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रात को पत्थर खोदते हैं खनन माफिया, दिन में भरते हैं डम्फर में, LN पाराशर को देखकर भागा डंफर

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फरीदाबाद: जिला वन अधिकारी सुरेश पूनिया  और खनन अधिकारियों को अवैध खनन और पत्थरों की चोरी देखना हो तो कोट गांव से मांगर जाने वाली सड़क पर जाएँ और वहाँ देखें कैसे पत्थर चोरी हो रहे हैं। और पेड़ भी काटे जा रहे हैं। ये कहना है बार एसोशिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट एलएन पाराशर का जिन्होंने कहा कि मैं रविवार को भी अरावली पर गया जहाँ कोट से मांगर जाने वाली सड़क के किनारे मैंने देखा कि कुछ जगहों पर पत्थर एकत्रित किये गए हैं और उन पत्थरों को कीकड़ से ढंका गया था। 

पराशर ने कहा कि मैं उसके थोड़ा आगे गया तो देखा कि एक डम्फर में पत्थर भरा था जो क्रेशर जोन की तरफ जा रहा था। पाराशर ने कहा कि कुछ दूर तक मैंने डम्फर का पीछा भी किया और देखा कि जिस तरह के पत्थर इकठ्ठा कर कीकड़ से ढंके गए थे ठीक उसी तरह का पत्थर डम्फर में लदा था। 

पाराशर ने कहा कि मुझे मीडिया के माधयम से जानकारी मिली कि जिला वन अधिकारी ने दावा किया है कि उन्हें जानकारी मिली है कुछ जगहों पर पेड़ काटे जाने की उन्हें सूचना मिली है और वो मौके पर जाकर इसका जायजा लेंगे। पाराशर ने कहा कि मुझे प्रतीक्षा रहेगी कि ये अधिकारी कब तक मौके पर जाते हैं। 

पाराशर ने कहा कि मुझे सूचना मिली थी कि छुट्टी के दिन अरावली से ज्यादा पत्थर चोरी किये जाते हैं। इसलिए मैंने शनिवार और रविवार को अरावली का दौरा किया और दोनों दिन देखा कि सच में पत्थर चोरी हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पत्थरचोर लगातार सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ा रहे हैं और अधिकारी पत्थरचोरों पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं। पाराशर ने कहा कि फरीदाबाद-सूरजकुंड रोड, फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड और कोट गांव से मांगर रोड पर पत्थरचोरी का खेल चल रहा है।

अरावली पर पत्थर चोर माफियाओं को ढूंढने निकले वकील LN पाराशर, चोरी-छुपे अभी भी किया जा रहा खनन

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फरीदाबाद: अरावली पर कई जगह ब्लास्ट कर पहाड़ उड़ाए जा रहे हैं लेकिन फरीदाबाद प्रसाशन अब भी सो रहा है। अब इस अवैध खनन और ब्लास्ट की शिकायत नए उपायुक्त अशोक कुमार गर्ग से करूंगा। ये कहना है बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट एल एन पाराशर का जिन्होंने दावा किया कि बुद्धवार को मैंने अरावली का दौरा किया और कई जगहों पर अवैध कब्जे और अवैध खनन हो रहा है। 
उन्होंने कहा कि हाल में महिपाल ग्रीन वैली के मालिक पर अवैध खनन का मामला दर्ज हुआ था और अब भी फरीदाबाद सूरजकुंड रोड पर ब्लास्ट कर पहाड़ उड़ाए जा रहे हैं जिसकी तस्वीरें मैं मीडिया को भेज रहा हूँ साथ में सुप्रीम कोर्ट में मैंने जो याचिका दायर की है उस याचिका के कागजात के साथ भी इन तस्वीरों को संलग्न कर रहा हूँ। 

वकील पाराशर ने कहा कि हाल में फरीदाबाद उपायुक्त  का तबादला हुआ और उनके पास कई मामले की मैंने लिखित शिकायत दी थी लेकिन वो खामोश बैठे रहे। अब नहीं उपायुक्त आये हैं उनके पास भी शिकायत भेज रहा हूँ। हो सकता है वो इस मामले को संज्ञान में लें। 
पाराशर ने कहा कि लगभग एक महीने में मैंने अरावली पर दर्जनों अवैध निर्माण और अवैध खनन का खुलासा किया लेकिन सिर्फ महिपाल ग्रीन वैली के मालिक पर एफआईआर दर्ज की गई। अन्य माफियाओं का खेल अब भी जारी है। 
पाराशर ने कहा कि अरावली पर पत्थर माफिया सक्रिय हैं और ये रात्रि में ब्लास्ट कर पहाड़ तोड़ देते हैं और मौका पाकर उन पत्थरों को डम्फर में भरकर ले जाते हैं और मंहगे दामों पर बेंच देते हैं। पाराशर ने कहा कि एक माफिया कम से कम चार डम्फर पत्थर रोज बेंचता है और एक डम्फर पत्थर 25 हजार रूपये से ज्यादा का बिकता है और इस तरह हर माफिया कम से कम एक लाख रूपये हर रोज कमा लेते हैं। 

पाराशर के कहा कि ये माफिया खनन अधिकारियों को मोटा चढ़ावा चढ़ा अरावली को लूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि खनन विभाग के अधिकारी कभी-कभी खानापूर्ति के लिए हल्की धाराओं में किसी माफिया पर मामला दर्ज करवा देते हैं और वो माफिया खड़े-खड़े जमानत लेकर अगले दिन फिर अपना खेल खेलने लगते हैं। 
पाराशर ने कहा कि अरावली पर एक दो नहीं दर्जनों जगह अवैध निर्माण भी चल रहे हैं। दर्जनों जगहों पर तारफेंसिंग कर सैकड़ों एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया गया है। ये खेल बिना अधिकारियों की मिलीभगत के नहीं हो सकता। 

जहां नहीं लग सकती एक भी ईंट, वहां खुलेआम हो रहा अवैध निर्माण, LN पाराशर ने जुटाए SC के लिए सबूत

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फरीदाबाद: सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद भी अरावली पर अवैध निर्माण एवं अवैध खनन जारी है। बार एसोशिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट एल एन पाराशर ने मंगलवाल अरावली का दौरा किया और कहा कि कई जगहों पर अब भी निर्माण जारी है। उन्होंने कहा कि मंगलवार मैंने मौके की कई तस्वीरें लीं और उसे सुप्रीम कोर्ट भेज रहा हूँ। 

पाराशर ने कहा कि फरीदाबाद गुरुग्राम रोड के किनारे अरावली पर एक बड़ा फ़ार्म हाउस बनाया जा रहा है और वहां चिनाई चल रही थी लेकिन अब चिनाई पूरी हो करके उसमें एक बड़ा गेट लगा दिया गया है और एक दूसरा बड़ा गेट लगाने की तैयारी की जा रही है। 

पराशर ने  बताया कि उनके लगातार प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद भी अवैध निर्माण अवैध खनन बदसूरत जारी है भू माफियाओं को सुप्रीम कोर्ट का कतई डर नहीं है एडवोकेट पराशर ने यह भी बताया कि उन्होंने फरीदाबाद के कई अधिकारियों और हरियाणा के चीफ सेक्रेट्री के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कंटेंट दायर की है जिसकी सुनवाई 30 अप्रैल को होनी है लगातार हो रहे अवैध निर्माण और खनन पर कुछ एफआईआर . भी हुई है जो यह एक पुख्ता सबूत है कि अब भी अरावली पर यह सब हो रहा है। 

एडवोकेट पाराशर ने कहा कि जहां एक तरफ कांत इंक्लेव पर करोड़ों से बने महल तोड़े जा रहे हैं उसको देख कर के भी अरावली पर कब्जा धारियों की आंखें नहीं खुल रही जब वह महल ही नहीं बच रहे तो इनका अवैध निर्माण कैसे बच जाएगा लेकिन भूमाफिया लगातार कब्जा करने अवैध निर्माण और अवैध खनन में लगे हुए हैं अरावली का चीर हरण अभी जारी है देखें कब तक प्रशासन आंखें बंद करके बैठा रहता है एडवोकेट पराशर ने यह भी कहा कि यह सब कुछ नेताओं और अधिकारियों के संरक्षण में हो रहा है आने वाली सुप्रीम कोर्ट की तारीख में वह अदालत को यह भी बताएंगे।

आचार संहिता का फायदा उठाकर अरावली के माफियाओं ने शुरू किये ताबड़तोड़ कब्जे और अवैध खनन: पाराशर

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फरीदाबाद: आचार संहिता के दौरान अरावली के माफियाओं की मौज आ गई है और अरावली के दर्जनों जगहों पर चीरहरण जारी है। अरावली पर अवैध खनन, अवैध कब्जे, हरे पेड़ों की कटाई जमकर हो रही है। ये कहना है बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के एलएन पाराशर का जिन्होंने शुक्रवार अरावली का दौरा किया और बड़ा दावा करते हुए कहा कि फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड पर पाली पुलिस चौकी के आगे मुख्य सड़क के किनारे लगभग पांच एकड़ जमीन पर कब्ज़ा किया जा रहा है और यहाँ अवैध खनन के साथ हरे पेड़ भी काटे जा रहे है। 

पाराशर ने कहा कि जहाँ ये कब्ज़ा किया जा रहा है वहाँ सड़क की तरफ बांस की दीवार लगा दी गई है ताकि बाहर से कोई अंदर न देख सके। पाराशर ने कहा कि मैंने अंदर जाकर देखा तो वहाँ पिलर गड़े दिखे और काफी दूर तक तारफेंसिंग की गई है।

पाराशर ने कहा कि ये कब्ज़ा मुख्य सड़क के किनारे है इसलिए ये जमीन अरबों की हो सकती है और इस जगह पर बड़ा खेल खेला जा रहा है और संभव है कि खनन विभाग के अधिकारियों और वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ये कब्ज़ा किया जा रहा हो। 

पाराशर ने कहा कि अभी तक ऐसे कब्जे अरावली के जंगलों के अंदर ही दिखते थे लेकिन अब सड़क के किनारे भी अरावली का चीयर-हरण कर रहे हैं। केके उज्जवल फ़ार्म हाउस और ये कब्ज़ा इसका सीधा उदाहरण है। 

पाराशर ने कहा कि लोकसभा चुनाव की वजह से कुछ अधिकारियों की व्यस्तता का माफिया फायदा उठा रहे हैं। पाराशर ने कहा कि अधिकतर माफियाओं पर नेताओं का हाँथ है इसलिए इनके काले कारनामों पर अधिकारी लगाम नहीं लगा पा रहे हैं। पाराशर ने कहा कि हाल में मैंने महिपाल फार्म हॉउस के अंदर अवैध खनन का खुलासा किया तब जाकर उस पर एफआईआर दर्ज हुई। 

पाराशर ने कहा कि अरावली के माफिया फरीदाबाद के नेताओं और अधिकारियों से मिलकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी धज्जियाँ उड़ाई जा रहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस कब्जे की तस्वीरें और वीडियो भी मैं सुप्रीम कोर्ट भेज रहा हूँ और इन माफियाओं पर अदालत की अवमानना का मामला भी दर्ज करवाऊंगा। 

पत्थर-चोरी के खिलाफ FIR दर्ज, वकील LN पाराशर आरोपी महिपाल भड़ाना को भिजवाएंगे जेल

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फरीदाबाद: अरावली पर अवैध खनन, पत्थर और बजरी चोरी करके करोड़ों रुपये कमाने वालों पर एल एन पाराशर सख्त हो गए हैं. आज सूरजकुंड पुलिस ने एक FIR दर्ज की है. वकील एल एन पाराशर ने खुद घटनास्थल का दौरा करके अवैध खनन का पर्दाफाश किया था. वकील पाराशर ने पुलिस प्रशासन को आगाह करते हुए कहा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लें ताकि उन्हें उनके किये की सजा मिल सके. वह खुद दोषियों को जेल पहुंचाने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे.

अरावली चीरहरण करके कुछ माफिया अभी भी करोड़ों रुपये मुनाफ़ा कमा रहे हैं लेकिन शिकायत के बाद कुछ लोगों के खिलाफ एक्शन भी हो रहा है. कुछ दिनों पहले महिपाल ग्रीन वैली के पास अवैध खनन और पत्थर-बजरी चोरी का मामला देखा गया था, वकील एल एन पाराशर, पूर्व मेयर देवेन्द्र भड़ाना और कई पत्रकारों ने चोरी-स्थल का दौरा किया था.

इस मामले में महिपाल ग्रीन वैली के मालिक महिपाल भडाना के खिलाफ खनन विभाग में शिकायत दी गयी. खनन इंस्पेक्टर गुलशन कुमार ने चोरी-स्थल का दौरा किया और शिकायत सही पाए जाने पर महिपाल भड़ाना के खिलाफ थाना सूरजकुंड में एफआरआर- 209 दर्ज करवा दी है। दोषियों के खिलाफ IPA की धारा - 188, 379,  21 (4). माइनिंग ऐक्ट के तहत कार्यवाही होगी. महिपाल भडाना के खिलाफ पहले भी कानूनी कार्यवाही हो चुकी है.

क्या कहा LN पाराशर ने

वकील एल एन पाराशर ने बताया - महिपाल भड़ाना महिपाल ग्रीन वैली में कई महीने से चुपचाप अवैध खनन करवा रहे थे और अब तक कई करोड़ के पत्थर और बजरी निकालकर बेंच चुके हैं। एक दिन मैं कुछ पत्रकारों के साथ मौके पर गया तो देखा कि लगभग 500 मीटर में 30 से 40 तक की गहराई में पत्थर निकाले जा रहे हैं। पाराशर ने कहा कि महिपाल ग्रीन वैली में जितनी खुदाई कर पत्थर निकाले गए हैं उसका आंकड़ा लगाया जाए तो 15 से 20 करोड़ रूपये के पत्थर निकाले जा चुके हैं। वकील पाराशर ने कहा कि एक डम्फर पत्थर और बजरी  लगभग 25 हजार की बिकती है और महिपाल भड़ाना लगभग 10 डम्फर बजरी, पत्थर वहाँ से हर रोज निकालकर लगभग दो लाख की बजरी रोज बेंच रहा था और ये खेल वो कई महीने से खेल रहा था।

पाराशर ने कहा कि मैंने मौके का जायजा लिया तो हैरान रह गया और मुझे लगा कि फरीदाबाद के खनन विभाग के अधिकारी सच में कुम्भकर्णी नींद में सो रहे हैं या तो मिल खनन माफिया से मिलकर ये खेल खेल रहे हैं और अपने जेबें भर रहे हैं।

देवेन्द्र भड़ाना ने दी थी खनन विभाग में शिकायत

वकील एल एन पाराशर की सलाह पर शहर के पूर्व मेयर देवेन्द्र भड़ाना जो महिपाल भड़ाना के पुत्र हैं, उन्होंने खनन विभाग में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज करने की अपील की है.

देवेन्द्र भड़ाना की शिकायत के मुताबिक़ - मैं देवेन्द्र भड़ाना पूर्व महापौर फरीदाबाद एक जिम्मेदार नागरिक हूँ तथा पर्यावरण प्रेमी हूँ, समय समय पर फरीदाबाद में अरावली में अवैध गतिविधियों के बारे में प्रशसन को इतेला देता रहता हूँ. 

ऐसा ही एक मामला सूरजकुंड रोड पर स्थित महिपाल ग्रीन वैली में देखने को मिला जहाँ सोची समझी प्लानिंग के तहत बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है जहाँ करोड़ों रुपये का पत्थर और बजरी निकालकर हरियाणा सरकार के राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचकर मुनाफ़ा स्वयं महिपाल ग्रीन वैली का मालिक महिपाल भडाना स्वयं कमा रहा है.

महिपाल भडाना के खिलाफ पहले भी अवैध खनन को लेकर कार्यवाही हो चुकी है उसके बाद भी यह अवैध खनन करने से बाज नहीं आ रहा है. अतः महिपाल ग्रीन वैली के मालिक के खिलाफ अवैध खनन का मुकदमा दर्ज करके कानूनी कार्यवाही करें और चोरी हुए पत्थरों से हुए हरियाणा सरकार के राजस्व के नुकसान की रिकवरी करें.

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देवेन्द्र भडाना ने यह भी बताया कि अगर खनन विभाग के अधिकारीयों ने इस मामले में कार्यवाही नहीं की तो वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और सभी अधिकारियों को पार्टी बनाकर इनसे जवाब मांगेंगे.

पूर्व मेयर देवेन्द्र भड़ाना ने महिपाल ग्रीन वैली के खिलाफ अवैध खनन और पत्थरचोरी की दी शिकायत

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फरीदाबाद: सूरजकुंड रोड पर अरावली क्षेत्र में स्थित महिपाल ग्रीन वैली और फार्म हाउस के मालिक महिपाल भड़ाना के खिलाफ अवैध खनन और पत्थरचोरी करके हरियाणा सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाने की शिकायत दी गयी है. शहर के पूर्व मेयर देवेन्द्र भड़ाना जो महिपाल भड़ाना के पुत्र हैं, उन्होंने खनन विभाग में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज करने की अपील की है.

देवेन्द्र भड़ाना की शिकायत के मुताबिक़ - मैं देवेन्द्र भड़ाना पूर्व महापौर फरीदाबाद एक जिम्मेदार नागरिक हूँ तथा पर्यावरण प्रेमी हूँ, समय समय पर फरीदाबाद में अरावली में अवैध गतिविधियों के बारे में प्रशसन को इतेला देता रहता हूँ. 

ऐसा ही एक मामला सूरजकुंड रोड पर स्थित महिपाल ग्रीन वैली में देखने को मिला जहाँ सोची समझी प्लानिंग के तहत बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है जहाँ करोड़ों रुपये का पत्थर और बजरी निकालकर हरियाणा सरकार के राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचकर मुनाफ़ा स्वयं महिपाल ग्रीन वैली का मालिक महिपाल भडाना स्वयं कमा रहा है.

महिपाल भडाना के खिलाफ पहले भी अवैध खनन को लेकर कार्यवाही हो चुकी है उसके बाद भी यह अवैध खनन करने से बाज नहीं आ रहा है. अतः महिपाल ग्रीन वैली के मालिक के खिलाफ अवैध खनन का मुकदमा दर्ज करके कानूनी कार्यवाही करें और चोरी हुए पत्थरों से हुए हरियाणा सरकार के राजस्व के नुकसान की रिकवरी करें.

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देवेन्द्र भडाना ने यह भी बताया कि अगर खनन विभाग के अधिकारीयों ने इस मामले में कार्यवाही नहीं की तो वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और सभी अधिकारियों को पार्टी बनाकर इनसे जवाब मांगेंगे.

भू-माफियाओं पर नहीं हो रहा SC के एक्शन का असर, कई जगह पत्थरचोरी, अवैध निर्माण जारी: LN पाराशर

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फरीदाबाद: सुप्रीम कोर्ट एक तरफ जहाँ अरावली के अवैध निर्माण ढहाने का आदेश दे रहा है वहीं दूसरी तरफ अरावली पर अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी हैं। बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट एल एन पाराशर ने बताया कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कांत एन्कलेव के सात निर्माण मालिकों की याचिका को खारिज कर दिया।  इन सात निर्माणों को कभी भी तोड़ा जा सकता है। वहीं दूसरी तरह फरीदाबाद-सूरजकुंड रोड पर कई जगहों पर अब भी निर्माण जारी हैं।

पाराशर ने बताया कि मंगलवार को मैंने अरावली का दौरा किया और कई जगहों पर अवैध निर्माण और अवैध खनन होते हुए देखा। पाराशर ने बताया कि अरावली का सीना चीर जहां होटल डिलाइट बन रहा है उसके पास में ही एक खाली जमीन पर एक जगह और निर्माण हो रहा है। पाराशर ने कहा कि अरावली के माफिया और पत्थरचोर इन दिनों बड़ा खेल -खेल रहे हैं। उन्होंने बताया कि कांत एन्क्लेव मामले में अगली सुनवाई 22 अप्रैल को है और  कांत बिल्डर्स के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट कार्रवाई का आदेश दे सकता है इसलिए उसे उपस्थित रहने का आदेश जारी किया है। 

पाराशर ने कहा कि  कांत एन्क्लेव के निर्माणों पर हो रही कार्यवाही को देखकर भी अरावली के माफियाओ पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। उनका अरावली लूटो अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले मुझे सूचना मिली कि अनंगपुर के महिपाल ग्रीन वैली में अवैध खनन चल रहा है। उसकी तस्वीरें कई विभाग के अधिकारियों को भेजी गईं लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई और वहां से लाखों के पत्थर रोज निकालकर बेंचे जा रहे हैं। पराशर ने कहा कि अरावली पर एक दो नहीं 50  से ज्यादा जगहों पर निर्माण हो रहा है। कोई फ़ार्म हाउस बना रहा है तो कोई दीवार खड़ी कर रहा है। कई जगहों पर खनन हो रहा है तो कई जगहों पर पेड़ काटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि फरीदाबाद में प्रशासन नाम की कोई चीज ही नहीं है।

 उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट न होता तो फरीदाबाद के माफिया अरावली को पूरी तरह ख़त्म कर देते। उन्होंने कहा कि इन माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए ही मैं सुप्रीम कोर्ट गया और कान्त एन्क्लेव के मामले में पार्टी बनने की याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि इन माफियाओ पर भी उसी तरह की कार्यवाही की मांग करूंगा जिस तरह कान्त एन्क्लेव के माफियाओं पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि ये माफिया एनसीआर की जनता के सबसे बड़े दुश्मन हैं और फरीदाबाद, गुरुग्राम, दिल्ली के कई लाख लोगों को प्रदूषण से बेमौत मरवा रहे हैं। 

महिपाल फार्म हाउस में अवैध खनन, वकील LN पाराशर ने की कानूनी कार्यवाही की मांग

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फरीदाबाद: एक तरफ जहाँ वन विभाग अरावली पर अवैध निर्माणों पर कार्यवाही की तैयारी कर रहा है और वन अधिकारी सुरेश पुनिया जिला उपायुक्त अतुल द्विवेदी को पत्र लिखने की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ अरावली पर अवैध खनन और अवैध निर्माण जारी है। ये दावा बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एल एन पाराशर ने किया है। एडवोकेट पाराशर का कहना है कि फरीदाबाद के पूर्व मेयर देवेंद्र भड़ाना ने मेरे पास दर्जनों ऐसी तस्वीरें भेजीं हैं जिनमे अवैध खनन होता दिख रहा है और ये तस्वीरें सोमवार 8 मार्च की हैं। पाराशर के मुताबिक़ ये तस्वीरें अनंगपुर के पास महिपाल ग्रीन वैली की हैं जहाँ रोज कई डम्फर पत्थर निकाले जा रहे हैं। पाराशर ने बताया कि एक डम्फर पत्थर लगभग 25 हजार रूपये के बिकते हैं और  यहाँ से हर रोज कम से कम 10 डम्फर पत्थर निकालकर बेंचे जा रहे हैं और तकरीबन ढाई लाख रूपये के पत्थर हर रोज बेंचे जा रहे हैं। 

पाराशर ने बताया कि लगभग एक महीने से लगातार यहाँ से पत्थर निकाले जा रहे हैं और अब तक लगभग एक करोड़ रूपये के पत्थर निकाले जा चुके हैं। पाराशर का आरोप है कि ये सब वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। इस बारे में जब पूर्व मेयर देवेंद्र भड़ाना से बात की गई तो उन्होंने बताया कि महिपाल ग्रीन वैली की जो तस्वीरें मैंने पाराशर के पास भेजी हैं वो 8 मार्च की ही हैं और वहां से भारी मात्रा में पत्थर निकाले जा रहे हैं। पूर्व मेयर ने कहा कि ये तस्वीरें मौके पर जाकर मैंने खुद खींची हैं।  भड़ाना ने बताया कि वहां अवैध खनन ही नहीं, हरे पेड़ भी काटे जा रहे हैं। भड़ाना ने बताया कि इस खनन की जानकारी  मैंने सूरजकुंड थाना प्रभारी, वन विभाग के अधिकारी को भेजी है लेकिन शायद ही कोई कार्यवाही की जाए इसलिए मैंने एडवोकेट पराशर को ये जानकारी दी क्यू कि उन्होंने अरावली पर अवैध खनन और अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। 

इस अवैध खनन के बारे में और अधिक जानकारी देते हुए वकील पाराशर ने बताया कि एक तरफ जहाँ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कांत एन्क्लेव की कई बड़ी इमारतों को जमीदोज कर दिया तो दूसरी तरह महिपाल ग्रीन वैली जैसे कई फ़ार्म हाउस वाले अपने फ़ार्म हाउस में अवैध खनन कर रहे हैं और अंदर ही अंदर बड़े बड़े निर्माण कर रहे है। पाराशर ने बताया कि महिपाल ग्रीन वैली का मैंने दौरा भी किया था जहाँ अंदर बड़ी बड़ी इमारतें बन गईं हैं  और यहाँ से कई करोड़ के पत्थर भी निकालकर बेंचे गए हैं।

 पाराशर ने कहा कि ग्रीन वैली के अंदर से पत्थर निकाले जाते हैं और जब जमीन समतल हो जाती है तो वहां इमारत बना ली जाती है। पाराशर ने कहा कि ये फ़ार्म हाउस वाला सरेआम सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ा रहा है। पाराशर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में कांत एन्क्लेव को लेकर जो मामला चल रहा है उसमे मैं भी पार्टी हूँ और सोमवार के खनन की जानकारी भी मैं सुप्रीम कोर्ट को दूंगा। 

अरावली पर महिपाल फार्म हाउस के अंदर हो रहा अवैध खनन, निकाले गए कीमती पत्थर

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फरीदाबाद: अरावली पहाड़ पर अभी भी धड़ल्ले से अवैध खनन जारी है, एक फोटो महिपाल फार्म हाउस के अंदर से आई है जहां पर ताजा अवैध खनन हुआ है.

फोटो देख कर लगता है यहां पर पत्थरों की चोरी की गई है जेसीबी मशीनों से पत्थर निकाले गए हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि महिपाल वैली में काफी अंदर तक बड़ी बड़ी बिल्डिंग में बनी हुई हैं. कई लोग इन इमारतों को अवैध बताते हैं लेकिन प्रशासन ने उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है, अवैध खनन की तस्वीरें आने के बाद देखते हैं खनन विभाग और पुलिस प्रशासन क्या एक्शन लेता है.

वकील LN पाराशर ने उड़ाए भू-माफियाओं के होश, तोड़े जा सकते हैं अरावली के सैकड़ों फार्म हाउस

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फरीदाबाद: कांत एन्क्लेव मामले के बाद अब वन विभाग नींद से जागा है और अरावली पर सैकड़ों छोटे बड़े अवैध निर्माण जल्द तोड़े जा सकते है। बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एल एन पाराशर ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि अरावली पर पीएलपीए के दायरे में आने वाले सैकड़ों अवैध निर्माण जल्द तोड़े जा सकते हैं इसके लिए वन विभाग ने जिला अधिकारी फरीदाबाद को पत्र लिख पूरी जानकारी दी है। 

पाराशर ने कहा कि फरीदाबाद जिले में अरावली क्षेत्र में पीएलपीए के दायरे में लगभग 100 बड़े फ़ार्म हाउस और दर्जनों अन्य निर्माण अवैध तरीके से हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन बड़े फ़ार्म हाउस के साथ साथ सेकटर-21 सी पार्ट तीन, सेक्टर-44, 45 और 47, हुडा का जिमखाना क्लब, अग्निशमन केंद्र, ग्रीनफील्ड कॉलोनी का एक हिस्सा, कई अन्य कॉलोनी व शिक्षण व अन्य संस्थान आते हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश सभी पर एक समान लागू होता है। इन सभी निर्माणों पर कार्यवाही होनी चाहिए। 

पाराशर ने कहा कि 18 दिसंबर 1992 के बाद अरावली पर कई अवैध शिक्षण संस्थान बने और अरावली के बड़े दायरे पर उन्होंने कब्ज़ा कर लिया। पाराशर ने कहा कि ये सब अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ है और इन सभी पर कार्यवाही होनी चाहिए क्यू कि अरावली पर कब्ज़ा कर ये शिक्षा माफिया लोगों को जमकर ठग रहे हैं। पाराशर ने कहा कि इसी तरह फ़ार्म हॉउस वाले भी अरावली पर अवैध निर्माण कर लाखों रोज कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांत एन्क्लेव के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है और कांत एन्क्लेव मामले में मैं भी सुप्रीम कोर्ट में पार्टी बना हूँ और मे सुप्रीम कोर्ट में ताजा निर्माण के दस्तावेज भी पेश करूंगा। पाराशर ने कहा कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कुछ अधिकारियों को फटकार लग सकती है या उन्हें नोटिस जारी हो सकते हैं जिनके कार्यकाल में अवैध निर्माण और अवैध खनन अब भी जारी हैं।

अरावली चीरहरण, वकील LN पाराशर की शिकायत पर NGT कोर्ट ने हरियाणा सरकार को भेजा नोटिस

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फरीदाबाद: अरावली चीरहरण को लेकर अब एनजीटी ने बड़ा ऐक्शन लिया है। सूरजकुंड के आस पास अरावली हिल्स में हुए अवैध निर्माण के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने  हरियाणा सरकार को नोटिस भेजा है। इस नोटिस की जानकारी एनजीटी ने बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के प्रधान एडवोकेट एल एन पराशर को दी है और उन्हें पत्र लिख कर उनसे भी पूरी जानकारी माँगी है। 

वकील पाराशर ने सितम्बर 2018 को अरावली पर अवैध खनन को लेकर राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री मनोहर लाल सहित मुख्य सचिव हरियाणा और एनजीटी को एक पत्र लिखा था। उस पत्र पर हरियाणा सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की थी जिसके बाद अब एनजीटी ने सरकार ने जबाब माँगा है। 

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पाराशर ने कहा कि उसके बाद भी अरावली पर अवैध खनन और अवैध निर्माण जारी रहे और हाल में मुझे जानकारी मिली कि फरीदाबाद सूरजकुंड रोड पर उज्जवल फ़ार्म हाउस में ब्लास्ट कर पत्थर निकाले गए और वहाँ अवैध निर्माण भी हुए जिसकी शिकायत मैंने कई विभाग के अधिकारियों से की लेकिन फरीदाबाद के अधिकारी कभी कोई कार्यवाही करते ही नहीं जिस कारण मुझे पीएम सीएम से शिकायत करनी पड़ती है। 

पाराशर ने कहा कि अरावली पर जहाँ-जहाँ अवैध खनन और अवैध निर्माण हो रहे हैं मेरे पास उन सबके सबूत हैं और सभी सबूत मैं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के पास भेज रहा हूँ और अरावली के माफियाओं और सम्बंधित अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग करूंगा। 

पराशर ने कहा कि अरावली पर अभी भी जंगल को उजाड़ने का काम जारी है। जहाँ खनन पर उच्चतम न्यायालय से पूर्णत: रोक लगाईं है, किसी तरह के निर्माण पर रोक लगाईं है वहाँ अब भी अवैध रूप से खनन और अवैध निर्माण हो रहे हैं। सब कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। 

पाराशर ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर का एक मात्र जंगल (अरावली हिल्स) जिसका दिल्ली एनसीआर के प्रदूषण को संतुलित करने में अहम योगदान है, उसे बचाने के लिए मैं हर प्रयास करूंगा। उन्होंने कहा की  कि भू-माफिया और बिल्डरों ने प्रशासन से मिलीभगत कर जंगल में अवैध रूप से कटाई और अवैध कब्जा कर फार्म हाउसों का निर्माण करने में लगे हैं। व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है। राजनीतिक संरक्षण के चलते सूरजकुंड रोड पर बने विवाह स्थलों पर बजने वाले कानफोड़ू डीजे साउंड तथा आतिशबाजी से इस वन में रह रहे जंगली जानवरों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। फरीदाबाद की जनता प्रदूषण झेल रही है। लोग बड़ी बड़ी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये सब नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। नेता भूमाफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं। अधिकारी अभी जेबें भर रहे हैं। पाराशर ने कहा कि कई नेताओं के भी हाल में वहां फार्म हॉउस बने हैं। उन्होंने कहा कि एनजीटी को पूरी रिपोर्ट भेज रहा हूँ। 

अफसरों पर भड़के LN पाराशर, शहर में खुलेआम घूम रहे हैं अवैध लोडिंग वाले डंफर, नंबर प्लेट भी गायब

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फरीदाबाद: शहर के भीड़भाड़ वाली सड़कों पर ओवरलोडिंग डम्फरों से कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इन डम्फरों पर बड़े बड़े पत्थर लदे होते हैं जो अगर फिसलकर नीचे गिर गए तो सड़क पर चलने वाले छोटे वाहन चालक घायल हो सकते हैं।

शहर के वरिष्ठ वकील और समाजसेवी LN पराशर ने आज सेक्टर 28 एरिया में एक ऐसे ही डंपर को देखा जिस पर नंबर प्लेट भी गायब थी और पत्थरों की ओवरलोडिंग की गई थी, वकील पाराशर ने अधिकारियों पर भड़कते हुए कहा कि अगर इस डंपर से कोई पत्थर किसी के सिर पर गिर गया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा, डंपर के पीछे नंबर प्लेट भी गायब है अगर यह एक्सीडेंट करके भाग गया तो इसे कैसे पकड़ा जाएगा.

पाराशर ने कहा कि शहर में अवैध खनन ही नहीं ओवरलोडिंग भी जारी है और अवैध खनन कर पत्थर एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाए जा रहे हैं और खनन माफियाओं पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है न ही ओवर लोडिंग करने वालों पर जिस कारण इनके हौसले बढे हुए हैं और ये लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। 

पाराशर ने कहा कि एक दिन पहले  मैंने एक फ़ार्म हाउस की कई तस्वीरें जारी की थीं जहां ब्लास्ट कर पत्थर निकाले गए लेकिन खनन विभाग ने यहाँ भी कोई कार्यवाही नहीं की। 

उन्होंने कहा कि अधिकारी, खनन माफिया मिले हुए हैं जिस कारण लोगों की जान से खिलवाड़ की जा रही है। 

प्रशासन से बोले LN पाराशर, अरावली पर हो रहा अवैध निर्माण, रात में ब्लास्ट करके निकाले जाते हैं पत्थर

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फरीदाबाद: फरीदाबाद: एक तरफ जहाँ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण कल कान्त एन्क्लेव में एक दर्जन से ज्यादा इमारतों को ढहा दिया गया तो दूसरी तरफ अरावली क्षेत्र में निर्माण अब भी जारी हैं।

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बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एल एन पाराशर ने कहा कि फरीदाबाद-सूरजकुंड रोड के पास एक जगह पर रात्रि में ब्लास्ट कर पत्थर निकाले जा रहे हैं और एक बड़ा फ़ार्म हाउस बनाया जा रहा है। पाराशर ने कहा कि मुझे मौके ही कई तस्वीरें मिलीं हैं जहाँ के गड्ढों को देख लगता है कि ये गड्ढे ब्लास्ट से हुए हैं और यहाँ से पत्थर निकाले गए हैं। पराशर ने कहा कि इस फ़ार्म हाउस पर रात्रि-दिन काम चल रहा है जिसके बाहर केके उज्जवल फार्म  लिखा है। यहाँ से करोड़ों के पत्थर निकाल बेंच दिए जा रहे हैं और कई एकड़ पर जमीन को समतल कर एक बड़ा फ़ार्म हॉउस बनाया जा रहा है।

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पाराशर ने कहा कि सभी तस्वीरें मैं सुप्रीम कोर्ट में दिखाऊंगा जहाँ अरावली को लेकर मैंने याचिका दायर की है। पाराशर ने कहा कि यहाँ जो खेल चल रहा है वो किसी बड़े नेता या उसके किसी खास का हो सकता है क्यू कि अरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 1992 के बाद के निर्माण ढहाने के आदेश दिए हैं और यहाँ धड़ल्ले से फ़ार्म हाउस बनाया जा रहा है। खनन हो रहा है। पाराशर ने कहा कि शहर के कई बड़े अधिकारी भी शक के दायरे में हैं जिन्हे कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि मैं मौके पर भी गया था जहाँ मैंने खुद ये निर्माण देखे हैं। पाराशर ने कहा कि अरावली को सरेआम लूटा जा रहा है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी नहीं मानें जा रहे हैं जिसे देख लगता है कि हरियाणा में सरकार और प्रशासन नाम की चीज ही नहीं है। 

उन्होंने कहा कि लगता है हरियाणा सरकार ही सारा खेल करवा रही है तभी सरकार ने पीएलपीए एक्ट में संसोशन करवाने का प्रयास किया था। पाराशर ने कहा कि उनके द्वारा दायर याचिका पर जल्द होने वाली सुनवाई में ये सभी सबूत पेश किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं आरटीआई के माध्यम से पता करूंगा कि ये फ़ार्म हाउस किसका है और जानकारी मिलने पर इसके ऊपर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाने का मामला दर्ज करवाऊंगा। 

अरावली पर कांत एनक्लेव में आज भी गिराए गए कहीं महल

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फरीदाबाद, 2 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनुपालना में जिला प्रशासन ने कांत एन्कलेव में बने निर्मित भवनों को ध्वस्त कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि यह कार्यवाही सोमवार को शुरू की थी। यहां बता दें कि कि सर्वोच्च न्यायलय ने कांत एंक्लेव को पीएलपीए संरक्षित क्षेत्र घोषित कर सभी निर्माण गिराने के आदेश पारित किए थे।

उक्त क्षेत्र में 44 प्लाटों पर 42 निर्माण थे, जिनमें से 31 लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में 31 जुलाई तक स्वयं ही अपने निर्माण गिराने का शपथ पत्र दाखिल किया गया है।  बाकी निमार्णधाराकों के पास 31मार्च 2019 तक का समय था। सोमवार को समय सीमा खत्म होने के साथ ही बाकी के निर्माणों को तोड़ने की कार्यवाही जिला प्रशासन पर पुलिस सुरक्षा के बीच शुरू की गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनुपालना के साथ इस कार्यवाही में कानून व्यवस्‍था को सुनिश्चित करते हुए ‌डिस्ट्रिक मेजिस्ट्रेट अतुल कुमार ने पांच टीमों का गठन करते हुए डयूटी मेजिस्ट्रेट तैनात किए थे। एसटीपी संजीव मान ने बताया कि मंगलवार को   कांत एन्कलेव के निर्माण ढाह दिए गए। अब इस क्षेत्र में केवल वही निर्माण बाकी बचे हैं जिन्होंने अपना शपथ पत्र सुप्रीम कोर्ट में यह कहकर दाखिल किया हुआ है कि वह अपने निर्माण को 31 जुलाई तक स्वयं ही गिरा देंगे।

इस कार्यवाही में ओवरआल इंचार्ज अतिरिक्त उपायुक्त धर्मेद्र सिंह के नेतृत्व में डीसीपी विक्रम कपूर, जितेंद्र दहिया सचिव नगर निगम फरीदाबाद, त्रिलोक चंद एसडीएम बल्लभगढ़, सतबीर मान एसडीएम फरीदाबाद, प्रदीप गोदारा अतिरिक्त आयुक्त नगर निगम व बड़खल एसडीएम बेलिना, एसीपी सहित अधिकारीगण व सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल तैनात रहा।

कान्त एन्क्लेव हो रहा ध्वस्त, वकील LN पाराशर बोले, सभी अरावली के अवैध फार्म हाउसों को भी तोड़ो

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फरीदाबाद: जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान वकील एल एन पाराशर ने कान्त एन्क्लेव ढहाने पर ख़ुशी जताई है, उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि अरावली के जंगल-पहाड़ी एरिया में बने सभी अवैध फ़ार्म हाउसों के खिलाफ भी कर्यवाही की जाए. उन्होंने इस मामले में हरियाणा सरकार के चीफ सेक्रेटरी सहित कई अधिकारियों को पार्टी बनाकर याचिका डाली है.

बता दें कि अरावली पर बने कान्त एन्क्लेव में 1992 के बाद बने निर्माणों को तोड़ने की आज अंतिम तारीख है, 1992 के बाद बने महलों को तोड़ने के लिए प्रशासन अपनी फ़ौज लेकर कान्त एन्क्लेव पर पहुँच गया है, मौके पर सैकड़ों पुलिसकर्मी और सुरक्षाबल मौजूद हैं, जल्द ही तोड़फोड़ की कार्यवाही शुरू हो जाएगी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अरावली पर कान्त एन्क्लेव के अलावा सैकड़ों अवैध फार्म हाउस भी हैं जो 1992 के बाद बने हैं, फरीदाबाद के समाजसेवी और पर्यावरण प्रेमी इन फार्म हाउसों के खिलाफ भी कार्यवाही की मांग कर रहे हैं, वरिष्ठ वकील एल एन पाराशर भी अरावली को बचाने के लिए कई महीनों से संघर्ष कर रहे हैं और उन्होंने हाईकोर्ट में PIL भी डाली है, यही नहीं उन्होंने कान्त एन्क्लेव मामले में पार्टी बनने की अपील भी डाली है.

अरावली के पहाड़ और जंगल फरीदाबाद और एनसीआर को प्रदूषण से बचाते हैं लेकिन बीते कुछ वर्षों में दबंगों, धन्ना सेठों और भूमाफियाओं ने जंगल की जमीन पर कब्जा करके, अवैध तरीके से खरीद-फरोख्त दिखाकर कब्जा कर लिया लेकिन कान्त एन्क्लेव टूटने के बाद इनकी भी बारी आएगी.

हरियाणा सरकार नहीं कर पायी भू-माफियाओं की मदद

वकील पाराशर ने कहा कि हरियाणा सरकार और फरीदाबाद के कुछ अधिकारी इन्हे बचाते रहे लेकिन ज्यादा समय तक इन्हे बचा नहीं सके। पाराशर ने कहा कि अरावली के माफियाओं को बचाने के लिए ही हरियाणा सरकार ने पीएलपीए  ऐक्ट में बदलाव करने का प्रयास किया था ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ठेंगा दिखाया जा सके लेकिन हरियाणा सरकार की नहीं चली और अब कांत एन्क्लेव के निर्माणों को तोडना पड़ा।

पाराशर ने कहा कि 11 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने कांत एन्क्लेव पर फैसला देते हुए कहा था कि कांत एन्क्लेव की जमीन फॉरेस्ट लैंड है। जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की स्पेशल बेंच ने 18 अगस्त 1992 के बाद हुए अवैध निर्माण को ढहाने का आदेश दिया था।  कोर्ट ने कहा है कि सभी निर्माणों को गिराया जाए। जमीन वापस फॉरेस्ट को दी जाए। पाराशर ने कहा कि अरावली पर अब भी अवैध निर्माण जारी हैं और कोर्ट के आदेश को अब भी ठेंगा दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अरावली मामले को लेकर मैंने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दाखिल की है उसमे मैंने हाल के अवैध निर्माणों के बारे में जानकारी दी है और इन निर्माणों को भी जल्द ध्वस्त करने की मांग करूंगा।

पाराशर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सख्त न होता तो अब तक अरावली का नामोनिशान मिट जाता। उन्होंने कहा कि कांत एन्क्लेव मामले में मैंने भी पार्टी बनने की अपील की थी और अब प्रशासन ने जो कार्यवाही की है उससे मैं कुछ हद तक संतुष्ट हूँ। उन्होंने कहा कि अरावली पर अन्य अवैध निर्माण अगर जल्द तोड़ दिए जाएँ तो कोई भी अरावली का चीरहरण करने का प्रयास नहीं करेगा।

जीतेगा न्याय, हारेंगे धन्ना-सेठ, अरावली के कान्त एन्क्लेव को ध्वस्त करने पहुंचा प्रशासन

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फरीदाबाद: अरावली पर बने कान्त एन्क्लेव में 1992 के बाद बने निर्माणों को तोड़ने की आज अंतिम तारीख है, अगर आज इन निर्माणों को ध्वस्त नहीं किया जाएगा तो हरियाणा सरकार पर कंटेम्प का केस लग जाएगा, सरकार ने PL/PA एक्ट में संसोधन करके धन्ना सेठों के महलों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सामने हरियाणा सरकार की एक ना चली.

1992 के बाद बने महलों को तोड़ने के लिए प्रशासन अपनी फ़ौज लेकर कान्त एन्क्लेव पर पहुँच गया है, मौके पर सैकड़ों पुलिसकर्मी और सुरक्षाबल मौजूद हैं, जल्द ही तोड़फोड़ की कार्यवाही शुरू हो जाएगी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अरावली पर कान्त एन्क्लेव के अलावा सैकड़ों अवैध फार्म हाउस भी हैं जो 1992 के बाद बने हैं, फरीदाबाद के समाजसेवी और पर्यावरण प्रेमी इन फार्म हाउसों के खिलाफ भी कार्यवाही की मांग कर रहे हैं, वरिष्ठ वकील एल एन पाराशर भी अरावली को बचाने के लिए कई महीनों से संघर्ष कर रहे हैं और उन्होंने हाईकोर्ट में PIL भी डाली है, यही नहीं उन्होंने कान्त एन्क्लेव मामले में पार्टी बनने की अपील भी डाली है.

अरावली के पहाड़ और जंगल फरीदाबाद और एनसीआर को प्रदूषण से बचाते हैं लेकिन बीते कुछ वर्षों में दबंगों, धन्ना सेठों और भूमाफियाओं ने जंगल की जमीन पर कब्जा करके, अवैध तरीके से खरीद-फरोख्त दिखाकर कब्जा कर लिया लेकिन कान्त एन्क्लेव टूटने के बाद इनकी भी बारी आएगी.

अरावली पर हो रहा कई एकड़ जमीन पर कब्जा, कहांं गायब हो गए चौकीदार: LN पाराशर

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फरीदाबाद: अरावली पर न जाने कितने भूमाफिया बड़े बड़े खेल खेल रहे हैं और कई जगहों पर सैकड़ों एकड़ पहाड़ पर अवैध दीवार बना कब्जा किया जा रहा है, चौकीदार लोग कहां गायब हो गए हैं। ये कहना है बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एल एन पराशर का जिन्होंने शुक्रवार को अरावली का दौरा किया और पाली-सूरजकुंड रोड के पास एक ऐसी दीवार देखी जो काफी लम्बी थी। 

पाराशर ने कहा कि ये दीवार जितनी लम्बी है उसे देख लगता है कि कोई बड़ा माफिया 100 एकड़ से ज्यादा जमीन पर कब्ज़ा कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये दीवार चुपचाप बनाई जा रही है और पहाड़ से पत्थर तोड़कर बनाई जा रही है।

पाराशर ने कहा कि 100 एकड़ से ज्यादा जमीन पर कब्ज़ा कर अरबों रूपये का खेल खेला जा रहा है और वन विभाग के अधिकारियों को अब तक ये दीवार नहीं दिखी। उन्होंने खनन विभाग के अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस विभाग के अधिकारी सिर्फ ग्रामीणों पर भारी पड़ते दिखते हैं बड़े माफियाओं पर ये कोई कार्यवाही नहीं करते। पाराशर ने कहा कि बिना खनन विभाग और वन विभाग की मिलीभगत से इतनी लम्बी दीवार नहीं बन सकती है। उन्होंने कहा कि मुझे कुछ लोगों ने बताया कि अरावली पर सैकड़ों एकड़ जमीन पर कोई बड़ा माफिया कब्ज़ा कर रहा है जिसके बाद मैंने शुक्रवार को मौके का जायजा लिया जहां सच में ऐसा हो रहा है और ये दीवार हाल में ही खड़ी की गई है।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों ने ही हरियाणा सरकार से मिलकर पीएलपीए ऐक्ट बदलवाना चाहा ताकि ये खुलकर अरावली को लूट सकें और वहां बड़े बड़े होटल और फ़ार्म हाउस बनवा सकें। उन्होंने कहा कि अरावली के पहाड़ों पर पेड़ों की कटाई और निर्माण जारी हैं और लगता है कि एक बड़ा खेल खेला गया है और सरकार ने बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए बड़ा घोटाला किया है। उन्होंने कहा कि इन माफियाओं को लूट ला लाइसेंस किसने दिया ये जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि जिस निर्माण की तस्वीरें और वीडियो मैं शुक्रवार को जारी कर रहा हूँ ये उन निर्माणों से अलग है जिनकी तस्वीरें मैंने पहले जारी की थीं।

उन्होंने कहा कि इस निर्माण की शिकायत मैं सूरजकुंड थाने में करूंगा क्यू कि मुख्य वन विभाग, खनन विभाग और नगर निगम पर भरोषा नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल सुप्रीम कोर्ट ने अरावली मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर अरावली हिल के जंगल वाले इलाके में कुछ भी करने की कोशिश की, तो वह गंभीर परेशानी में आ जाएगी लेकिन हरियाणा सरकार पर इस चेतावनी का कोई असर नहीं दिख रहा है। भूमाफियाओं का खेल जारी है।

अरावली पर खनन माफियाओं की मांद में घुस गए LN पाराशर, दुम-दबाकर भागे पत्थरचोर, एक FIR दर्ज

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फरीदाबाद: अरावली के पत्थर चोरों पर सख्त से सख्त कार्यवाही न हुई तो ये पत्थर माफिया पूरी अरावली बेंचकर खा जाएंगे और फरीदाबाद में पहाड़ क्षेत्र का नामोनिशान नहीं रह जाएगा। ये कहना है बार एसोशिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट एल एन पाराशर का जिन्होंने मंगलवार अरावली का दौरा किया और कई जगहों पर पत्थर माफियाओं को पत्थर चुराते सरेआम अपने कैमरे पर कैद किया। 

पाराशर ने बताया कि मैंने अखबारों में पढ़ा कि सोमवार खनन माफियाओं ने खनन विभाग के अधिकारी गुलशन कुमार की टीम पर हमला किया है। पाराशर ने कहा कि अखबारों में लिखा है कि अवैध खनन हो रहा था। पहाड़ से पत्थर चोरी किये जा रहे थे। इन पत्थरों को ट्रक में भरकर ले जाया जा रहा था और जब खनन विभाग के अधिकारी वहाँ पहुंचे तो माफियाओं ने उनसे हांथापाई की जो मुझे अच्छा नहीं लगा और मंगलवार मैं कई घंटे अरावली पर घूमता रहा और कई जगहों पर अवैध खनन होते हुए देखा। उन्होंने कहा कि मैं पहले बता चुका हूँ कि मैं किसी माफिया से नहीं डरता इसलिए मैं अरावली का दौरा किया।

पाराशर ने कहा कि मैं लगभग हर रोज अरावली पर जाता हूँ और कहीं अवैध निर्माण तो कहीं अवैध खनन होते देखता हूँ और मीडिया को तस्वीरें भेजता हूँ। उन्होंने कहा कि अरावली के पत्थर चोरों का पर्दाफाश मैं जोखिम लेकर करता हूँ क्यू कि जब वो खनन विभाग के अधिकारियों पर हमला कर सकते हैं तो किसी पर भी कर सकते हैं। पाराशर ने कहा कि अरावली के लुटेरे कोई आम नहीं बहुत खास हैं तभी ये अधिकारियों तक को नहीं छोड़ते। पाराशर ने कहा कि मुझे खनन विभाग के अधिकारियों पर अब भी शक है क्यू कि मंगलवार भी मैंने अवैध खनन देखा जबकि सोमवार जो हमला हुआ था उसकी खबर मीडिया या ऑनलाइन मीडिया के दिखाने के बाद सूरजकुंड थाने एफआईआर दर्ज करवाई गई।

पाराशर ने बताया कि सूरजकुंड थाने में खनन विभाग के इंस्पेक्टर गुलशन कुमार ने जो मामला दर्ज करवाया है उसकी एफआईआर नंबर 155 है जो अनंगपुर के जगबीर एवं मनीष गुरुकुल के विजय के ऊपर धारा 186/188/189/353/34 IPC & 4.1 के तहत दर्ज करवाई गई है। पाराशर ने कहा कि इस एफआईआर से ये साबित होता है कि मेरा कोई भी आरोप गलत नहीं होता। अरावली पर अवैध खनन जारी है। पत्थरों की लूट जारी है। उन्होंने कहा कि मैं मंगलवार के दौरे की तस्वीरें मीडिया तक भेज रहा हूँ जहाँ अब भी पत्थर चोर बेख़ौफ़ पत्थर चोरी कर रहे हैं।

अरावली के भू माफियाओं को नहीं है सुप्रीम कोर्ट का डर, ये देखो अवैध निर्माण: LN पाराशर

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फरीदाबाद: फरीदाबाद जिले में अरावली पर हुए अवैध खनन से एक दो नहीं सौ से ज्यादा जगहों पर लगभग पांच सौ मीटर लम्बे और सौ फ़ीट गहरे गड्ढे बन गए हैं और कई स्थानों पर इतना ज्यादा गहरा खनन किया गया है जहां से पाताल से पानी निकल रहा है। दुःख की बात ये है कि अरावली पर अवैध खनन अब भी जारी है। ये कहना है बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट एल एन पाराशर का जिन्होंने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि शनिवार को मैंने अरावली के कई क्षेत्रो का दौरा किया और खूनी झील जिसे अरावली पर कई लम्बे चौंड़े गड्ढे देखे। 

पाराशर ने कहा कि 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को लताड़ा था लेकिन हरियाणा सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ा और 9 मार्च को मैंने अरावली पर अवैध निर्माण होते हुए देखा जहाँ मजदूर भी काम कर रहे थे। पाराशर ने कहा कि कुछ माफिया एक दो नहीं कई कई एकड़ पर अरावली पर बाउंड्री बना रहे हैं जिसे देख लगा कि सच में हरियाणा सरकार माफियाओं के हांथों बिक गई है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ा अपने माफियाओं को अवैध निर्माण और अवैध खनन के लिए खुली छूट दे दी है।

पाराशर ने कहा कि अरावली पहाड़ियां लुप्त होने पर सुप्रीम कोर्ट कई बार नाराजगी जता चुका है लेकिन हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी की परवाह ही नहीं कर रही है। 

पराशर ने कहा कि शुक्रवार 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार को चेतावनी दिया था और कहा था अगर अरावली हिल के जंगल वाले इलाके में कुछ भी करने की कोशिश की, तो वह गंभीर परेशानी में आ जाएगी। लेकिन हरियाणा सरकार पर 8 मार्च के आदेश का भी कोई असर नहीं पड़ा और अरावली पर धड़ाधड़ निर्माण जारी है। पराशर ने कहा मैंने शनिवार के दौरे में जितने भी अवैध निर्माण और अवैध खनन देखे हैं उन सबकी तस्वीरें और वीडियो जिला अधिकारी फरीदाबाद और मुख्य सचिव हरियाणा को भेजूंगा। लेकिन लगता नहीं है कि डीसी फरीदाबाद या हरियाणा सरकार माफियाओं पर लगाम लगाएगी इसलिए ये सभी सबूत सुप्रीम कोर्ट भी ले जाऊँगा ताकि वहाँ हरियाणा सरकार की पोल खोल सकूं। पाराशर ने कहा कि हरियाणा सरकार ने इन्ही माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए पंजाब भूमि परिरक्षण संशोधन विधेयक 2019 पास कर अरावली संरक्षित क्षेत्र में अवैध निर्माण शुरू करवाया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी लेकिन अब भी अवैध निर्माण जारी हैं। 

पाराशर ने कहा कि हरियाणा सरकार को माफिया प्यारे हैं जनता नहीं और यही कारण है कि फरीदाबाद देश के सबसे प्रदूषित शहरों में कई बार अव्वल स्थान पा चुका है।

अरावली कांड पर सुप्रीम कोर्ट ने आज भी खट्टर सरकार को फटकारा, LN पाराशर बोले, इनका यही इलाज

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फरीदाबाद: हरियाणा सरकार ने अरावली को लेकर जो किया एक तरफ़ा किया और सरकार ने जनता के बारे में ज़रा सा भी नहीं सोंचा। सरकार के कारण ही फरीदाबाद और गुरुग्राम की जनता  जहरीला प्रदूषण झेल रही है। ये विचार बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एल एन पाराशर ने शुक्रवार सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद व्यक्त किये।

पाराशर ने कहा कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को जमकर लताड़ा है। पाराशर के मुताबिक़ अरावली क्षेत्र में निर्माण की इजाजत देने वाले संशोधित कानून के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकारते हुए कहा कि अरावली हिल्स या फॉरेस्ट एरिया को अगर कोई नुकसान हुआ तो हरियाणा सरकार गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। 

पराशर ने बताया कि शक्रवार को हरियाणा सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को  पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन (हरियाणा संशोधन अधिनियम 2019) एक्ट (पीएलपीए)  की कॉपी सौंपी गई है और  सुप्रीम कोर्ट अप्रैल के तीसरे हफ्ते में में मामले की सुनवाई करेगा। आपको बता दें कि पाराशर ने भी अरावली बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका फ़ाइल की है। शुक्रवार कांत एन्क्लेव और हरियाणा सरकार द्वारा पास किये गए बिल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई थी। जस्टिस अरुण मिश्रा और दीपक गुप्ता की पीठ में हरियाणा राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह अदालत को संतुष्ट करेंगे कि पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम (पीएलपीए), 1900 में संशोधन किसी की मदद करने के लिए नहीं किया गया था।

बेंच ने मेहता से कहा। हमें अरावली की चिंता है। हम आपको बता रहे हैं कि यदि आप अरावली या कांत एन्क्लेव (जहां शीर्ष अदालत ने वन क्षेत्र में अवैध निर्माणों के कारण इमारतों को गिराने का आदेश दिया था) के साथ कुछ भी कर रहे हैं तो आप मुसीबत में होंगे। यदि आप जंगल से कुछ भी कर रहे हैं, तो आप मुसीबत में होंगे। पराशर ने कहा कि अरावली दो दशकों से लगातार उजड़ रही है लेकिन अब कोई इसे नहीं उजाड़ पायेगा। पाराशर ने कहा कि उन्होंने हरियाणा सरकार से अरावली के बारे में कई बार शिकायत की लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। मुझे हाल में  चला कि हरियाणा सरकार के दिल में खोट था जब सरकार ने पीएलपीए एक्ट में बदलाव का फैसला किया था। पाराशर ने कहा कि सरकार समझती थी कि अरावली को आसानी से माफियाओं को बेंच देगी लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है ऊँट पहाड़ के नीचे आया है। उसे अपनी औकात का पता चल जाएगा।