉस्पिटल बनाया गया था. हॉस्पिटल तो बन गया लेकिन उसमें डॉक्टर नहीं नियुक्त किए गए जिसकी वजह से आलीशान इमारत का इस्तेमाल नहीं हो पाया. वर्तमान सरकार ने हॉस्पिटल को बदलकर स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी बना दिया है और वहां पर बोर्ड भी लगा दिया गया है.

आज हमने इमारत का सर्वे किया तो पता चला इमारत खंडहर बनती चली जा रही है, वहां पर ना तो कोई छात्र दिखा और ना ही उनका स्किल डेवलपमेंट करने वाले टीचर. इमारत भूत बंगला बनती जा रही है. हर तरफ गंदगी का भंडार दिखा.

इस मौके पर फरीदाबाद जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान और वरिष्ठ वकील एलएन पराशर भी मौजूद थे. इमारत की दुर्गति देखकर उन्होंने फरीदाबाद के नेताओं, अधिकारियों और हरियाणा सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार 40 करोड़ रुपए में बनी इमारत को खंडहर बना रही है. उन्होंने यह भी बताया कि बगल में ही ESI डिस्पेंसरी चल रही है इसमें किराए पर कमरा लिया गया है. सरकार हर महीने मकान मालिक को ₹30000 किराया देती है जबकि बगल में ही कई एकड़ में विशाल इमारत खंडहर बनती जा रही है वहां पर सिर्फ विश्वकर्मा स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी का बोर्ड लगा दिया गया है.

आसपास के लोगों ने बताया कि सेक्टर 55 में कोई सरकारी अस्पताल नहीं है जिसकी वजह से लोगों को परेशानी होती है. जब यहां पर हॉस्पिटल बनाया गया तो क्षेत्र की जनता बहुत खुश हुई थी लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे विश्वकर्मा स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी बना दिया, लोगों ने मांग की कि यहां पर फिर से अस्पताल बनाया जाए और जनता को इलाज की सुविधा प्रदान की जाए.

देखें वीडियो.

बीके हॉस्पिटल में आयरन, कैल्सियम दवाओं का टोटा, खाली हाथ भेज दी जाती हैं गर्भवती महिलाएं

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फरीदाबाद, 1 नवम्बर: शहर के सरकारी BK अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद जरूरी आयरन, कैल्शियम और अन्य जरूरी दवालों का जबरदस्त टोटा है, यह समस्या एक दो दिन की नहीं बल्कि कई वर्षों से है, अब तो सरकारी अफसर भी कह रहे हैं कि ये दवाएं गुरुग्राम वेयरहाउस से ही नहीं आ रही हैं, यह भी कहा जा रहा है कि ये दवाएं हरियाणा के कई जिला अस्पतालों में नहीं मिल रही हैं.

अब सवाल यह उठता है कि ये दवाएं सरकार उपलब्ध नहीं करवा पा रही है या कोई बहुत बड़ा घोटाला हुआ है. पहले ऐसी ख़बरें आती थी कि मरीजों को आयरन और कैल्सियम की दवा देने के बजाय उसे मेडिकल स्टोरों को बेच लिया जाता है, अब खबर आ रही है कि ये दवाएं पीछे से ही नहीं आ रही हैं.

सरकार को तुरंत इसपर एक्शन लेना चाहिए. गर्भवती महिलाओं के लिए कैल्सियम और आयरन की दवाएं बहुत जरूरी हैं, कैल्सियम गर्भवती महिलाओं और उनके पेट में पल रहे बच्चे की हड्डियों को मजबूत करता है जबकि आयरन की टेबलेट हीमोग्लोबिन को बढाती है.

उल्टी-दस्त का नहीं हो पाया इलाज, डब्बा अस्पताल ESI के डॉक्टरों की लापरवाही से बेमौत मरा बच्चा

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फरीदाबाद, 16 अक्टूबर: फरीदाबाद के डब्बा अस्पताल ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज में आज डॉक्टरों की लापरवाही से एक बच्चे की मौत हो गयी. संजय कॉलोनी में रहने वाले गरीब परिजनों ने अपने 11 महीनें के बच्चे निखिल को सिर्फ उल्टी-दस्त की शिकायत पर ESI में दिखाया था लेकिन यहाँ के डॉक्टर उल्टी-दस्त भी सही नहीं कर सके और बच्चा बेमौत मर गया.

परिजनों ने बताया कि 5 अक्टूबर को निखिल का इलाज शुरू हुआ था, पहले दस्त थी, उसके बाद उल्टी शुरू हो गयी. ESI के डॉक्टरों ने बच्चे को एडमिट नहीं किया, रोजाना दो चार घंटे लिटाकर घर वापस भेज देते थे, बच्चे को आराम नहीं हुआ, परिजनों ने किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में भेजने की गुहार की तो डॉक्टरों ने उनकी बात नहीं सुनी और उसे दवाइयाँ देनी चालू रखीं.

परिजनों ने बताया कि डब्बा अस्पताल की दवाइयों का निखिल पर कोई असर नहीं हो रहा था उसके बावजूद भी डॉक्टरों ने लापरवाही जारी रखी, जब निखिल के माँ-बाप उसे कहीं और रिफर करने की गुहार करते तो डॉक्टर उन्हें अपनी डिग्री का धौंस दिखाते थे और उन्हें डांटते थे, नर्सिंग स्टाफ भी बदतमीजी से बात करता था. गुस्से में दवाइयां देता था.

आज तवियत ज्यादा खराब देखकर निखिल के माँ-बाप ESI से BK हॉस्पिटल ले गए लेकिन तब तक निखिल की मौत हो चुकी थी. परिजन बहुत दुखी हैं. डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को खूब बद्दुवाएं दे रहे हैं क्योंकि उन्होंने ना तो निखिल का सही से इलाज किया और ना ही उनसे तमीज से बात की, नर्स की बदतमीजी मरीज के परिजनों को याद थी इसलिए उसे भी खूब बद्दुवा दी गयी.

वहां पर मौजूद कई मरीजों ने बताया कि ESI में उन्हें बहुत परेशान किया जाता है, यहाँ से वहां दौडाया जाता है, इलाज के नाम पर सिर्फ थैली भर भर कर दवाएं दी जाती हैं जिसे खाकर वे पहले से भी अधिक बीमार हो जाते हैं और प्राइवेट हॉस्पिटल में अपने खर्च से इलाज कराना पड़ता है.

बता दें कि इतना बड़ा हॉस्पिटल होने के बाद भी यहाँ पर कोई सुविधा नहीं है. रात में इमरजेंसी में सिर्फ एक डॉक्टर रहता है और वो भी सिर्फ सर्दी, गर्मी और बुखार की दवाएं देता है, अन्य मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेज दिया जाता है लेकिन निखिल को कहीं रिफर भी नहीं किया गया. अगर समय रहते निखिल का किसी अच्छे अस्पताल में रिफर कर दिया जाता तो उसकी मौत नहीं होती लेकिन ESI हॉस्पिटल में मरीजों को हो रही परेशानी पर शासन, प्रशासन और सरकारों ने ऑंखें बंद कर रखी हैं.

ESI मरीज परेशान, आधी रात पार्क हॉस्पिटल में जमकर बवाल, चंदर भाटिया बोले - तुम्हें पड़ेंगे कीड़े

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फरीदाबाद, 13 अक्टूबर: कल आधी रात पार्क हॉस्पिटल में जमकर हंगामा हुआ है, ESI के कुछ गरीब मरीजों को परेशान देखकर आधी रात पूर्व विधायक चंदर भाटिया पार्क हॉस्पिटल पहुंचे और अस्पताल वालों को जमकर फटकार लगाई.

चंदर भाटिया ने कहा कि जब तुम लोग मरीजों को ठीक नहीं करते तो एडमिट क्यों कर लेते हो, तुम लोगों को कीड़े पड़ेंगे और गरीबों की बद्दुआ लगेगी.

इस अवसर पर एक गरीब की परेशानी सुनकर चंदर भाटिया भी भावुक हो गए और अस्पताल के एक डॉक्टर को डांट लगा दी.

उन्होंने कहा कि ESI के गरीब मरीजों को लूटा जा रहा है, इंश्योरेंस के चक्कर में ESI हॉस्पिटल वाले गरीब मरीजों को पार्क हॉस्पिटल में रिफर कर देते हैं लेकिन यहाँ पर उन्हें अच्छा इलाज नहीं मिलता. देखिये VIDEO.



बता दें कि फरीदाबाद में ESI बहुत बड़ा हॉस्पिटल बनाया गया है, बड़ी बड़ी इमारतें हैं, हॉस्पिटल की उंचाई देखकर दिल्ली का एम्स भी शर्मा जाता है लेकिन सुविधाओं के नाम पर यह अस्पताल सिर्फ डब्बा है इसलिए रात में अधिकतर मरीजों को पार्क हॉस्पिटल रिफर कर दिया जाता है लेकिन वहां पर मरीज परेशान होते हैं. 

डब्बा अस्पताल ESI ने किया था बच्चे को सफदरजंग रेफर, 6 दिन जिंदगी के लिए तडपा, फिर हार गया

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फरीदाबाद, 10 अक्टूबर: इसी महीने दो अक्टूबर को एक 8 दिन के बच्चे को गंभीर हालत में ESI हॉस्पिटल ले जाया गया था लेकिन ESI में इस वक्त गंभीर मरीजों के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है, रात में ड्यूटी पर एक काम चलाऊ डॉक्टर बिठा दिया जाता है जो गंभीर मरीजों को देखते ही सीधा प्राइवेट हॉस्पिटल रिफर करता है.

इस बच्चे को भी पार्क हॉस्पिटल रिफर कर दिया गया लेकिन जब बच्चे के परिवार वाले बच्चे को पार्क हॉस्पिटल में लेकर गए तो पार्क हॉस्पिटल वालों ने यह कहते हुए बच्चे को एडमिट करने से इनकार कर दिया कि उनके पास बच्चों के विशेषज्ञ सर्जन नहीं हैं इसलिए वह बच्चे को एडमिट नहीं कर सकते.

इसके बाद बच्चे को वापस ESI हॉस्पिटल लाया गया लेकिन ESI के डॉक्टर ने बच्चे की गंभीर हालत देखते हुए भी उसे एशियन या सर्वोदय जो इनके पैनल में हैं, में भेजने के बजाय दिल्ली सफदरजंग रेफर कर दिया जिसकी वजह से बच्चे की हालत और नाजुक हो गयी.

सफदरजंग के डॉक्टरों ने बच्चे को बचाने की कोशश की, उसके ICU में रखा गया लेकिन कई दिनों तक उसकी हालत सही नहीं हुई, उसके बाद उसे वेंटीलेटर पर शिफ्ट किया गया लेकिन 6 दिन तक जिंदगी के लिए जंग लड़ने के बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया.

यहाँ पर सवाल यह है कि इतना बड़ा हॉस्पिटल होने के बाद भी कर्मचारियों को सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं, यहाँ बड़ी बड़ी इमारतें हैं जिन्हें बनाने में अरबों रुपये खर्च हुए हैं, ये पैसे गरीब मजदूरों की सैलरी से काटे जाते हैं ताकि गरीब मजदूरों को अच्छा इलाज मिल सके.

लेकिन फरीदाबाद का ईएसआई हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नाम पर सिर्फ डब्बा है, अगर यकीन ना आये तो किसी दिन रात में जाकर देख लीजिये, एक या दो डॉक्टर रहते हैं और उन्हें सिर्फ सर्दी बुखार ठीक करना आता है.

ESI में इलाज कराने वाले कर्मचारी बताते हैं कि ESI के अस्पताल में उनका इलाज नहीं होता सिर्फ दवाएं दी जाती हैं जिसे खाकर वह पहले से भी ज्यादा बीमार हो जाते हैं, जैसे ही मरीज ESI अस्पताल या डिस्पेंसरी में जाता है, बिना उसकी जांच किये हप्ते दस दिन की दवाई दे दी जाती है, उल्टी-सीधी एंटीबायोटिक्स और दवाएं खा खाकर लोग और बीमार हो जाते हैं और जब बाहर के डॉक्टर के पास जाते हैं और शारीरिक टेस्ट करवाते हैं तब उनकी बीमारी का पता चलता है, उनका पैसा भी खर्च होता है और समय भी. ऐसे में सवाल यह उठता है कि सरकार गरीबों के पैसे क्यों काट रही है जब इलाज की सुविधा नहीं दे पा रही है, आखिर इतनी बड़ी बड़ी इमारतों का क्या फायदा.

मेट्रो हॉस्पिटल के डॉ सुजॉय भट्टाचार्य की विदेशों में बढ़ी मांग, सर्विया ने दिया सर्टिफिकेट

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फरीदाबाद, 5 अक्टूबर। चिकित्सा क्षेत्र में अग्रणीय मेट्रो अस्पताल के सुप्रसिद्ध हड्डी एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डा. सुजॉय भट्टाचार्य को सर्बिया देश ने 6 महीने की सर्जरी करने का सर्टिफिकेट दिया है, जिसके अंतर्गत वह सर्बिया और बैलग्रेड के यूनिवर्सिटी अस्पताल में सर्जरी कर पाएंगे। 

डा. सुजॉय द्वारा गत 19 सितंबर को नोवी सेड यूनिवर्सिटी अस्पताल में दो आप्रेशन भी किए गए थे, जिन्हें वहां के स्वास्थ्य मंत्री सहित सैकड़ों लोगों ने लाईव देखा था। डा. सुजॉय भट्टाचार्य की तकनीक तथा ज्वाइंट रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में उनकी कुशलता को वहां के डाक्टरों एवं नागरिकों द्वारा काफी सराहना गया। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह फरीदाबाद के पहले चिकित्सक है, जिन्हें विदेशों में आप्रेशन करने की अनुमति मिली है। इसके अलावा सर्बिया में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्हें वरिष्ठ फेकल्टी के रुप में आमंत्रित किया गया। 

पूर्वी यूरोप का यह एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन था, जिसमें इटली, स्पेन, हंगरी, स्लावोनिया, मोंटेनेग्रो और जर्मनी से वरिष्ठ डाक्टरों ने हिस्सा लिया। नीलम-बाटा रोड स्थित होटल डिलाईट में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान डा. सुजॉय ने बताया कि चिकित्सा के क्षेत्र में भारत पूरे विश्व में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहा है, पहले जहां विदेशों से डाक्टरों को यहां बुलाया जाता था और यहां के डाक्टर उनसे सर्जरी के बारे में जानकारी लेते थे परंतु अब भारत के डाक्टर विदेशों में जाकर वहां के डाक्टरों को जानकारी देते है और यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।

उन्होंने बताया कि 20 सालों के अनुभव के दौरान वह अब तक करीब 10 हजार सर्जरीं कर चुके है, जिनमें 7 हजार सर्जरियां घुटने बदलने की थी। एक सर्जरी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में रहने वाली 104 वर्षीय महिला का उन्होंने कूल्हे का आप्रेशन किया था, जबकि उनके दोनों घुटने पूरी तरह से ठीक थे और आगे भी कई सालों तक उनके घुटनों में दिक्कत आने की संभावना कम थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बढ़ते घुटनों की दिक्कतों का मुख्य कारण गलत खानपान, बढ़ता वजन व लोगों का जागरुक ना होना है।

उन्होंने बताया कि घुटनों को दुरुस्त रखने के लिए प्रतिदिन तीन से चार किलोमीटर पैदल चलना चाहिए और बढ़ती उम्र के पड़ाव के दौरान समय-समय पर अपनी डाक्टरी जांच करवानी चाहिए। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मेट्रो अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डा. नीरज जैन ने डा. सुजॉय की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि डा. सुजॉय अब विदेशों में भी लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर नेविगेशन के क्षेत्र में भी डा. सुजॉय दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा सर्जरी कर चुके है, उससे उनकी कार्य कुशलता एवं ख्याति विदेशों तक फैल चुकी है। 

मालूम हो कि डा. सुजॉय कई अंतर्राष्ट्रीय डाक्टरों एवं सर्जनों के साथ जुड़े है, जिसमें वह एक दूसरे के साथ तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान करते रहते हैं। यह डाक्टर एवं सर्जन अमेरिका, जर्मनी, यू.के. एवं आस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों से है। इस अवसर पर मेडिकल सुपरीडेंट डा. सीमा महेंद्रा, जनरल मैनेजर योगेश शर्मा सहित उनकी टीम के सभी सदस्य मौजूद थे।

अस्पताल के नाम पर डब्बा है ESI, 7 दिन के बच्चे को भेजा पार्क अस्पताल, उसने लेने से किया इनकार

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फरीदाबाद, 2 अक्टूबर: फरीदाबाद 3 नंबर में ESI हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज नाम से बहुत बड़ा अस्पताल है, बड़ी बड़ी इमारतें हैं जिन्हें बनाने में अरबों रुपये खर्च हुए हैं, ये पैसे गरीब मजदूरों की सैलरी से काटे जाते हैं ताकि गरीब मजदूरों को अच्छा इलाज मिल सके.

लेकिन फरीदाबाद का ईएसआई हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नाम पर सिर्फ डब्बा है, अगर यकीन ना आये तो किसी दिन रात में जाकर देख लीजिये, एक या दो डॉक्टर रहते हैं और उन्हें सिर्फ सर्दी बुखार ठीक करना आता है.

आज 7 दिन के बच्चे को ESI हॉस्पिटल में सीरियस हालत में ले जाया गया लेकिन वहां पर कामचलाऊ डॉक्टर थे, बच्चे को देखते ही उन्होंने पार्क हॉस्पिटल रेफर कर दिया, उससे पहले पार्क हॉस्पिटल वालों से बात की गयी और उन्होंने लाने को बोला लेकिन जब बच्चे को वहां ले जाया गया तो पार्क हॉस्पिटल ने एडमिट करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उनके पास सर्जन नहीं हैं.

इसके बाद बच्चे के माँ-बाप उसे वापस ESI ले आये. ESI के डॉक्टरों ने कहा कि हम सिर्फ सफदरजंग रिफर कर सकते हैं, बच्चे के गरीब माँ बाप मजबूर थे, उन्होंने एशियन या फरीदाबाद के किसी अन्य हॉस्पिटल में रेफर करने की मांग की लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों से इनकार कर दिया.

इसके बाद डॉक्टरों से बच्चे को सफदरजंग रेफर कर दिया और बच्चे के माँ बाप उसे सफदरजंग ले गए. अब सवाल यह उठता है कि क्या ESI के मजदूरों के बच्चों का फरीदाबाद में इलाज ही नहीं है. हर महीनें उनकी मेहनत की कमाई से 500-600 रुपये कटते हैं लेकिन इलाज के नाम पर उन्हें सिर्फ धक्के खिलाये जाते हैं.

ESI में इलाज कराने वाले कर्मचारी बताते हैं कि ESI के अस्पताल में उनका इलाज नहीं होता सिर्फ दवाएं दी जाती हैं जिसे खाकर वह पहले से भी ज्यादा बीमार हो जाते हैं, जैसे ही मरीज ESI अस्पताल या डिस्पेंसरी में जाता है, बिना उसकी जांच किये हप्ते दस दिन की दवाई दे दी जाती है, दवा खा खाकर लोग और बीमार हो जाते हैं और जब बाहर के डॉक्टर के पास जाते हैं और शारीरिक टेस्ट करवाते हैं तब उनकी बीमारी का पता चलता है, उनका पैसा भी खर्च होता है और समय भी. ऐसे में सवाल यह उठता है कि सरकार गरीबों के पैसे क्यों काट रही है जब इलाज की सुविधा नहीं दे पा रही है.

अब नवजात बच्चों की गंभीर बीमारियों का हो सकेगा अच्छा इलाज, सेक्टर-10 में खुला निओ-स्टार अस्पताल

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फरीदाबाद, 23 सितम्बर: फरीदाबाद के 4 वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों, डॉ सुदर्शन गुप्ता, डॉ बालकृष्ण बंसल, डॉ शिल्पी जैन राजगढ़िया एवं डॉ सुप्रिया रस्तोगी ने शहर की जनता की सेवा के लिए नवजात शिशु का अस्पताल "NEOStar- Center FOR NewBorn" निओस्टार खोला है. 

नियोस्टार अपनी ही तरह का शहर का पहल अस्पताल है, जहाँ केवल नवजात शिशुओं के रोगों का निवारण किया जाता है, इस अपताल में जन्म से 3 माह तक के शिशुओं का इलाह होगा, सुविधाओं के लिहाज से ये काफी उन्नत एवं अग्रणी सेंटर है, जहाँ समय के पूर्व बच्चों, कम वजन के बच्चे, जन्म होने के बाद न रोने वाले बच्चे, निमोनिया, पैदा होने के समय माँ के पेट में ही टॉयलेट करने वाले बच्चे, एवं सभी प्रकार की बीमारियों का इलाह होगा.

इस अत्याधुनिक सेंटर पर वेंटिलेटर, हाई फ्रिक्वेंसी, वेंटिलेटर, HFNC, आक्सीजन, CPAP, कुलिंग थेरेपी, फोटोथेरेपी, इन्क्युवेटर, जैसी सारी सुविधाएँ उपलब्ध हैं. इसके आलावा सेंटर पर 24 घंटे इन्क्युवेटर से लैस एम्बुलेंस, दवाएं, इमरजेंसी, एवं जांच की सभी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं.

इस अवसर पर डॉक्टरों ने कहा कि हमने फरीदाबाद शहर के नवजात बच्चों की जान बचाने के लिए यह अस्पताल बोला है क्योंकि बहुत सारे अस्पतालों में जन्म लेने के बाद बच्चों को गंभीर बीमारियां हो जाती हैं जिनका इलाज उन अस्पतालों में नहीं हो पाता, इस अस्पताल में ऐसे सभी नवजात बच्चों का इलाज किया जाएगा और बच्चों की जान बचाई जाएगी, इसके लिए हमने अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस मशीनों का इंतजाम किया है.

डॉक्टरों की टीम


बच्चों का इलाह वरिष्ठ  नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ सुप्रिया रस्तोगी द्वारा उचित दामों पर किया जाएगा. सेंटर का उद्घाटन, वरिष्ठ बाल रोग विशेषग्य डॉ राजन कालरा द्वारा आज दोपहर 12:30 पर किया गया, इस आयोजन पर शहर के लगभग सभी बाल रोग विशेषग्य एवं स्त्री रोग विशेषग्य डॉक्टर उपस्थित रहे, शहर की प्रगति उन्नति में निओस्टार अस्पताल का खुलना एक बड़ा कदम है.

देखिये अस्पताल के उद्घाटन का पूरा वीडियो

मंत्री KPG बीके हॉस्पिटल में करेंगे आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत, पहुंचकर लें योजना का लाभ

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फरीदाबाद, 22 सितम्बर: मोदी सरकार की सबसे बड़ी योजना आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत होने जा रही है, फरीदाबाद में केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर कल बादशाह खान हॉस्पिटल में इस योजना की शुतुआत करेंगे और जनता को सबसे बढ़िया गिफ्ट देंगे.

केंद्रीय मंत्री चौधरी कृष्णपाल गुर्जर रविवार दिनांक 23 सितम्बर दोपहर 12 बजे BK Hospital बादशाह खान अस्पताल से फरीदाबाद में आयुष्मान भारत ( प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) का शुभारंभ करेंगे.

प्रदेश के 194 सरकारी और ग़ैर सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत मुफ्त इलाज करा सकते है।इसके अलावा प्रदेश के बाहर भी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इलाज करा सकते हैं. 

इस योजना का लाभ लेने के लिए जनता से अधिक से अधिक संख्या में बीके हॉस्पिटल पहुँचने का आग्रह किया गया है. कल हजारों लोगों का रजिस्ट्रेशन भी होगा ताकि उनके तुरंत इलाज की सुविधा मिल सके.

400 चर्मरोग मरीजों का निशुल्क इलाज करके डॉ इशिता कपूर ने किया कमाल, पढ़ें

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फरीदाबाद, 3 सितम्बर: दिनांक 2-9-2018 /3-9-2018 रविवार/सोमवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आर0के0 अस्पताल 3सी/59 बी0पी0 एन0आई0टी0 फरीदाबाद में एक विशाल निःशुल्क चर्म रोग कैम्प का आयोजन किया गया।

इस कैम्प में डा0 इशिता कपूर के  द्वारा चर्म रोग के विभिन्न प्रकार के मरीजों (जैसे मस्से, पिम्पलस, काली छाईयाँ, दाद, खुजली, गंजापन, सफेद निशान, सोरायसिस, झुरियाँ, सफ़ेद (निशान), गुप्त रोग का निःशुल्क परामर्श दिया गया और साथ में सभी मरीजों को समझाया गया कि भविष्य में इन बीमारियों से बचने के लिए क्या-क्या उपाय करें।

इस अवसर पर अस्पताल की चर्म रोग विशेषज्ञ डा0 इशिता कपूर ने बताया कि कैम्प में लगभग 397 मरीजों ने स्वास्थ्य लाभ लिया। 

आर0के0 अस्पताल के मैडिकल डायरेक्टर डा0 राकेश कपूर ने सभी मरीजों का धन्यवाद किया और बताया कि आर0के0 अस्पताल विभिन्न-विभिन्न समय पर अलग अलग प्रकार के कैम्प का आयोजन करता आया है और भविष्य में भी करता रहेगा ।

तेजाब पीकर पर्वतिया कॉलोनी का युवक बीके से रिफर होकर पहुंचा सफदरजंग

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फरीदाबाद: शहर की पर्वतिया कॉलोनी से एक सुसाइड अटेम्प्ट का मामला सामने आया है. जानकारी के मुताबिक़ किशन कुमार नामक युवक ने तेज़ाब पीकर जान देने की कोशिश की, उसे तुरंत बीके हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे इलाज के लिए सफदरजंग रेफर कर दिया गया.

किशन के तेज़ाब पीने के कारणों का पता नहीं चल पाया है, जैसे ही इस मामले में अपडेट आएगा हम आपको सूचित करेंगे.

विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़, सर्वोदय नर्सिंग इंस्टिट्यूट में बिना परीक्षा के प्रमोशन

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फरीदाबाद: फरीदाबाद के बड़े अस्पताल सर्वोदय के नर्सिंग इंस्टिट्यूट में विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है, बिना परीक्षा के छात्राओं को अगले वर्ष के लिए प्रमोट कर दिया गया जिसकी वजह से नर्सिंग की छात्राएं चिंतित हैं.

छात्राओं ने एक वीडियो में कहा कि वह सर्वोदय नर्सिंग इंस्टिट्यूट में पढ़ती हैं जिसे पंडित बीडी शर्मा उनिवेर्सितिटी से मान्यता मिली हुई है. उन्हें बिना परीक्षा के ही दूसरे वर्ष  के लिए प्रमोट कर दिया गया, जब उन्होंने इंस्टिट्यूट से इस पर सवाल किया तो कहा गया कि जब यूनिवर्सिटी ही परीक्षा नहीं ले रही है तो हम क्या करें.

संस्थान के छात्र-छात्राओं का कहना है कि अब हमें हमारे भविष्य की चिंता है, हम कोई और कोर्स भी नहीं कर सकते, हमें बिना परीक्षा के सेकंड ईयर में भेज दिया गया है, यहाँ भी प्रॉब्लम आ सकती है.

इस मामले में शहर के RTI कार्यकर्ता वरुण श्योकंद ने भी चिंता जाहिर की है, उन्होंने पूछा कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ के लिए कौन है जिम्मेदार? देखें VIDEO.