Followers

Showing posts with label India News. Show all posts

रेल रोको प्रदर्शन: राकेश टिकैत ट्रेन में फंसे लोगों को बँटवाएंगे पानी, दूध, फल और लस्सी

kisan-neta-rakesh-tikait-told-about-rail-roko-pradarshan

फरीदाबाद, 18 फरवरी: कृषि कानून का विरोध कर रहे आंदोलनकारी किसानों ने आज ट्रेन रोको प्रदर्शन करने का फैसला किया है, ट्रेन रोककर ट्रैक को जाम कर दिया जाएगा, इस कदम से ट्रेन में लोग फंस सकते हैं और पानी, भोजन की दिक्कत हो सकती है.

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि हमारा प्रदर्शन 12 बजे से 3-4 बजे तक होगा और शांतिपूर्ण होगा। ट्रेन में फंसे लोगों को हम पानी, दूध, फल और लस्सी बँटवाएंगे और उन्हें अपनी समस्या बताएंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार ने भी रेलवे स्टेशन और ट्रैक पर सख्ती बढ़ा दी है, पुलिस को उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने के आदेश दिए गए हैं. 

फरीदाबाद में 3500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, सभी रेलवे स्टेशन और फाटक पर पुलिस बल तैनात है. हंगामा करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा। 

बर्ड-फ़्लू बीमारी ने मचाया कोहराम, चिकन खाने से डरने लगे लोग

bird-flue-in-faridabad-haryana-india-in-january-2021-news

फरीदाबाद, 5 जनवरी: बर्ड फ़्लू बीमारी ने चिकन इंडस्ट्री में कोहराम मचा दिया है, चिकन इंडस्ट्री काफी फायदे का सौदा है और इसमें मुनाफ़ा भी बहुत है, सर्दी में लोग चिकन खाना बहुत पसंद करते हैं, चिकन बेचने वाले लोग एक एक किलो में 150-200 रुपये कमाते हैं लेकिन बर्ड फ़्लू बीमारी ने लोगों की पसंद में डर पैदा कर दिया है, बर्ड फ़्लू एक खतरनाक बीमारी इसलिए इंसान लोग भी चिकन खाने से डरने लगे हैं. जल्द ही चिकन की डिमांड कम हो सकती है.

देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू का खौफ है। राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल के बाद अब हरियाणा में भी बर्ड फ्लू  की दहशत देखी जा रही है। हरियाणा के वरवाला के आस-पास कई मुर्गी फार्मों में एक लाख से ज्यादा मुर्गियों और चूजों की मौत की खबर है।  काफी दिनों से ये मौतें हो रहीं हैं जिसके बाद अब पंचकूला जिला प्रशासन हरकत में आया है।  राज्य के पशुपालन विभाग ने प्रभावित फार्मो में पाई गई मृत मुर्गियां के 80 सैम्पल इकट्ठे करके जांच के लिए जालंधर की रीजनल डिजीज डायग्नोस्टिक लैबोरेट्री में भेजे गए हैं। 

इसके पहले कई राज्यों में अचानक पक्षियों की मौत से हड़कंप मचा था। कई राज्यों में अलर्ट  भी जारी किया गया है क्यू कि पूरा देश फिलहाल अब भी कोरोना से जूझ रहा है और वैक्सीन आने के बाद लोगो ने राहत की सांस ली लेकिन अब बर्ड फ़्लू नाम की नई मुसीबत पैर पसार रही है। 

फरीदाबाद में भी बर्ड फ़्लू का असर दिखने लगा है. कई लोगों ने बताया कि कुछ दिन चिकन ना खाना ही बेहतर है क्योंकि कोरोना-बीमारी की वजह से अस्पतालों में वैसे ही जगह नहीं है, ऐसे में बर्ड फ़्लू हो गया तो इलाज कराने कहाँ जाएंगे।

दिलजीत दोसांझ पर भड़कीं कंगना राणावत, ठंड में किसानों को रोड पर बिठाकर खुद विदेश में मार रहे मौज

kangna-ranawat-attack-diljit-dosanjh-enjoying-in-foreign

फरीदाबाद, 5 जनवरी: बॉलीवुड में सबसे चर्चित अभिनेत्री कंगला राणावत अब सिख एक्टर दिलजीत दोसांझ पर भड़क गयी हैं.

बात दरअसल ये है क़ि दिलजीत दोसांझ ने किसान आंदोलन में 1 करोड़ रुपये का दान दिया ताकि आंदोलन में खाने पीने की दिक्कत ना हो. दिलजीत खुद भी दिल्ली के सिंघु बॉर्डर गए कर वहां पर किसानों का समर्थन किया।

अब दिलजीत दोसांझ विदेश में मौज मार रहे हैं और बर्फबारी का मजा ले रहे हैं, उन्होंने खुद ही ट्विटर पर फोटो शेयर की है. देखिये - 

दिलजीत दोसांझ एक तरफ किसान  आंदोलन के लिए 1 करोड़ रुपये का दान करते हैं ताकि यह आंदोलन लंबा खींचे और किसान ठंड में रोड पर बैठे रहें, वहीं दूसरी तरफ वह खुद विदेश में मौज कर रहे हैं, यह देखकर कंगलना राणावत भड़क गयीं।

कंगना राणावत ने ट्विटर पर लिखा -  वाह भाई, देश में आग लगाकर, किसानों को सड़क पर बिठाकर लोकल क्रन्तिकारी विदेश में ठण्ड का मजा ले रहे हैं, वाह, इसको कहते हैं लोकल क्रान्ति।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिलजीत दोसांझ पर इनकम टैक्स की नजर पड़ चुकी है, इस बात की जांच की जाएगी क़ि उन पास पैसे कहाँ से आ रहे हैं कि वह किसान आंदोलन में करोड़ों रुपये की मदद कर रहे हैं. कहीं इसके लिए विदश से तो नहीं जुड़े हैं. 

आंदोलनकारी किसानों को मनाने के लिए भाजपा ने अब चलाया राहुल_गाँधी_बाण, दुनिया हैरान

rahul-gandhi-video-viral-by-bjp-to-explain-farm-act-2020

फरीदाबाद, 27 दिसंबर: पंजाब के लाखों किसान दिल्ली में आंदोलन कर रहे हैं, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भी कुछ किसान आंदोलन में शामिल हैं, इन नाराज किसानों को मनाने के लिए केंद्र सरकार काफी कोशिश कर रही है लेकिन कांग्रेस पार्टी आंदोलनकारी का पूरा समर्थन कर रही है, राहुल गाँधी तो किसानों को और भड़का रहे हैं क्योंकि किसान आंदोलन के जरिये कांग्रेस सत्ता में वापसी का सपना देख रही है.

कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक चाल को समझकर भाजपा ने अब राहुल_गाँधी_बाण चलाया है. राहुल गाँधी की एक पुरानी वीडियो वायरल की जा रही है जिसमें राहुल गाँधी खुद कृषि कानूनों में संसोधन करने और किसानों को फैक्ट्री में डायरेक्ट माल बेचने का विकल्प उपलब्ध कराने की वकालत कर रहे हैं.

यह वीडियो लोकसभा का है जब राहुल गाँधी अमेठी के सांसद थे, राहुल गाँधी ने कहा कि मैं यूपी के दौरे पर गया था तो एक किसान मुझसे कहता है - फैक्ट्रियां किसानों से दूर हैं, अगर किसान डायरेक्ट फैक्ट्री में अपना माल बेचेगा तो बीच में से दलाल हट जाएंगे और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। देखिये ये वीडियो -  


आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार ने वर्तमान कृषि कानूनों में भी यही संसोधन किया है, Essential Food Commodities Act में संसोधन किया है जिसमें स्टोरेज की लिमिट हटा दी है, जब कंपनियों को स्टोरेज की परमीशन दी जाएगी तभी तो कम्पनियाँ राहुल गाँधी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर फैक्ट्रियां लगाएंगी और किसानों से डायरेक्ट अनाज-सब्जी ख़रीदेंगी। यही काम मोदी सरकार ने किया है जिसका कांग्रेस खुद विरोध कर रही है, राहुल गाँधी भी विरोध कर रहे हैं जबकि वह खुद इसकी वकालत करते थे.

मौत सामने देखकर भी इस्लाम स्वीकार नहीं किया, PM Modi ने कहा, हमारा देश आपका कर्जदार है वीरों

pm-narendra-modi-tribute-4-sahib-jaade-martyl-guru-mata-gujri

फरीदाबाद, 27 दिसंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज धर्मरक्षा के लिए मुगलों से लड़कर शहीद हुए गुरुगोबिंद सिंह जी के 4 साहिबजादों और उनकी माँ माता गुजरी को नमन किया।

मोदी ने कहा कि हम इनकी कुर्बानी के कर्जदार हैं क्योंकि इन्होने धर्म और देशरक्षा के लिए अपनी कुर्बानी दी, मौत देखकर भी इन्होने अपनी आस्था को नहीं बदला। देश इनकी कुर्बानी को कभी नहीं भूलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि गुरु तेगबहादुर जिन्हें इस्लाम ना कबूलने पर मुग़ल शासक औरंगजेब ने सर कलम करवा दिया था, उनकी कुर्बानी को भी देश नहीं भूलेगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गुरुगोबिंद सिंह के दो साहिबजादों जुझर सिंह और अजीत सिंह ने मुगलों से लड़कर और उनके छक्के छुड़ाकर अपनी शहादत दी थी, उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 14 - 15 साल के आस पास थी लेकिन दोनों ने योद्धाओं की तरह मुगलों से युद्ध लड़ा और उनकी छक्के छुड़ा दिए. दोनों की शहादत 22-23 दिसंबर के आस पास हुई थी.

मुगलों की क्रूरता इतने पर ही कम नहीं हुई, इसके बाद उन्होंने गुरुगोबिंद सिंह जी के दोनों छोटे बेटों जोरावर सिंह और फ़तेह सिंह जिनकी उम्र 9 साल और 5 साल थी. मुगलों ने उसने कहा - अगर तुम इस्लाम कबूल लोगे तो हम तुम्हें जाने देंगे, बच्चों ने इस्लाम कबूलने से इंकार कर दिया और मौत का रास्ता चुना। इसके बाद मुगलों ने उन्हें जिन्दा दीवार में चुनवा दिया। यह घटना 27 दिसंबर को हुई थी, इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह जी की माँ गुजरी जिन्हें माता गुजरी कहा जाता था, उन्होंने भी धर्मरक्षा के लिए अपनी शहादत दे दी.

गुरु गोबिंद सिंह जी इतने महान थे कि जब उन्हें अपने चारों बेटों की शहादत का समाचार मिला तो उन्होंने अपना दुःख अपने सीने में ही दफ़न कर लिया, जब उनकी पत्नी ने उनसे अपने बेटों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा - चार मुए तो क्या भया, जीवत कई हजार। मतलब तुम्हारे 4 बेटे मर गए तो क्या हुआ, कई हजार बेटे और जिन्दा हैं. सच में ऐसे महान इंसान और उनके वीर शहीद बेटों और वीर माँ की कुर्बानी यह देश कभी नहीं भूल सकता।

कृषि मंत्री ने उड़ाया राहुल गाँधी का मजाक, बोले, इनकी बात तो कांग्रेसी भी सीरियसली नहीं लेते

krishi-mantri-narendra-singh-tomer-make-fun-of-rahul-gandhi

फरीदाबाद, 24 दिसंबर: केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की हंसी उड़ाई है, उन्होंने राहुल गाँधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गाँधी की बातों को कांग्रेसी भी गंभीरता से नहीं लेते तो किसान उनकी बात क्या मानेंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए राहुल गाँधी और अन्य कांग्रेसी नेता आज महामहिम राष्ट्रपति से मिले। 

बाद में मीडिया को सम्बोधित करते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि तीनों कृषि कानून किसान विरोधी हैं इसलिए हमने राष्ट्रपति से तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग की है.

उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन तब तक नहीं ख़त्म करेंगे जब तक प्रधानमंत्री तीनों कानूनों को वापस नहीं ले लेते, किसान नहीं मानेंगे और ये लोग अपनी घरों को नहीं जाएंगे।

उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों से देश को बहुत नुकसान होगा, किसानों मजदूरों का भी नुकसान होगा, मैं जो बोलता हूँ सही बोलता हूँ, महामारी के बारे में भी मैंने जो बोला था वो सही हुआ.

राहुल गाँधी के बयान पर जब कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से प्रतिक्रिया मांगी गयी तो उन्होंने राहुल गाँधी का मजाक उड़ा दिया, उन्होंने कहा कि  राहुल गाँधी की बातों को गंभीरता से कोई नहीं लेता, खुद कांग्रेसी भी उनकी बातों को गंभीरता से  नहीं लेते, कृषि कानून किसानों के लिए बढ़िया हैं, इस मौके पर कई राज्यों के किसानों ने कृषि कानून  को लेकर मोदी सरकार को समर्थन भी दिया।

राहुल गांधी का ऐलान, जब तक कृषि कानून वापस नहीं होंगे, रोड से नहीं उठेंगे किसान

नई दिल्ली, 24 दिसंबर: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आज किसान आंदोलन के मुद्दे पर भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की.

महामहिम राष्ट्रपति से मुलाकात करने के बाद राहुल गांधी ने मीडिया को संबोधित करते हुए ऐलान किया कि जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं होंगे दिल्ली रोड जाम कर के बैठे आंदोलनकारी किसान नहीं उठेंगे.

राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सोच रहे होंगे कुछ दिनों बाद किसान उठकर अपने घर चले जाएंगे जबकि ऐसा नहीं होगा, यह किसान तब तक रोड पर बैठे रहेंगे जब तक तीनों  कृषि बिल वापस नहीं होंगे.

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा किसानों के साथ है और रहेगी, हमने राष्ट्रपति से मिलकर तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की अपील की है.

देश की अर्थव्यवस्था तबाह करने में सफल हो रहे आंदोलनकारी किसान, अबतक 70 हजार करोड़ का नुकसान

economy-loss-due-to-kisan-andolan-news

नई दिल्ली: कृषि कानून के विरोध में आंदोलनकारी किसान करीब 20 दिन से धरना दे रहे हैं और कई रोड जाम करके बैठे हैं, इन किसानों ने प्लान बनाया है कि रोड जाम करके देश की अर्थव्यवस्था को इतना तबाह कर देंगे कि सरकार कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर हो जाएगी।

आंदोलनकारी किसानों का प्लान काफी कामयाब भी होता दिख रहा है, ASSOCIAM की रिपोर्ट के मुताबिक़ किसान आंदोलन से रोजाना 3500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, इस हिसाब से अब तक करीब 70 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.

अगर किसानों ने इसी तरह से रोड जाम किये रखा तो जल्द ही नुकसान का आंकड़ा लाखों करोड़ के पास पहुँच जाएगा और आंदोलनकारी किसान देश की अर्थव्यवस्था तबाह करने के अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे, हालाँकि आंदोलनकारी किसान भी अपनी जिद से मजबूर हैं, उन्हें पहले ऐसा लग रहा था कि उनके विरोध के चलते केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए बिवश हो जाएगी लेकिन केंद्र सरकार भी अपनी जिद छोड़ने को तैयार नहीं है.

केंद्र सरकार सोच रही है कि ये आंदोलनकारी किसान दो चार दिन धरना देकर टाइम पास करके चले जाएंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है, आंदोलनकारी किसान कह रहे हैं कि हमारे पास 6 महीनें का पूरा राशन है इसलिए हमें कोई दिक्कत नहीं है, हम  जरूरत पड़ेगी तो 6 महीनें तक भी रोड पर बैठने को तैयार हैं.

ASSOCIAM का कहना है कि इस आंदोलन का जल्द ही समाधान ना निकाला गया तो देश की अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हो जाएगा और देश के लिए यह ठीक नहीं होगा। अब देखते हैं कि इस समस्या का समाधान कब तक निकल पाता है.

किसान बोले, अब कई दिनों तक मंडी के बाहर नहीं खड़ा करना पड़ेगा ट्रेक्टर, Farm Act से बंद होगा शोषण

farmer-happy-support-farm-act-of-modi-sarkar-news

नई दिल्ली, 14 दिसंबर: हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडू, तेलंगाना व अन्य राज्यों के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से भेंट कर उन्हें भारत सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कुछ संशोधन के साथ लागू रखने की मांग करते हुए ज्ञापन दिया।

किसानों ने की 4 संसोधन की मांग

  • आधुनिक तकनीक इस देश के किसानों को कैसे मिले, इसकी समुचित व्यवस्था की जाय
  • नवीनतम तकनीकों को इस देश में लाने हेतु आयात शुल्क 2 से 5 पर्सेंट रखा जाय
  • कृषि से सम्बंधित कृषि उत्पादक सामाग्री पर जीएसटी न्यूनतम रखा जाय 
  • कीटनाशक पर जीएसटी तुरंत 18 पर्सेंट से घटाकर 5 पर्सेंट किया जाय या पूर्ण समाप्त किया जाय
आल इंडिया किसान कोआर्डिनेशन कमेटी की अगुवाई में किसान संगठनों ने केंद्र सरकार ने मीटिंग की, इस कानून के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद किया, किसानों का अब तक शोषण होता था लेकिन इस कानून से किसानों को कई विकल्प मिलेगा।

किसानों ने यह भी कहा क़ि पुरानी मंडी सिस्टम ने किसानों को बहुत परेशानी होती थी, किसानों को कई कई दिनों तक अपना ट्रेक्टर मंडी के बाहर खड़ा करना पड़ता था, फसल बेचने के लिए अपनी बारी का इन्तजार करना पड़ता था, कई बार तो लोग अपना ट्रेक्टर और ट्रक लेकर वापस लौट जाते थे और फिर से किराया देकर मंडी लाते थे और फिर से इन्तजार करते थे लेकिन अब किसानों को कई विकल्प मिलेंगे, अगर एक मंडी में उनकी फसल नहीं बिकेगी तो दूसरी मंडी में घुस जाएंगे। कुछ खरीदार उनके खेत में ही फसल खरीदने पहुँच जाएंगे जिसकी वजह से किसानों का किराया भाड़ा और समय बचेगा।

किसानों का पूरा बयान और मांग इस लेटर में लिखा गया है जिसे आप पढ़ सकते हैं.

farm-act-news


farm-act-news-hindi

कई राज्यों के किसान संगठन पहुंचे दिल्ली, कृषि मंत्री से मिलकर बोले, रद्द ना करें कृषि कानून

10-states-farmer-supported-farm-act-meet-agriculture-minister

नई दिल्ली, 14 दिसंबर: कृषि कानून को लेकर केंद्र सरकार को किसानों का समर्थन बढ़ता ही जा रहा है, कल भी उत्तराखंड के किसान संगठनों ने कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से मिलकर नए कृषि कानून के जरिये किसानों का जीवन बदलने के लिए धन्यवाद दिया था.

आज किसानों का समर्थन और बढ़ गया, करीब 10 राज्यों के किसान संघटनों ने कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से मुलाक़ात की और कृषि कानून के लिए उनका आभार जताया, किसान नेताओं ने यह भी कहा कि दबाव में यह कानून रद्द करने की भूल ना करें क्योंकि यह कानून किसानों की जिंदगी में बदलाव करेगा। इस कानून से किसानों को कई विकल्प मिलेंगे और उनकी कमाई में इजाफा होगा।

कृषि मंत्री से मिलने वाले किसानों में उत्तर प्रदेश, केरला, तमिलनाडु, तेलंगाना, बिहार और हरियाणा के किसान संगठन शामिल थे, इसकी अगुवाई आल इंडिया किसान कोआर्डिनेशन कमेटी ने की. 

काजू-बादाम और पिज्जा का लंगर छोड़कर कृषि कानून विरोधी किसान करेंगें 8 घंटे की भूख हड़ताल

protesting-farmers-one-day-hunger-strike-against-farm-act

फरीदाबाद, 13 दिसंबर: पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ जिलों से दिल्ली आये कृषि कानून विरोधी किसानों के धरने में काजू-बादाम, पिज्जा और बिरयानी का लंगर चल रहा था लेकिन अब एक दिन के लिए यह सब बंद हो जाएगा।

कृषि कानून विरोधी किसानों ने ऐलान किया है कि वह कल 8 घंटे की भूख हड़ताल करेंगे, इस दौरान ये लोग भोजन नहीं करेंगे। आन्दोलनकारी किसानों ने एक मत से यह फैसला लिया है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली जाम कर बैठे किसानों के लंगर में काजू-बादाम और पिज्जा का लंगर रोजाना चल रहा है जिसकी वीडियो नीचे दी गयी है -

   


आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसानों के दो ग्रुप बन गए हैं, एक धड़ा मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन कर रहा है तो दूसरा धड़ा कृषि कानूनों का विरोध कर रहा है और दिल्ली की सड़कों को जाम करके धरने पर बैठा हुआ है.

आज कृषि कानून समर्थक किसानों ने उत्तराखंड से दिल्ली पहुंचकर सरकार का समर्थन किया, किसानों ने कृषि मंत्री से कहा कि यह कानून किसानों के हक़ में है इसलिए इसे विल्कुल भी खारिज ना किया जाय.

किसानों का समर्थन पाकर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर खुश हुए और किसानों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आप चिंता ना करें, सरकार इन कानून को विल्कुल भी वापस नहीं लेगी। यह कानून किसानों की लाइफ में बदलाव करेगा।

धरने से हुए नुकसान की भरपाई जनता से ही करेगी सरकार, एक महीने में डेढ़ रुपये बढ़ा पेट्रोल का दाम

petrol-diesel-price-increased-due-to-kisan-andolan-news

फरीदाबाद, 13 दिसंबर: कृषि कानून के विरोध में पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ दिनों के किसान, आढ़ती एवं दलाल आंदोलन कर रहे हैं, इस आंदोलन का समर्थन करीब 22 विपक्षी पार्टियां भी कर रही हैं और आंदोलन में इन पार्टियों के कार्यकर्ता भी किसान बनकर शामिल हुए हैं.

आंदोलनकारियों का मकसद है कि दिल्ली की कई सड़कों और बॉर्डर को जाम करके सरकार को इतना आर्थिक नुकसान पहुंचा दिया जाय कि सरकार कृषि कानूनों को वापस ले ले.

आंदोलनकारियों का मकसद कुछ कामयाब भी होता दिख रहा है, करीब 15 दिन से चल रहे धरने से सरकार को काफी नुकसान हुआ है लेकिन इस नुकसान की भरपाई आम जनता को ही करनी पड़ रही है. पेट्रोल कंपनियों ने पिछले 15 दिनों में पेट्रोल के दाम डेढ़ रुपये तक बढ़ा दिए.

एक तरह से कहें तो आम जनता को इस आंदोलन से काफी नुकसान हो रहा है, सरकारों का क्या है, जनता से ही टैक्स लेकर सरकारें देश चलाती है, जब सरकारी खजाने को नुकसान होता है तो सरकार  जनता पर टैक्स का बोझ और लाद देती है.

31 दिसंबर को पेट्रोल का दाम 80.63 रुपये था लेकिन आज पेट्रोल का दाम 82.13 रुपये फरीदाबाद में है, दिल्ली में एक रुपये और मंहगा है और दिल्ली की जनता को मंहगाई की मार और अधिक झेलनी पड़ रही है.

अगर यह आंदोलन कुछ दिन और जारी रहा और आंदोलनकारियों की मंशा के मुताबिक़ तीन चार महीनें आंदोलन जारी रहा तो पेट्रोल डीजल के दाम 100 रुपये तक जा सकते हैं, एक प्रमुख विपक्षी पार्टी ने भी इसकी तरफ इशारा किया है. अगर ऐसा हुआ तो जनता पर मंहगाई की मार और अधिक पड़ेगी।
 

राहुल गाँधी ने पंजाब के किसानों को बताया सबसे अमीर

rahul-gandhi-told-punjab-kisan-richer-in-india

नई दिल्ली: कृषि कानून विरोधी आंदोलन का राहुल गाँधी जोर शोर से समर्थन कर रहे हैं, आंदोलन पर बैठे किसानों का लगातार हौसला बढ़ा रहे हैं ताकि वे लम्बे समय तक मोदी सरकार के खिलाफ सड़कों को जाम करे रखें।

राहुल गाँधी ने एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने पंजाब के किसानों को मालदार यानी अमीर बताया है, यह आंकड़ा 2013 का है लेकिन राहुल गाँधी ने इसे अब शेयर किया है.

ट्वीट में राहुल गाँधी ने लिखा - किसान चाहता है कि उसकी आय पंजाब के किसान जितनी हो जाए। मोदी सरकार चाहती है कि देश के सब किसानों की आय बिहार के किसान जितनी हो जाए।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पंजाब के किसान दिल्ली आकर कृषि कानून के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं, दूसरी तरह राहुल गाँधी इन्ह्ने ही पूरे देश में सबसे अमीर बता रहे हैं. लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब ये किसान इतनी अमीर हैं तो आंदोलन करने की जरूरत क्या है.

अगर पंजाब के किसानों की अमीरी पर गौर किया जाय तो इसकी वजह ये है कि पंजाब में क्षेत्रफल के हिसाब से जनसँख्या कम है और किसानों के हिस्से में अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक जमीन आयी है, दूसरे तरीके से कहें तो पंजाब के अधिकतर किसान जमींदार हैं और करोड़पति हैं, जबकि बिहार और उत्तर प्रदेश की जनसँख्या के हिसाब से क्षेत्रफल कम है और किसानों के हिस्से में कम खेत हैं इसलिए आमदनी भी सीमित है.

किसान आंदोलन को फायदे की नजर से क्यों देख रही है मोदी सरकार, क्यों नहीं रुकवा रही धरना, पढ़ें

kisan-andolan-against-farm-law-in-india

फरीदाबाद, 7 दिसंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक किसानों की आमदनी डबल करने का वादा किया है और इसी सपने को पूरा करने के लिए वह कृषि कानून लाये हैं ताकि सरकारी मंडियों के अलावा प्राइवेट मंडियां भी खुलें और किसानों को फसल बेचने के कई विकल्प मिलें, जहाँ पर किसानों को अधिक दाम मिलेगा वहां पर वे फसल बेच सकेंगे।

किसान संगठन मोदी सरकार के कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं और इसे वापस लेने की मांग हो रही है, पिछले 11 दिनों से दिल्ली में इकठ्ठे होकर किसान संगठन आंदोलन कर रहे हैं, दिल्ली के अधिकतर रास्ते जाम हैं लेकिन किसानों के धरने से केंद्र सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है जबकि पहले की ख़बरों में आपने पढ़ा होगा कि एक दो दिन के जाम से ही सरकारें झुक जाती हैं.

केंद्र सरकार को क्यों नहीं पड़ रहा आंदोलन से फर्क

अगर कृषि कानून को छोड़ दें तो किसान आंदोलन से केंद्र सरकार के पिछले कामों का प्रचार भी हो रहा है, यह प्रचार पूरी दुनिया में हो रहा है क्योंकि इस आंदोलन पर पूरी दुनिया की नजर है.

अगर आप ध्यान दें तो किसान कह रहे हैं कि कृषि कानून से MSP ख़त्म हो जाएगी और सरकारी मंडियां भी ख़त्म हो जाएंगी, मतलब किसान यह मान रहे हैं कि केंद्र सरकार वर्तमान में किसानों की फसल पर उचित MSP दे रही है और किसानों को यह MSP खोने का डर है.

इसी तरह से किसान सरकारी मंडियों को ख़त्म होने की आशंका जता रहे हैं मतलब वे इशारों इशारों में यह भी मान रहे हैं क़ि उन्हें सरकारी मंडी व्यवस्था पर भरोसा है.

इससे पहले आप सुनते रहे होंगे कि किसानों को MSP नहीं मिल रही है, किसान आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन इस आंदोलन में यह सुनायी दे रहा है कि MSP मिल रही है और किसान MSP आगे ना मिलने को लेकर आशंकित हैं और कृषि बिलों का विरोध कर रहे हैं, इसमें से आधे संगठन सिर्फ MSP जारी रखने का लिखित में आश्वासन चाहते हैं और केंद्र सरकार भी इसके लिए तैयार दिख रही है.

MSP का कानून बनाने पर केंद्र से खुश हो जाएंगे किसान

मोदी सरकार को अभी चार साल बचे हैं, बहुमत की सरकार है इसलिए गिरने का कोई डर नहीं है, MSP पर अभी तक कोई कानून नहीं है, अगर केंद्र सरकार MSP का कानून बना देगी तो आधे किसान संगठन धरना ख़त्म कर देंगे, पंजाब के कुछ किसान संगठन कृषि कानून को ख़त्म करने की मांग कर रहे हैं, यह मांग शायद ही मानी जाएगी क्योंकि मोदी सरकार ने किसानों को डबल इनकम का वादा किया है, अब किसान ये तो कहेंगे नहीं कि हमें डबल इनकम नहीं चाहिए, ये कानून वापस ले लो, अगर कह भी देंगे तो मोदी सरकार भी कहेगी कि आप इसी में खुश है तो हम कानून ख़त्म कर रहे हैं. इससे भी मोदी सरकार का प्रचार ही होगा, कम से कम दुनिया यह तो देखेगी कि मोदी सरकार के काम से किसान खुश हैं सिर्फ कृषि कानून का विरोध हो रहा था.

समझे क़ि नहीं

उपरोक्त बातें पढ़कर आप समझ गए होंगे कि केंद्र सरकार को आंदोलन से फर्क क्यों नहीं पड़ रहा है, केंद्र के अलावा भाजपा का भी किसान आंदोलन से फायदा हो रहा है, दिल्ली के अधिकतर बॉर्डर बंद हैं, और डीटी रोड जाम होने से पंजाब की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी, दिल्ली और पंजाब में मंहगाई बढ़ेगी, जनता परेशान होगी और यहाँ की सरकारों के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी पैदा होगी, इन राज्यों में भाजपा को वापसी करने में आसानी होगी। इसलिए धरना 6 महीनें तक भी चले तो केंद्र सरकार और भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।

झूठ की, लूट की, सूट-बूट की सरकार है: राहुल गाँधी

rahul-gandhi-attack-modi-sarkar-loot-soot-boot-sarkar

फरीदाबाद, 2 दिसंबर: वायनाड के कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने इशारों इशारों में केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है, उन्होंने एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा - कहा- किसान की आय दुगनी होगी। किया- ‘मित्रों’ की आय हुई चौगुनी और किसान की होगी आधी। झूठ की, लूट की, सूट-बूट की सरकार। 

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे पर भी सवाल उठाते हुए लिखा -  अन्नदाता सड़कों-मैदानों में धरना दे रहे हैं, और ‘झूठ’ टीवी पर भाषण! किसान की मेहनत का हम सब पर क़र्ज़ है। ये क़र्ज़ उन्हें न्याय और हक़ देकर ही उतरेगा, न कि उन्हें दुत्कार कर, लाठियाँ मारकर और आंसू गैस चलाकर। जागिए, अहंकार की कुर्सी से उतरकर सोचिए और किसान का अधिकार दीजिए।

सिख समाज से विशेष मुहब्बत करते हैं PM MODI, किताब हुई लांच

pm-narendra-modi-sarkar-special-relation-with-sikhs-book

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का सिखों से खास लगाव है,  इस बात को साबित करने के लिए एक किताब लिखी गयी है.

गुरुपर्व पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस किताब का विमोचन किया और प्रधानमंत्री मोदी ने सिख समाज के लिए क्या क्या काम किये हैं इस बात का बखान किया। 

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट किया - गुरु पूरब के अवसर पर आज गुरु नानक जी के संदेशों पर आधारित, सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार का सिख समुदाय के साथ अटूट सम्बन्ध' का आज केन्द्रीय मंत्री श्री @HardeepSPuri  की उपस्थिति में विमोचन किया।

यह किताब तीन भाषाओँ में लिखी गयी है - हिन्दू, अंग्रेजी और पंजाबी। किताब काफी पहले से लिखकर तैयार थी लेकिन गुरुपर्व पर इसे लांच करने का कार्यक्रम बनाया गया था.

किसान ठंड से परेशान ना हों, इसलिए हमने 3 के बजाय आज ही बातचीत का फैसला किया है: कृषि मंत्री

kisan-andolan-update-meeting-with-kendra-sarkar

नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज किसानों से बातचीत करने का फैसला किया है, किसानों को आमंत्रण भेज दिया है, करीब 30 किसान संगठन केंद्र सरकार से बातचीत करेंगे, विज्ञान भवन में यह मीटिंग होगी।

अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक़ मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंडी राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और अन्य सम्बंधित लोग शामिल होंगे। दोपहर 3 बजे मीटिंग शुरू होगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें क़ि पहले यह मीटिंग 3 दिसंबर को तय की गयी थी लेकिन कृषि मंत्री ने कहा कि दिल्ली में ठण्ड बढ़ती जा रही है, किसान ठंढ में परेशान ना हो इसलिए हमने 3 दिसंबर का इन्तजार करने के बजाय आज ही मीटिंग करने और बातचीत करने का फैसला किया है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें क़ि बातचीत के लिए करीब 30 किसान संगठनों को बुलाया गया है जबकि कुछ संगठनों का कहना है क़ि हमें फोन करके नहीं बुलाया गया है. हालाँकि मीटिंग में अन्य किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं.

PM मोदी ने बताया कृषि कानून का लाभ, किसानों का होगा कायाकल्प, दलालों-मुफ्तखोरों का खेल ख़त्म

krishi-farm-law-benefit-told-by-pm-narendra-modi-news

नई दिल्ली: कृषि कानूनी के खिलाफ कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून के लाभ बताये हैं, उन्होंने कहा कि कुछ लोग भ्रम फैलाकर किसानों को आशंकित कर रहे हैं और उसी आशंका को आधार बनाकर विरोध किया जा रहा है, सच ये है कि कृषि कानून ऐतिहासिक है और किसानों की जिंदगी में बदलाव लाएगा।

उन्होंने कहा क़ि मंडी की व्यवस्था ख़त्म होने का भ्रम फैलाया जा रहा है लेकिन खत्म नहीं होगी क्योंकि हमने मंडी की व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए बहुत खर्चा किया है.

उन्होंने कहा क़ि MSP की व्यवस्था ख़त्म होने का भ्रम फैलाया जा रहा है जबकि MSP की व्यवस्था जारी रहेगी क्योंकि अगर हमें MSP ख़त्म करना होता तो हम स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू ही क्यों करते, हमने पिछले पांच वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपये MSP के लिए किसानों को दिया है, कांग्रेस सरकार ने  पांच साल में सिर्फ डेढ़ लाख करोड़ रुपये किसानों को MSP पर दिया है.

उन्होंने बताया क़ि नए कृषि कानून से किसानों को अपनी फसल खेत में ही बेचने की वैकल्पिक व्यवस्था मिलेगी, खरीदार लोग किसानों के खेत में ही फसल खरीदने पहुँच जाएंगे और किसानों को अधिक मुनाफ़ा भी मिलेगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसानों को फसल बेचने के लिए मंडी में जाना पड़ता है, किराए पर वाहन लेना पड़ता है और ट्रांसपोर्ट का अतिरिक्त खर्चा करना पड़ता है, अगर दाम अच्छे नहीं मिलते तो आने पौने दाम में फसल बेचकर वापस लौटना पड़ता है लेकिन नए कृषि कानून के बाद प्राइवेट कम्पनियाँ अपनी मंडी बनाएंगी और कई लोग किसानों की फसल खरीदने खुद खेतों में पहुँच जाएंगे और अपने वाहन से किसानों की फसल ले जाएंगे। ऐसे में किसानों का ट्रांसपोर्ट का खर्चा भी बचेगा और समय भी बचेगा।

नए कृषि कानून से आढ़तियों और दलालों का किसानों को ब्लैकमेल करने का खेल बंद हो जाएगा क्योंकि जब निवेशक किसानों के खेत में ही फसल उठा लेंगे तो आढ़तियों के पास कम लोग आएँगे, ये लोग किसानों की फसल कम दामों में खरीदकर उसपर बैठे बिठाए काफी अधिक मुनाफा कमाते हैं इसलिए ये लोग परेशान हैं और कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं.
 

पंजाब से दिल्ली आये आंदोलनकारियों को इशारों इशारों में PM MODI ने बताया विपक्ष का प्यादा, पढ़ें

pm-narendra-modi-exposed-fake-kisan-protest-news

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून का विरोध करने वालों को इशारों इशारों में विपक्ष का प्यादा बता दिया है और यह संकेत भी दे दिया है कि वह इनके दबाव में आने वाले नहीं हैं. इनके पास चाहे 4 महीनें का राशन हो या 1 साल का, वह इनके आगे नहीं झुकेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा - पहले सरकार का कोई फैसला अगर किसी को पसंद नहीं आता था तो उसका विरोध होता था। लेकिन अब विरोध का आधार फैसला नहीं बल्कि आशंकाओं को बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक कृषि सुधारों के मामले में भी यही खेल खेला जा रहा है। ये वही लोग हैं जिन्होंने दशकों तक किसानों के साथ लगातार छल किया है। 

उन्होंने कहा - आप ही बताइए कि अगर मंडियों और MSP को ही हटाना था, तो हम इनको इतनी ताकत क्यों देते ? इन पर इतना निवेश ही क्यों करते? हमारी सरकार तो मंडियों को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा क़ि कांग्रेस सरकार ने 6 वर्षों में किसानों को सिर्फ डेढ़ लाख करोड़ रुपये फसल खरीद के लिए दिए गए जबकि हमारी सरकार ने तीन लाख करोड़ रुपये MSP पर फसल खरीदकर किसानों को दिए हैं, यानी कांग्रेस से दो गुना अधिक। देखिये वीडियो - 

माननीय सुप्रीम कोर्ट जिंदाबाद, तनाशाही सरकार को बड़ा झटका, अर्नब गोस्वामी को मिली जमानत

arnab-goswami-bail-from-supreme-court-news-in-hindi

नई दिल्ली: माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से न्याय को जिन्दा कर दिया, अर्नब गोस्वामी को अंतरिम जमानत दी है, उन्हें तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया है और मुंबई पुलिस कमिश्नर को आर्डर फॉलो  करने का आदेश दिया है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को जमानत नहीं दी थी जिसके बाद उनके वकील हरीश सॉल्वे ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दी थी जिसे माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर किया और अर्नब गोस्वामी के साथ साथ अन्य दो आरोपियों को नाइक आत्महत्या केस में जमानत दे दी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मुंबई पुलिस ने 2018 में यह केस बंद कर दिया था और कोर्ट में समरी रिपोर्ट भी दाखिल कर दी थी जिसे मजिस्ट्रेट ने मंजूर भी कर लिया था लेकिन अर्नब गोस्वामी को सबक सिखाने के लिए मुंबई पुलिस ने बिना मजिस्ट्रेट की मंजूरी के यह केस फिर से खोल दिया और 20 - 30 हथियारबंद पुलिस कर्मियों के साथ मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने अर्नब गोस्वामी को अचानक सुबह 6 बजे उनके घर पहुंचकर गिरफ्तार कर लिया।

अर्नब गोस्वामी की रिहाई के बाद रिपब्लिक टीवी के समर्थक खुश हैं और मिठाइयां बांटी जा रही हैं, माननीय सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया जा रहा है.