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झूठ की, लूट की, सूट-बूट की सरकार है: राहुल गाँधी

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फरीदाबाद, 2 दिसंबर: वायनाड के कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने इशारों इशारों में केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है, उन्होंने एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा - कहा- किसान की आय दुगनी होगी। किया- ‘मित्रों’ की आय हुई चौगुनी और किसान की होगी आधी। झूठ की, लूट की, सूट-बूट की सरकार। 

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे पर भी सवाल उठाते हुए लिखा -  अन्नदाता सड़कों-मैदानों में धरना दे रहे हैं, और ‘झूठ’ टीवी पर भाषण! किसान की मेहनत का हम सब पर क़र्ज़ है। ये क़र्ज़ उन्हें न्याय और हक़ देकर ही उतरेगा, न कि उन्हें दुत्कार कर, लाठियाँ मारकर और आंसू गैस चलाकर। जागिए, अहंकार की कुर्सी से उतरकर सोचिए और किसान का अधिकार दीजिए।

सिख समाज से विशेष मुहब्बत करते हैं PM MODI, किताब हुई लांच

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का सिखों से खास लगाव है,  इस बात को साबित करने के लिए एक किताब लिखी गयी है.

गुरुपर्व पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस किताब का विमोचन किया और प्रधानमंत्री मोदी ने सिख समाज के लिए क्या क्या काम किये हैं इस बात का बखान किया। 

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट किया - गुरु पूरब के अवसर पर आज गुरु नानक जी के संदेशों पर आधारित, सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार का सिख समुदाय के साथ अटूट सम्बन्ध' का आज केन्द्रीय मंत्री श्री @HardeepSPuri  की उपस्थिति में विमोचन किया।

यह किताब तीन भाषाओँ में लिखी गयी है - हिन्दू, अंग्रेजी और पंजाबी। किताब काफी पहले से लिखकर तैयार थी लेकिन गुरुपर्व पर इसे लांच करने का कार्यक्रम बनाया गया था.

किसान ठंड से परेशान ना हों, इसलिए हमने 3 के बजाय आज ही बातचीत का फैसला किया है: कृषि मंत्री

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नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज किसानों से बातचीत करने का फैसला किया है, किसानों को आमंत्रण भेज दिया है, करीब 30 किसान संगठन केंद्र सरकार से बातचीत करेंगे, विज्ञान भवन में यह मीटिंग होगी।

अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक़ मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंडी राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और अन्य सम्बंधित लोग शामिल होंगे। दोपहर 3 बजे मीटिंग शुरू होगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें क़ि पहले यह मीटिंग 3 दिसंबर को तय की गयी थी लेकिन कृषि मंत्री ने कहा कि दिल्ली में ठण्ड बढ़ती जा रही है, किसान ठंढ में परेशान ना हो इसलिए हमने 3 दिसंबर का इन्तजार करने के बजाय आज ही मीटिंग करने और बातचीत करने का फैसला किया है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें क़ि बातचीत के लिए करीब 30 किसान संगठनों को बुलाया गया है जबकि कुछ संगठनों का कहना है क़ि हमें फोन करके नहीं बुलाया गया है. हालाँकि मीटिंग में अन्य किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं.

PM मोदी ने बताया कृषि कानून का लाभ, किसानों का होगा कायाकल्प, दलालों-मुफ्तखोरों का खेल ख़त्म

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नई दिल्ली: कृषि कानूनी के खिलाफ कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून के लाभ बताये हैं, उन्होंने कहा कि कुछ लोग भ्रम फैलाकर किसानों को आशंकित कर रहे हैं और उसी आशंका को आधार बनाकर विरोध किया जा रहा है, सच ये है कि कृषि कानून ऐतिहासिक है और किसानों की जिंदगी में बदलाव लाएगा।

उन्होंने कहा क़ि मंडी की व्यवस्था ख़त्म होने का भ्रम फैलाया जा रहा है लेकिन खत्म नहीं होगी क्योंकि हमने मंडी की व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए बहुत खर्चा किया है.

उन्होंने कहा क़ि MSP की व्यवस्था ख़त्म होने का भ्रम फैलाया जा रहा है जबकि MSP की व्यवस्था जारी रहेगी क्योंकि अगर हमें MSP ख़त्म करना होता तो हम स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू ही क्यों करते, हमने पिछले पांच वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपये MSP के लिए किसानों को दिया है, कांग्रेस सरकार ने  पांच साल में सिर्फ डेढ़ लाख करोड़ रुपये किसानों को MSP पर दिया है.

उन्होंने बताया क़ि नए कृषि कानून से किसानों को अपनी फसल खेत में ही बेचने की वैकल्पिक व्यवस्था मिलेगी, खरीदार लोग किसानों के खेत में ही फसल खरीदने पहुँच जाएंगे और किसानों को अधिक मुनाफ़ा भी मिलेगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसानों को फसल बेचने के लिए मंडी में जाना पड़ता है, किराए पर वाहन लेना पड़ता है और ट्रांसपोर्ट का अतिरिक्त खर्चा करना पड़ता है, अगर दाम अच्छे नहीं मिलते तो आने पौने दाम में फसल बेचकर वापस लौटना पड़ता है लेकिन नए कृषि कानून के बाद प्राइवेट कम्पनियाँ अपनी मंडी बनाएंगी और कई लोग किसानों की फसल खरीदने खुद खेतों में पहुँच जाएंगे और अपने वाहन से किसानों की फसल ले जाएंगे। ऐसे में किसानों का ट्रांसपोर्ट का खर्चा भी बचेगा और समय भी बचेगा।

नए कृषि कानून से आढ़तियों और दलालों का किसानों को ब्लैकमेल करने का खेल बंद हो जाएगा क्योंकि जब निवेशक किसानों के खेत में ही फसल उठा लेंगे तो आढ़तियों के पास कम लोग आएँगे, ये लोग किसानों की फसल कम दामों में खरीदकर उसपर बैठे बिठाए काफी अधिक मुनाफा कमाते हैं इसलिए ये लोग परेशान हैं और कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं.
 

पंजाब से दिल्ली आये आंदोलनकारियों को इशारों इशारों में PM MODI ने बताया विपक्ष का प्यादा, पढ़ें

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून का विरोध करने वालों को इशारों इशारों में विपक्ष का प्यादा बता दिया है और यह संकेत भी दे दिया है कि वह इनके दबाव में आने वाले नहीं हैं. इनके पास चाहे 4 महीनें का राशन हो या 1 साल का, वह इनके आगे नहीं झुकेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा - पहले सरकार का कोई फैसला अगर किसी को पसंद नहीं आता था तो उसका विरोध होता था। लेकिन अब विरोध का आधार फैसला नहीं बल्कि आशंकाओं को बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक कृषि सुधारों के मामले में भी यही खेल खेला जा रहा है। ये वही लोग हैं जिन्होंने दशकों तक किसानों के साथ लगातार छल किया है। 

उन्होंने कहा - आप ही बताइए कि अगर मंडियों और MSP को ही हटाना था, तो हम इनको इतनी ताकत क्यों देते ? इन पर इतना निवेश ही क्यों करते? हमारी सरकार तो मंडियों को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा क़ि कांग्रेस सरकार ने 6 वर्षों में किसानों को सिर्फ डेढ़ लाख करोड़ रुपये फसल खरीद के लिए दिए गए जबकि हमारी सरकार ने तीन लाख करोड़ रुपये MSP पर फसल खरीदकर किसानों को दिए हैं, यानी कांग्रेस से दो गुना अधिक। देखिये वीडियो - 

माननीय सुप्रीम कोर्ट जिंदाबाद, तनाशाही सरकार को बड़ा झटका, अर्नब गोस्वामी को मिली जमानत

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नई दिल्ली: माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से न्याय को जिन्दा कर दिया, अर्नब गोस्वामी को अंतरिम जमानत दी है, उन्हें तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया है और मुंबई पुलिस कमिश्नर को आर्डर फॉलो  करने का आदेश दिया है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को जमानत नहीं दी थी जिसके बाद उनके वकील हरीश सॉल्वे ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दी थी जिसे माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर किया और अर्नब गोस्वामी के साथ साथ अन्य दो आरोपियों को नाइक आत्महत्या केस में जमानत दे दी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मुंबई पुलिस ने 2018 में यह केस बंद कर दिया था और कोर्ट में समरी रिपोर्ट भी दाखिल कर दी थी जिसे मजिस्ट्रेट ने मंजूर भी कर लिया था लेकिन अर्नब गोस्वामी को सबक सिखाने के लिए मुंबई पुलिस ने बिना मजिस्ट्रेट की मंजूरी के यह केस फिर से खोल दिया और 20 - 30 हथियारबंद पुलिस कर्मियों के साथ मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने अर्नब गोस्वामी को अचानक सुबह 6 बजे उनके घर पहुंचकर गिरफ्तार कर लिया।

अर्नब गोस्वामी की रिहाई के बाद रिपब्लिक टीवी के समर्थक खुश हैं और मिठाइयां बांटी जा रही हैं, माननीय सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया जा रहा है.

लॉकडाउन चला गया लेकिन कोरोना वायरस नहीं: PM नरेंद्र मोदी

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फरीदाबाद, 20 अक्टूबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र के नाम सम्बोधन में देश की जनता को सन्देश दिया, उन्होंने कहा क़ि लॉकडाउन ख़त्म हुआ है लेकिन कोरोना नहीं, इसलिए आगे भी सावधानी बरतते रहें और अपने परिवार का ख्याल रखें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि त्योहारों का सीजन चल रहा है, आर्थिक गतिविधियां भी चालू हो चुकी हैं, लोग भीड़ भाड़ वाले इलाकों में भी जाने लगे है, लॉकडाउन ख़त्म हो गया है लेकिन कोरोना वायरस ख़त्म नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा क़ि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते रहें, बाहर जाएं तो मास्क जरूर लगाकर रखें, हमें हालात बिगड़ने नहीं देना है, कई देशों ने लापरवाही की लेकिन वहां पर संक्रमण फिर से तेज हो गया.

उन्होंने कहा क़ि भारत में रिकवरी रेट सभी देशों से अच्छा है, टेस्टिंग की रफ़्तार भी अच्छी हो गयी है, हमारे वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने में लगे हैं, जब तक दवाई ना बन जाए, ढिलाई ना बरतें, दवाई बन जाएगी तो हर भारतवासी तक पहुंचाई जाएगी।

इकोनॉमी: राहुल गाँधी ने PM नरेंद्र मोदी को दी थोड़ा राहत

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नई दिल्ली, 12 अक्टूबर: आपने देखा होगा कि पिछले साल 2019 के मई महीनें में भारी बहुमत के साथ मोदी की दोबारा से सरकार बनी थी, सब कुछ सही चल रहा था लेकिन अचानक मार्च महीनें में कोरोना वायरस आ गया, उससे डरकर देश में लॉकडाउन लगा दिया गया और देखते ही देखते अर्थव्यवस्था तबाही के रास्ते पर चल पड़ी.

राहुल गाँधी ने शुरुआत में लॉक डाउन का समर्थन किया था, उन्होंने कहा था कि अगर सरकार ने एक्शन नहीं लिया तो सूनामी आ जाएगी, विपक्ष के दबाव में मोदी सरकार ने कड़ा फैसला लिया और लॉकडाउन करके देश को लॉक कर दिया।

दो तीन महीनें बाद जब लॉकडाउन की वजह से देश की अर्थव्यवस्था कमजोर होने लगी, लोगों का पलायन होने लगा, रोजगार ख़त्म होने लगे, लोग परेशान होने लगे तो कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना लिया और नरेंद्र मोदी को सभी समस्याओं का जिम्मेदार बताया जाने लगा. कांग्रेस ने यह कभी नहीं कहा कि कोरोना वायरस से फैली महामारी की वजह से देश का ऐसा हाल हुआ है.

आज राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को थोड़ा राहत दी है, उन्होंने अर्थव्यवस्था विखरने के लिए मोदी के अलावा कोविड को भी जिम्मेदार ठहराया है. हालाँकि उन्होंने राज्यों को केंद्र द्वारा कम फंड देने पर सवाल भी दागा है.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा - केंद्र ने राज्यों को GST रेवन्यू देने का भरोसा दिया, कोविड और PM की वजह से अर्थव्यवस्था बिखर गयी. PM ने 1.4 लाख करोड़ का कॉर्पोरेट को टैक्स माफ़ किया, अपने लिए 8400 करोड़ रुपये में २ प्लेन खरीदे, केंद्र के पास राज्यों को देने के लिए पैसे नहीं हैं, वित्त मंत्री राज्यों को लोन लेने के लिए कह रही हैं. आपके सीएम मोदी के लिए अपना भविष्य क्यों गिरवी रख रहे हैं?

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने अचानक छोड़ी दुनिया

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फरीदाबाद, 8 अक्टूबर: भारत  सरकार में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने अचानक दुनिया छोड़ दी है, उनके बेटे और सांसद चिराग पासवान ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रामविलास पासवान मोदी सरकार में केंद्रीय फूड डिस्ट्रीब्यूशन और कंज्यूमर अफेयर्स मंत्री थे और उन्होंने अन्य सरकारों में भी मंत्री पदों पर काम किया हुआ है. 

रामविलास पासवान ने बिहार चुनाव से पहले अचानक दुनिया छोड़ दी लेकिन अब पता चला है कि वह लंबी बीमारी से जूझ रहे थे इसीलिए वह राजनीतिक रूप से काफी समय से एक्टिव नहीं थे और अपनी पार्टी की जिम्मेदारी चिराग पासवान के कंधों पर डाल दी थी.

पुलिस कमिश्नर परमबीर भड़ाना के खिलाफ क्रिमिनल डेफ़मेशन केस करेंगे रिपब्लिक TV चीफ अर्नब गोस्वामी

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फरीदाबाद, 8 अक्टूबर: फरीदाबाद में जन्में परमबीर सिंह भड़ाना मुंबई के पुलिस कमिश्नर हैं, आज उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके रिपब्लिक टीवी पर TRP रेटिंग से छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं, जिसके खिलाफ अर्नब गोस्वामी ने बयान जारी किया है और मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर भड़ाना के खिलाफ क्रिमिनल डेफ़मेशन केस फाइल करने का फैसला किया है.

अर्नब गोस्वामी ने कहा कि BRC ने अपनी शिकायत में रिपब्लिक टीवी का नाम नहीं लिया है ऐसे में परमबीर सिंह ने झूठ क्यों बोला और हमें बदनाम करने का काम किया है. यह सब सोची समझी साजिश के तहत किया गया है.

अर्नब गोस्वामी ने कहा कि हम सुशांत राजपूत के लिए लड़ रहे हैं इसलिए मुंबई पुलिस हमें रोकना चाहती है, जब पालघर के साधू मारे गए थे तो हमने महाराष्ट्र पुलिस के खिलाफ सवाल उठाया था, इसलिए ये हमें रोकना चाहते हैं, हमने हाथरस में दंगाई कांग्रेसी नेता का स्टिंग किया और इनकी पोल खोल दी इसलिए ये हमें रोकना चाहते हैं.

अर्नब गोस्वामी ने कहा कि ये लोग हमारी पत्रकारिता से डरे हुए हैं इसलिए हमें रोकना चाहते हैं लेकिन ना तो हम सुशांत राजपूत की रिपोर्टिंग करने से रुकेंगे और ना ही हाथरस की सच्चाई दिखाने से डरेंगे।

अर्नब गोस्वामी ने कहा कि मुंबई पुलिस की गिद्ध मीडिया बहुत तारीफ कर रही है, मैं जेल जाने से नहीं डरता, मैं पैदल जेल जाऊँगा, क्या कर लोगे, मैं तुमसे डरता नहीं हूँ. मैंने अपनी मेहनत से चैनल खड़ा किया है, आप मेरा चैनल नहीं बंद कर सकते।

हाथरस: लड़की से मेरी दोस्ती थी, हम मिलते थे, इसीलिए उसके भाई-माँ ने मिलकर मार दिया: आरोपी संदीप

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फरीदाबाद, 8 अक्टूबर: हाथरस केस ने नया मोड़ ले लिया है, आरोपी संदीप और पीड़िता के बीच प्रेम संबंधों का खुलासा हुआ है, काल डेटल में इसकी पुष्टि भी हो चुकी है जिसमें दोनों के बीच सैकड़ों बार बातचीत हुई है.

अब आरोपी संदीप और अन्य तीन आरोपियों ने जेल से एक चिट्ठी भेजी है जिसमें संदीप ने कहा है कि उसकी पीड़िता के साथ दोस्ती थी, कभी कभी मुलाकत होती थी और फोन पर बातचीत होती थी, घटना के लिए वह पीड़िता से मिला था, उसके भाई और माँ ने दोनों को देखा, उसके बाद आरोपी संदीप वापस अपने घर चला गया लेकिन लड़की के भाई संदीप और लड़की की माँ ने उसे मारा पीटा।

आरोपी संदीप ने बताया कि मैंने पीड़िता को नहीं मारा, उसके भाई और माँ ने मारा और हमें झूठा फंसा दिया, हम चारों निर्दोष हैं, इस मामले की जांच करके हमारे साथ न्याय किया जाय.

आरोपियों ने यह चिट्ठी हाथरस के एसपी के नाम लिखी है, यूपी सरकार ने पहले से ही SIT गठित की है, अब आरोपियों की यह चिट्ठी भी जांच में शामिल की जाएगी। आप भी पढ़ें यह चिट्ठी - 

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पीड़िता सभी वीडियो में संदीप का ही नाम ले रही है हालाँकि यह नहीं पता चल पाया है क़ि उसने अपने भाई संदीप का नाम लिया है या आरोपी संदीप का नाम लिया है, दोनों का नाम संदीप है, पहले लोगों को यह नहीं पता था इसलिए आरोपी संदीप पर लगे आरोपों को सच मान लिया गया लेकिन जब लोगों को पता चला कि लड़की के भाई का नाम भी संदीप है, तब से लोगों को यह मामला डाउटफुल लगने लगा है.

हाथरस केस, तीन मीडिया चैनलों के बीच शुरू हुई महाजंग, पढ़ें क्या है वजह

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हाथरस: हाथरस मामला अब करवट बदल रहा है, अब मीडिया चैनलों ने इसे TRP का जरिया बना लिया है और तीन चार न्यूज़ चैनलों में आपस में ही महाजंग शुरू हो गयी है, तीन चैनलों तो खुलेआम एक दूसरे के खिलाफ लाइव शो में या सोशल मीडिया पर बोल रहे हैं हालाँकि ये चैनल एक दूसरे का नाम लेकर बुलाने के बजाय कोड वर्ड में बुलाते हैं.

रिपब्लिक भारत

रिपब्लिक चैनल सुशांत मामले को उठाकर TRP के मामले में नंबर 1 बन गया और कई वर्षों तक पहले नंबर पर रहा आजतक काफी पीछे छूट गया. अब दोनों चैनलों के बीच काफी फासला है और गोटी रिपब्लिक भारत के चीफ अर्नब गोस्वामी के हाथों में है, अर्नब गोस्वामी जिस रास्ते पर चलते हैं, आजतक भी उसी रास्ते पर चल पड़ता है इसीलिए लगातार पिछड़ता जा रहा है.

आजतक

TRP की रेस में रिपब्लिक भारत से पिछड़ने के बाद आजतक को हाथरस का मुद्दा मिल गया, आजतक ने इस मुद्दे को अपनी TRP बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी का दौरा करवाया गया, उनका वीडियो वायरल किया गया. आज तक के पत्रकारों ने खुद पीड़ितों को फोन करके ऐसा वीडियो, वैसा वीडियो बनाने को कहा और ऐसा बयान, वैसा बयान देने को बोला ताकि यह मुद्दा लंबा खिंचे और आजतक की TRP फिर से पहले जैसी हो जाए.

ज़ी न्यूज़ 

ज़ी न्यूज़ TRP के मामले में काफी पीछे हो गया है और उसके निशाने पर आजतक और रिपब्लिक भारत है. सुधीर चौधरी तो इशारों इशारों में रिपब्लिक को शोर मचाने वाला, नौटंकी दिखाने वाला चौनल बताते हैं, असल बात ये है कि रिपब्लिक टीवी की वजह से ही ज़ी न्यूज़ काफी पीछे हो गया.

रिपब्लिक भारत ने बदल दिया गेम

आज तक ने जो प्लान किया था वैसा कुछ भी नहीं हुआ. रिपब्लिक भारत ने हाथरस मामले में दो तीन दिनों तक ख़ामोशी बनाए रखी और अचानक सुशांत मामले को छोड़कर हाथरस मुद्दे को पकड़ लिया लेकिन उसने अलग रास्ता चुना।

रिपब्लिक भारत ने कांग्रेस पार्टी को टारगेट किया और उसके बाद आजतक को टारगेट करना शुरू कर दिया, आपको बता दें कि रिपब्लिक भारत आजतक का नाम नहीं लेता बल्कि 'तक वाले' बताता है.

पहले आजतक सिर्फ पीड़ित परिवार की ही ख़बरें दिखा रहा था लेकिन आज तक की इस रिपोर्टिंग से दूसरा पक्ष नाराज हो गया, क्योंकि इस रिपोर्टिंग के जरिये ऐसा सन्देश दिया जा रहा था कि सवर्ण समुदाय बहुत बड़ा विलेन है और ये लोग लड़कियों की इज्जत नहीं करते।

रिपब्लिक भारत ने इसे महसूस किया और दूसरे पक्ष की रिपोर्टिंग करनी शुरू की जिसकी वजह से बाजी अचानक पलट गयी. दूसरे पक्ष ने बताया कि यह मामला हॉनर किलिंग का हो सकता है क्योंकि पीड़िता और आरोपी संदीप के बीच में कई वर्षों से प्रेम सम्बन्ध थे, जब दोनों की काल डिटेल निकलवाई गयी तो पता चला कि दोनों आपस में कई कई घंटों तक बात चीत करते हैं और सैकड़ों कॉल हो चुकी है.

आजतक को भी जब महसूस हुआ कि रिपब्लिक भारत ने गेम बदल दिया है तो वह भी रिपब्लिक भारत के रास्ते पर चल पड़ा और दूसरे पक्ष की रिपोर्टिंग करने जा पहुंचा, उसके बाद अन्य कई चैनल भी ऐसा करने लगे लेकिन अब आजतक सिर्फ रिपब्लिक के हाथों का डमरू बनकर रह गया है और अन्य चैनल भी रिपब्लिक भारत की कॉपी करने में लगे हैं. 

पहले न्यूज़ चैनल एक दूसरे को टारगेट नहीं करते थे लेकिन अब न्यूज़ चैनल सीधा एक दूसरे को टारगेट करते हैं और एक दूसरे की खबर को फेक बताते हैं. हाथरस में अब राजनीतिक पार्टियों की नहीं बल्कि न्यूज़ चैनलों के बीच में महाजंग हो रही है, देखते हैं कि यह महाजंग कहाँ पर जाकर रुकती है.

क्यों हो रही महाजंग?

रअसल महाजंग की  वजह ये है कि जो चैनल TRP में नंबर 1 हो जाता है उसे बड़े बड़ी कम्पनियाँ लाखों करोड़ों रुपये का विज्ञापन देती हैं, कई वर्षों तक आजतक नंबर 1 था और उसने खूब पैसा कमाया, अब रिपब्लिक भारत नंबर 1 है तो अधिकतर विज्ञापन उसे मिल रहे हैं, आजतक को ये बात हजम नहीं हो रही है और ज़ी न्यूज़ भी इसलिए परेशान है.

हाथरस मर्डर: युवती का मर्डर तो हुआ लेकिन मामला सनसनीखेज बनाने के लिए फैलाई गयी झूठे अफवाहें

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हाथरस: हाथरस केस में युवती का मर्डर तो हुआ और मर्डर करने वाले आरोपी संदीप को कड़ी सजा भी मिलनी चाहिए। लेकिन यह मामला काफी संदिग्ध होता जा रहा है क्योंकि आरोपी पक्ष का कहना है कि लड़की के भाई संदीप ने ही बहन को मारा है जबकि पीड़ित पक्ष गाँव के लोग दूसरे युवक संदीप पर आरोप लगा रहा है.

खैर इस मामले में दोषी को दजा मिलनी चाहिए, चाहे कोई भी संदीप हो लेकिन इस मामले में राजनीतिक फायदा लेने के लिए और दंगा करवाने के लिए खूब झूठ भी फैलाया जा रहा है. जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गैंगरेप की बात को नकारा गया है यही नहीं, खुद लड़की और उसकी माँ वीडियो में कह रही है कि उसके साथ कुछ नहीं हुआ है, सिर्फ गला दबाया गया है. देखिये वीडियो - 

 

 अब सवाल ये है कि गैंगरेप, रीढ़ की हड्डी तोड़ने, गर्दन तोड़ने, जीभ काटने आदि का झूठ फैलाकर मामले को सनसनीखेज क्यों बनाया गया और किन लोगों ने झूठ फैलाया।

अब इस मामले में कट्टरपंथी संगठन PFI और SDPI का नाम सामने आ रहा है, ऐसा कहा जा रहा है कि PFI ने कई मीडिया चैनलों को हायर किया, करोड़ों रुपये खर्च किये और देखते ही देखते गैंगरेप, रीढ़ की हड्डी तोड़ने, गर्दन तोड़ने, जीभ काटने आदि का झूठ फैला दिया गया.

साजिशकर्ताओं का प्लान कामयाब भी हो गया, हाथरस में राजनीतिक टूरिज्म शुरू हो गया, हर शहर में कैंडल मार्च किया जाने लगा है, हर नेता अपने बयान में यही कह रहा था कि हाथरस में हैवानियत हुई है, लड़की का गैंगरेप हुआ, रीढ़ की हड्डी तोड़ने, गर्दन तोड़ने, जीभ काट ली गयी, जबकि ये सब झूठ था.

पीड़ित परिवार का कहना है कि वे सब बाजरा काटकर साथ में ही आ रहे थ, कोई संदीप आया और लड़की  को बाजरे में खेत में ले गया, वहां पर उसका गला दबा दिया गया. गला दबाते समय जीभ में भी चोट आयी लेकिन जीभ काटी नहीं गयी क्योंकि लड़की ने खुद अपने मुंह से बोलकर बयान दिया है.

हम यह मानते हैं कि हत्यारे को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए लेकिन किसी मामले को सनसनीखेज बनाने और राजनीतिक फायदा लेने के लिए गैंगरेप, रीढ़ की हड्डी तोड़ने, गर्दन तोड़ने, जीभ काटने आदि का झूठ फैलाया जाय और देश में दंगा कराने की कोशिश की जाय, इसीलिए हमने इस खबर में सच बताने की कोशिश की है.

चुपचाप मीटिंग का अब आया रिजल्ट: AIIMS के डॉक्टर ने सुशांत मर्डर को बता दिया आत्महत्या

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फरीदाबाद, 5 अक्टूबर: कुछ दिनों पहले भाजपा के बड़े नेता देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना नेता संजय राउत ने चुपचाप एक बड़े होटल में मीटिंग की थी लेकिन यह मीटिंग मीडिया को पता चल गयी और खबर वायरल हो गयी.

इस मीटिंग की बात पता चलते ही पूरे देश के लोग हैरान हो गए क्योंकि भाजपा और शिवसेना के बीच जानी दुश्मनी चल रही है, ऐसे में गुपचुप मीटिंग के कई अनुमान निकाले जाने लगे.

यह भी चर्चा शुरू हो गयी कि भाजपा और शिवसेना के बीच में सुशांत का केस दबाने की डील हो गयी है, इस डील के अनुसार बिहार चुनाव के बाद दोनों पार्टियां मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाएंगी और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बनेंगे।

पहले इन सब बातों को सिर्फ चर्चा ही समझा जा रहा था लेकिन अब इसका परिणाम भी सामने आ गया, AIIMS के डॉक्टर सुधीर गुप्ता जो पहले खुद इस केस पर डाउट कर रहे थे और सुशांत की आत्महत्या को संदिग्ध बता रहे थे, अब उन्होंने यूटर्न कर दिया और कुछ मीडिया चैनलों को बता दिया कि सुशांत राजपूत ने आत्महत्या की है.

अब सवाल ये उठता है कि सुधीर गुप्ता ने खुद यूटर्न मारा या उन्हें यूटर्न मारने के लिए केंद्र सरकार ने कहा, क्योंकि डॉक्टर सुधीर गुप्ता के बयान को आजतक सहित कुछ मीडिया चैनल और शिवसेना पार्टी अपनी विजय के रूप में देख रही है जबकि भाजपा पार्टी डॉ सुधीर गुप्ता के बयान पर खामोश है और सिर्फ तमाशा देख रही है.

भाजपा सरकार की इस ख़ामोशी को देखकर लोग यही कह रहे हैं कि यह देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना के बीच में गुपचुप मीटिंग का परिणाम है.

लोग न्याय के लिए CBI जांच की मांग करते हैं, हाथरस पीड़िता का भाई बोला, हमें CBI जाँच नहीं चाहिए

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हाथरस, 4 अक्टूबर: अधिकतर देखा जाता है कि लोग न्याय के लिए CBI जांच की मांग करते हैं लेकिन हाथरस मामले में कहानी विल्कुल उल्टी चल रही है, मृतका का भाई CBI जांच नहीं चाहता।

यहाँ यह भी बता दें कि आरोपी पक्ष मृतका के भाई पर भी बहन की ह्त्या का आरोप लगा रहा है, आरोपी पक्ष का कहना है क़ि मृतका का एक लड़के से करीब दो वर्षों से प्रेम सम्बन्ध था, एक लड़के के साथ देखने पर भाई ने खुद ही बहन को मार दिया और आरोप चार लड़कों पर लगा दिया।

यही नहीं आरोपी पक्ष कह रहा है कि जब लड़की और माँ खुद ही कह रही है कि गैंगरेप नहीं हुआ है उसके बाद भी इस मामले में गैंगरेप का झूठा आरोप लगाया जा रहा है.

खैर इस मामले में अब राजनीति भी शुरू हो गयी है, कल राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने हाथरस में पीड़ित परिवार से मुलाक़ात की और उनकी हर संभव मदद का भरोसा दिया।

मामले में राजनीति होते देखकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद ही इस मामले की CBI जांच की शिफारिश कर दी, आश्चर्य तो तब हुआ जब मृतका पीड़िता के भाई ने कहा - हमें CBI जांच नहीं चाहिए क्योंकि इस मामले की जांच SIT कर रही है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले पीड़ित परिवार को पुलिस और SIT पर भी भरोसा नहीं था लेकिन CBI जांच सुनते ही पीड़ित परिवार को SIT पर भी भरोसा हो गया.

पुलिस की मनमानी जारी, अब गैंगरेप पीड़िता का खुद ही कर दिया अंतिम संस्कार, योगी सरकार पर उठे सवाल

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हाथरस: हाथरस गैंगरेप और मर्डर मामले में हाथरस पुलिस पहले से ही सवालों के घेरे में है, शायद इसीलिए विपक्षी पार्टियों को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा मिल गया है, ऐसे कठिन माहौल में पुलिस गलतियों पर  गलतियां करती जा रही है, अब खबर आयी है कि पुलिस ने गैंगरेप पीड़िता मृतका का रातों रात चुपचाप, बिना परिवार को बताये, खुद ही अंतिम संस्कार कर दिया।

हाथरस पुलिस ने इस गैरजिम्मेदाराना व्यवहार से योगी सरकार सवालों के घेरे में आ गयी है, गैंगरेप और मर्डर के आरोपियों पर कड़ी कार्यवाही के बजाय पीड़ित परिवार को बेटी के अंतिम सस्कार का मौका भी नहीं दिया गया, चारों आरोपी जेल में हैं लेकिन लोग इस आरोपियों का भी अंजाम विकास दूबे जैसा चाहते हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुलिस इस मामले में सफाई पर सफाई दे रहा है, पहले हत्या के तरीके पर सफाई दी गयी और बताया गया कि युवती की गला दबाकर हत्या की गयी है, अब अधिकारियों का कहना है कि परिवार को बताकर अंतिम संस्कार किया गया है.

पुलिस का यह भी कहना है कि इस मामले में अफवाह ज्यादा फैलाई जा रही है, अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्यवाही की भी चेतावनी दी गयी है लेकिन सवाल ये है कि पुलिस की कार्यवाही से पीड़ित परिवार संस्तुष्ट क्यों नहीं है.

कृषि बिल 2020: क्या गाँवों में बढ़ेगा रोजगार, क्या किसानों का बढ़ेगा मुनाफ़ा, क्या बढ़ेगी महगाई?

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फरीदाबाद, 24 सितम्बर: मोदी सरकार ने तीन कृषि और किसान से सम्बंधित बिलों को लोकसभा और राज्य सभा से पास कर दिया है, राष्ट्रपति से भी इसे मंजूरी मिल चुकी है, विपक्षी पार्टियां इस बिल का विरोध कर रही हैं, पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं. हालाँकि हम इस आर्टिकल में इस बिल के फायदे और आगे आने वाली परेशानियों का जिक्र करेंगे।

सबसे पहले तीनों बिलों का नाम लिखना जरूरी है - 

1. The Farmers Produce, Trade and Commerce Act 2020

2. The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services act 2020

3. The Essential Commodities (Amendment) Act 2020

मोदी सरकार ने उपरोक्त तीनों कानून पास कर दिए हैं. मोदी सरकार इस कानून के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में  रोजगार बढ़ाने, किसानों को अधिक मुनाफा दिलाने और कृषि पैदावार अधिक बढ़ाने का दावा कर रही है तो विपक्षी दल इस कानून को किसान विरोधी बिल बता रहे हैं.

क्या ख़त्म होगी रोजगार की समस्या

यह तो मानना पड़ेगा की कोरोना महामारी के वक्त करोड़ों लोगों का बड़े बड़े शहरों से गाँवों की तरफ पलायन हुआ और अब करोड़ों बेरोजगार लोग अपने गाँवों में रोजगार मिलने का इन्तजार कर रहे हैं.

The Essential Commodities (Amendment) Act 2020 में एसेंशियल फ़ूड जैसे अनाज, दालें, खाद्य तेल, प्याज और आलू को एसेंशियल फ़ूड की लिस्ट से बाहर कर दिया गया है जिसके बाद प्राइवेट कम्पनियाँ इन सब चीजों की मनचाहा भण्डारण कर सकेंगे। इस कानून के पास होने से अब प्राइवेट कंपनियां कृषि क्षेत्र में बेतहाशा निवेश करेंगी, बड़े बड़े गोदाम बनेगें, फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट और सेकेंडरी प्रोडक्ट्स के प्लांट लगेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की जनता को रोजगार मिलेगा। किसान भी प्राइवेट मंडियों में अपनी फसलें बेच सकेंगे।

क्या प्राइवेट कम्पनियाँ करेंगी किसानों का शोषण

विपक्षी पार्टियों का कहना है कि अब अडानी अम्बानी अपनी मंडी और गोदाम बनाएंगे और सरकारी मंडियां ख़त्म हो जाएगीं जिसके बाद प्राइवेट कम्पनियाँ सस्ते दामों में किसानों की  फसलें खरीदकर उनका शोषण करेंगी। सरकार को विपक्षी पार्टियों की इस चिंता को दूर करना चाहिए और किसानों का शोषण करने वाली कंपनियों को कड़ी सजा का प्रावधान करना चाहिए।

क्या किसानों का मुनाफ़ा बढ़ेगा

सरकार ने किसानों का मुनाफ़ा बढ़ने का दावा किया है तो विपक्षी पार्टियां किसानों के नुकसान और MSP ख़त्म करने की बात कर रही हैं हालाँकि सरकार का कहना है कि ना तो मंडियां ख़त्म होंगी और ना ही MSP ख़त्म होगी, सरकार का कहना है कि अब किसानों को  पैदावार बेचने के लिए कई विकल्प मिलेंगे। किसान को जहाँ फायदा नजर आए वहां उपज बेच सकता है. अगर उसे किसी मंडी में MSP से ज्यादा पैसा मिलता है तो वह उस मंडी में उपज बेचने के लिए स्वतंत्र है.

कहीं बढ़ ना जाएगी मंहगाई

जनता की चिंता यह है कि अगर प्राइवेट कम्पनियाँ, अनाज, दालों, आलू-प्याज और तेल का भण्डारण कर लेंगी वह इन्हें मंहगे दामों में बेचेंगी, इससे मंहगाई आएगी, गरीबों का जीना मुश्किल हो जाएगा। सरकार को जनता की यह चिंता भी दूर करनी चाहिए।

डिप्टी चेयरमैन पर हमला, राज्य सभा से ये 8 सांसद किये गए सस्पेंड

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फरीदाबाद, 21 सितम्बर: राज्य सभा में 20 सितम्बर को जमकर हंगामा हुआ था, डिप्टी चेयरमैन हरवंश राय पर हमला किया गया, था उन्हें गलियां दी गयी थी, उनका माइक तोड़ दिया गया और रूल बुक भी फाड़कर फेंक दी गयी, यही नहीं कई मार्शलों पर भी हमला किया गया, आप सांसद संजय सिंह का मार्शल को पीटते हुए वीडियो भी वायरल हुआ था, देखिये वीडियो - 

राज्यसभा में गुंडई करने वाले 8 सांसदों पर कार्यवाही हुई है, इन्हें एक हप्ते के लिए सस्पेंड कर दिया गया है, इनके नाम हैं - 
TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन, 
आप सांसद संसय सिंह, 
कांग्रेस सांसद राजीव सतय, रिपुन बोरा और सैयद हुसैन, 
CPI सांसद केके रागेश और एलमाराम करीम।

देखिये MCF क्षेत्र के वार्ड - 23, सूर्या विहार पार्ट-2 का हाल, डेढ़ साल से खुदी है सड़क

 

फरीदाबाद, 11 सितम्बर:  फरीदाबाद नगर निगम ने 26 गाँवों को अपने दायरे में लेने का फैसला किया है लेकिन कई गाँवों में MCF का विरोध हो रहा है. कुछ लोग कह रहे हैं कि अभी नगर निगम ने अपने क्षेत्र का विकास नहीं किया है, हर तरफ गन्दगी, सीवर समस्या, गंदे पानी की समस्या और टूटी सड़कों की समस्या है.

अगर  गौर किया जाए तो ये लोग सच बोल रहे हैं, फोटो में दिख रहा एरिया MCF क्षेत्र में आता है, वार्ड - 23, सूर्या विहार पार्ट - 2 का हाल आप खुद देख सकते हैं, यहाँ के लोगों ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले सीवर के लिए यह सड़क खोदी गयी थी जिसे आज तक बनाया नहीं गया है, क्षेत्र के लोगों की जिंदगी नरक बन गयी है.

यही हाल कई अन्य क्षेत्रों का भी है. पर्वतिया कॉलोनी, नंगला, ओल्ड फरीदाबाद सहित कई क्षेत्रों में ऐसे ही हालात देखने को मिल रहे हैं. इन क्षेत्रों में भी सड़कें खोद दी गई हैं लेकिन कई महीनें बीत जाने के बाद भी सड़कों को फिर से नहीं बनाया गया है और ना ही सीवर सिस्टम दुरुस्त हो पाए जिसकी वजह से जगह जगह जलभराव की समस्या देखने को मिल रही है.

सुशांत का संदिग्ध मर्डर और रिया-शौविक ड्रग्स रैकेट गैंग की जाँच कर रहे NCB के बारे में जानिये

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नई दिल्ली: सुशांत के संदिग्ध मर्डर केस के बाद Narcotics Control Bureau उर्फ़ NCB चर्चा में आ गया है, लोग इस विभाग के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हैं, लोग यह भी जानना चाहते हैं कि NCB किन क्षेत्र में काम करता है और इसका दायरा क्या है. लोग यह भी जानना चाहते हैं कि NCB केंद्र सरकार के अंडर आता है या राज्य सरकार के अंडर।

क्या है NCB - What is Narcotics Control Bureau

NCB या Narcotics Control Bureau केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय के अंडर काम करने वाली एजेंसी है जो ड्रग्स से संबंधित मामलों की जांच करता है. NCB सर्वोच्च दवा कानून प्रवर्तन एजेंसी है जिसे विभिन्न केंद्रीय / राज्य एजेंसियों के बीच ड्रग्स से सम्बंधित मामलों में समन्वय बनाकर काम करने के लिए बनाया गया है.

एनसीबी में काम करना बहुत बड़ी चुनौती है क्योंकि इसपर लोगों को बहुत भरोसा है और उस भरोसे पर खरा उतरना इस विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी है. Narcotics Control Bureau का गठन 17 मार्च 1986 को किया गया था.

IPS राकेश स्थाना NCB या Narcotics Control Bureau के डायरेक्टर जनरल हैं. वह गुजरात के 1984 कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं और काफी ईमानदार माने जाते हैं.