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बाल मजदूरी की बीमारी ख़त्म करने के लिए मिशन जागृति NGO ने शुरू किया अभियान

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फरीदाबाद: मिशन जाग्रति के द्वारा विश्व बाल मजदूरी निषेध दिवस कि पूर्व संध्या पर पाठशाला के बच्चो के द्वारा  राष्ट्रीय बाल श्रमिक परियोजना की अधिकारी रुक्मणी के दिशा निर्देश पर एक नाटक प्रस्तुत किया गया. इस नाटक को तैयार करवाने में हिमांशु भट्ट, कोमल और मनीष का विशेष योगदान रहा.  इस नाटक के माध्यम से शिक्षा की जरुरत को बताया गया.    

संस्था के  संस्थापक प्रवेश मलिक ने कहा कि बचपन, इंसान की जिंदगी का सबसे हसीन पल, न किसी बात की चिंता और न ही कोई जिम्मेदारी। बस हर समय अपनी मस्तियों में खोए रहना, खेलना-कूदना और पढ़ना। लेकिन सभी का बचपन ऐसा हो यह जरूरी नहीं।

बाल मजदूरी की समस्या से आप अच्छी तरह वाकिफ होंगे। कोई भी ऐसा बच्चा जिसकी उम्र 14 वर्ष से कम हो और वह जीविका के लिए काम करे बाल मजदूर कहलाता है। गरीबी, लाचारी और माता-पिता की प्रताड़ना के चलते ये बच्चे बाल मजदूरी के इस दलदल में धंसते चले जाते हैं। 

आज दुनिया भर में 215 मिलियन ऐसे बच्चे हैं जिनकी उम्र 14 वर्ष से कम है। और इन बच्चों का समय स्कूल में कॉपी-किताबों और दोस्तों के बीच नहीं बल्कि होटलों, घरों, उद्योगों में बर्तनों, झाड़ू-पोंछे और औजारों के बीच बीतता है।

पाठशाला के प्रोजेक्ट डायरेक्टर महेश आर्य ने बताया कि भारत में यह स्थिति बहुत ही भयावह हो चली है। दुनिया में सबसे ज्यादा बाल मजदूर भारत में ही हैं। 1991 की जनगणना के हिसाब से बाल मजदूरों का आंकड़ा 11.3 मिलियन था। 2001 में यह आंकड़ा बढ़कर 12.7 मिलियन पहुंच गया। मिशन जाग्रति एनजीओ समाज में फैली इस कुरीति को पूरी तरह नष्ट करने का प्रयास कर रही हैं।   

एनजीओ की सलाह्कार आशा भड़ाना के अनुसार एक मात्र शिक्षा की ही सीढ़ी है जो बाल मजदुरो को गरीबी के दल दल से बाहर निकल सकती है. आशा ने बताया कि बड़े शहरों के साथ-साथ आपको छोटे शहरों में भी हर गली नुक्कड़ पर कई राजू-मुन्नी-छोटू-चवन्नी मिल जाएंगे जो हालातों के चलते बाल मजदूरी की गिरफ्त में आ चुके हैं। और यह बात सिर्फ बाल मजदूरी तक ही सीमि‍त नहीं है इसके साथ ही बच्चों को कई घिनौने कुकृत्यों का भी सामना करना पड़ता है। जिनका बच्चों के मासूम मन पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है।  आशा के अनुसार 50.2 प्रतिशत ऐसे बच्चे हैं जो सप्ताह के सातों दिन काम करते हैं। 53.22 प्रतिशत यौन प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं। इनमें से हर दूसरे बच्चे को किसी न किसी तरह भावनात्मक रूप से   प्रताड़‍ित ‍किया जा रहा है। 50 प्रतिशत बच्चे शारीरिक प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं।

महेश आर्य  ने बताया कि मिशन जाग्रति के द्वारा फरीदाबाद शहर में पिछले कई सालो से स्कूल चलए जाते है उन बच्चो के लिए जो कभी स्कूल नहीं जाते. अब पिछले साल अक्टूबर माह से  भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रीय बाल श्रमिक. परियोजना के माध्यम से  फरीदाबाद में दो स्कूल चलाये जा रहे है जिनमे लगभग 60 बच्चे शिक्षित हो रहे है जिनको मिशन जाग्रति के अध्यापकों के द्वारा लगातार उनके भविष्य को उज्जवल किया जा रहा है जिनमे महेश आर्य , मनीष , कोमल , नीतू , प्रिया, विकास कश्यप , स्वाति , सुनीता , कामनी बंगा ,सुष्मिता ,किरण , ज्योति , अनुष्का , आँचल , सोनल मान , प्रभा सोलंकी , धर्मबीर ,अनुवर्त, विपिन शर्मा , राजेश भूटिया, विकास चौधरी , दिनेश , का विशेष योगदान है !

डॉ सुभाष श्योराण के अनुसार भारत में बाल मजदूरों की इतनी अधिक संख्या होने का मुख्य कारण सिर्फ और सिर्फ गरीबी है। यहां एक तरफ तो ऐसे बच्चों का समूह है बड़े-बड़े मंहगे होटलों में 56 भोग का आनंद उठाता है और दूसरी तरफ ऐसे बच्चों का समूह है जो गरीब हैं, अनाथ हैं, जिन्हें पेटभर खाना भी नसीब नहीं होता। दूसरों की जूठनों के सहारे वे अपना जीवनयापन करते हैं। 

जब यही बच्चे दो वक्त की रोटी कमाना चाहते हैं तब इन्हें बाल मजदूर का हवाला देकर कई जगह काम ही नहीं दिया जाता। आखिर ये बच्चे क्या करें, कहां जाएं ताकि इनकी समस्या का समाधान हो सके। सरकार ने बाल मजदूरी के खिलाफ कानून तो बना दिए। इसे एक अपराध भी घोषि‍त कर दिया लेकिन क्या इन बच्चों की कभी गंभीरता से सुध ली? 

मिशन जाग्रति के संरक्षक श्री तेजपाल सिंह जी ने कहा कि बाल मजदूरी को जड़ से खत्म करने के लिए जरूरी है गरीबी को खत्म करना। इन बच्चों के लिए दो वक्त का खाना मुहैया कराना। इसके लिए सरकार को कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। सिर्फ सरकार ही नहीं आम जनता की भी इसमें सहभागिता जरूरी है। हर एक व्यक्ति जो आर्थिक रूप से सक्षम हो अगर ऐसे एक बच्चे की भी जिम्मेदारी लेने लगे तो सारा परिदृश्य ही बदल जाएगा। 

क्या आपको नहीं लगता कि कोमल बचपन को इस तरह गर्त में जाने से आप रोक सकते हैं? देश के सुरक्षित भविष्य के लिए वक्त आ गया है कि आपको यह जिम्मेदारी अब लेनी ही होगी। क्या आप लेंगे ऐसे किसी एक मासूम की जिम्मेदारी? 

क्युकि किसी ने कहा है कि बच्चों के मासूम बचपन के खोने पर, बिलख रहा हैं विश्व, न रोका गया इसे जल्दी से तो, खो देगा हर राष्ट्र अपना भविष्य ।।

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