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बहुत टफ़ हुआ चुनाव, फरीदाबाद की 6 सीटों पर लोगों की राय, भाजपा के जीतने-हारने के 50-50 हुए चांस

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फरीदाबाद, 1  अक्टूबर: लोकतंत्र की मजबूती के लिए विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है, भाजपा ने अबकी बार 75 पार का नारा दिया था जिसे सुनकर लोग कह रहे थे कि अगर विपक्ष नहीं होगा तो भाजपा वाले मनमानी करेंगे। अब लोगों की चिंता दूर हो गयी है क्योंकि हरियाणा भाजपा ने ऐसे  ऐसे उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं जिसकी वजह से ऐसा लगने लगा है कि अब विपक्ष वालों को भी कुछ सीटें मिल जाएंगी और विपक्ष भाजपा वालों को मनमानी नहीं करने देंगे।

अगर फरीदाबाद की बात करें तो यहाँ की 6 सीटों में से 5 कमजोर उम्मीदवार घोषित किये गए हैं जिनके बारे में लोग अभी से कहना शुरू कर दिए हैं कि इनका जीतना मुश्किल है.

अगर NIT विधानसभा की बात करें तो यहाँ से पूर्व इनेलो विधायक नगेंदर भड़ाना को टिकट दी गयी है, यहाँ पर भाजपा कार्यकर्ता उनसे काफी दूर हैं, भाजपा कार्यकर्ता यशवीर डागर के लिए टिकट चाहते थे लेकिन भाजपा ने नगेंदर भड़ाना को वरीयता दी. ये तो तय है कि यशवीर डागर को टिकट ना मिलने से निराशा में डूबे भाजपा कार्यकर्ता नागेंद्र भड़ाना के लिए काम नहीं करेंगे इसलिए यह सीट खतरे में रहेगी।

अगर बड़खल विधानसभा की बात करें तो यहाँ की विधायिका से जनता नाराज है, विधायिका हमेशा विवादों में रही हैं, वह ऑनलाइन पोल में भी कई विपक्षी नेताओं से हार चुकी हैं उसके बावजूद भी भाजपा ने उनपर भरोसा दिखाया, यह सीट भी खतरे में रहेगी।

अगर फरीदाबाद विधानसभा की बात करें तो यहाँ से उद्योग मंत्री विपुल गोयल की टिकट काटी गयी है और उनकी जगह पर नरेंद्र गुप्ता को टिकट दी गयी है जिन्हें कोई जानता ही नहीं। जिन्हें कोई जानता ही नहीं उसे लोग वोट कैसे देंगे यह बड़ा सवाल है, यह सीट भी खतरे में रहेगी।

अगर तिगांव विधानसभा की बात करें तो यहाँ से देवेंद्र चौधरी को टिकट दिए जाने की संभावना थी और वो ये सीट निकाल भी सकते थे लेकिन वंशवाद की वजह से उन्हें टिकट नहीं दिया गया और 2014 में ललित नागर से हारे हुए उम्मीदवार राजेश नागर को टिकट दे दिया गया. राजेश नगर और कृष्णपाल गुर्जर के बीच राजनीतिक दूरी है इसलिए राजेश नागर को शायद कृष्णपाल गुर्जर का आशीर्वाद ना मिले, ऐसे में राजेश नागर यह सीट जैसे निकालेंगे यह बहुत बड़ा सवाल है. ऐसी  ख़बरें मिल रही हैं कि राजेश नागर को टिकट मिलने से कांग्रेस के धाकड़ विधायक ललित नागर के हौसले बुलंद हैं.

अगर बल्लभगढ़ विधानसभा की बात करें तो मौजूदा विधायक मुलचन्द शर्मा को टिकट मिलने से अन्य उम्मीदवार लड्डू बाँट रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि विधायक से जनता नाराज है और उन्हें हराकर जनता अपनी नाराजगी दूर करेगी। यह सीट खतरे में रहेगी।

अगर पृथला विधानसभा की बात करें तो यहाँ से सोहनपाल छोकर को टिकट मिली है. दूसरे दावेदार टेकचंद शर्मा और नयनपाल रावत अब उन्हें हराने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे। नयनपाल रावत ने तो निर्दलीय लड़ने का फैसला भी कर लिया है, आज वह एक सभा करके अपनी ताकत दिखाएंगे।

हालत ऐसे बन गए हैं कि अब भाजपा नेता ही भाजपा नेता को हराने का प्रयास करके उन्हें टिकट ना देने के आलाकमान के फैसले को गलत साबित करने का प्रयास करेंगे। आज यशवीर डागर प्याली चौक पर रैली करेंगे, विपुल गोयल अपने सेक्टर-16 ऑफिस पर रैली करेंगे, नयनपाल रावत मोहना में रैली करेंगे। अब चुनाव में फिर से जान आ गयी है, कांग्रेस थोड़ा ढीली पड़ रही थी लेकिन भाजपा नेताओं ने बगावत करके खुद विपक्षी उम्मीदवार बनने का फैसला कर लिया है.

भाजपा के लिए अच्छा ये होता कि गुटबाजी करने के बजाय पहले ही किसी एक को उम्मीदवार घोषित कर देती, भाजपा ने सभी नेताओं को तैयारी करने को बोल दिया, लोग एक महीनें से अपनी जमा-पूँजी अपने प्रचार पर खर्च कर रहे हैं और कल उन्हें टिकट ना देकर उनका ना सिर्फ आर्थिक नुकसान कर दिया बल्कि समाज में बेइज्जती भी कर दी.
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